8th Pay Commission: सेना की तर्ज पर रेलवे पेंशनर्स के लिए भी वन रैंक वन पेंशन! 8वें पे कमीशन से किसने की यह डिमांड?
नई दिल्ली: सेना की तर्ज पर रेलवे पेंशनर्स के लिए भी वन रैंक, वन पेंशन की मांग की गई है। रेलवे के रिटायर्ट कर्मचारियों की संस्था रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने 8वें पे कमीशन अपनी सिफारिशें सौंपी हैं। इसमें रेलवे के रिटायर कर्मचारियों को आर्मी की तरह वन रैंक, वन पेंशन की सुविधा देने की मांग की गई है। उसका कहना है कि वन रैंक, वन पेंशन के कॉन्सेप्ट को सिविलियन पेंशनर्स तक बढ़ाने की सिफारिश की है ताकि समान रैंक और सर्विस लेंथ वाले रिटायर लोगों को एक जैसी पेंशन मिले।

RSCWS ने 8वें पे कमीशन को बेसिक पे को मजबूत करने पर ध्यान देने की सिफारिश की है। इसका सीधा असर पेंशन, ग्रेच्युटी और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट पर पड़ता है। पेंशनर बॉडी ने 1 जनवरी, 2026 तक महंगाई के लेवल के आधार पर मिनिमम सैलरी में बदलाव की भी मांग की है। साथ ही सालाना इंक्रीमेंट रेट को 3% से बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया है। उसने पे कमीशन से पे मैट्रिक्स में गड़बड़ियों और सभी लेवल पर सैलरी में कमी को भी दुरुस्त करने के लिए कहा है। उसका कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण पे स्ट्रक्चर के कई पहलुओं पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है।
पेंशन कम्यूटेशन रिस्टोरेशन पीरियड
संस्था का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर से इनकम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए और किसी भी सैलरी रिवीजन के साथ पेंशन में भी उसी हिसाब से बदलाव होना चाहिए। RSCWS ने बताया है कि लगातार महंगाई ने पिछले कुछ साल में कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों की खरीदने की ताकत कम कर दी है। मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर बेसिक पे को मजबूत करने के बजाय अलाउंस और महंगाई भत्ते पर ज्यादा जोर देता है। उसने सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के बीच कम्पनसेशन में बढ़ते अंतर को लेकर भी चिंता जताई है।
पेंशनर बॉडी ने मांग की है कि पेंशन कम्यूटेशन रिस्टोरेशन पीरियड का रिव्यू करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि पेंशनरों को उनकी पूरी पेंशन पहले मिल सके। इसने रिस्टोरेशन पीरियड को 15 साल से घटाकर 10-12 साल करने के लिए कहा है। RSCWS ने साथ ही सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) के तहत ज्यादा इंश्योरेंस कवरेज और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी की भी मांग की है।
RSCWS ने 8वें पे कमीशन को बेसिक पे को मजबूत करने पर ध्यान देने की सिफारिश की है। इसका सीधा असर पेंशन, ग्रेच्युटी और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट पर पड़ता है। पेंशनर बॉडी ने 1 जनवरी, 2026 तक महंगाई के लेवल के आधार पर मिनिमम सैलरी में बदलाव की भी मांग की है। साथ ही सालाना इंक्रीमेंट रेट को 3% से बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया है। उसने पे कमीशन से पे मैट्रिक्स में गड़बड़ियों और सभी लेवल पर सैलरी में कमी को भी दुरुस्त करने के लिए कहा है। उसका कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण पे स्ट्रक्चर के कई पहलुओं पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है।
पेंशन कम्यूटेशन रिस्टोरेशन पीरियड
संस्था का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर से इनकम में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होनी चाहिए और किसी भी सैलरी रिवीजन के साथ पेंशन में भी उसी हिसाब से बदलाव होना चाहिए। RSCWS ने बताया है कि लगातार महंगाई ने पिछले कुछ साल में कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों की खरीदने की ताकत कम कर दी है। मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर बेसिक पे को मजबूत करने के बजाय अलाउंस और महंगाई भत्ते पर ज्यादा जोर देता है। उसने सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के बीच कम्पनसेशन में बढ़ते अंतर को लेकर भी चिंता जताई है।
पेंशनर बॉडी ने मांग की है कि पेंशन कम्यूटेशन रिस्टोरेशन पीरियड का रिव्यू करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि पेंशनरों को उनकी पूरी पेंशन पहले मिल सके। इसने रिस्टोरेशन पीरियड को 15 साल से घटाकर 10-12 साल करने के लिए कहा है। RSCWS ने साथ ही सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) के तहत ज्यादा इंश्योरेंस कवरेज और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी की भी मांग की है।
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