RBI Repo Rate Update: पेट्रोल-डीजल के बाद अब महंगे कर्ज की मार? जानिए क्यों ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर है आरबीआई

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आम जनता के लिए एक और बड़ा झटका इंतजार कर रहा है। आने वाले समय में देश का केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक बड़ा फैसला ले सकता है। एक तरफ सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ आरबीआई का एक संभावित फैसला आम नागरिकों और व्यापारियों दोनों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
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क्या आरबीआई देने जा रहा है झटका?


देश की जानी-मानी ब्रोकरेज कंपनी जेरोधा (Zerodha) के सीईओ नितिन कामथ ने चेतावनी दी है कि भारत को आने वाले सालों में महंगाई के एक बेहद मुश्किल दौर का सामना करना पड़ सकता है। कामथ का मानना है कि अगर मौजूदा हालातों में सुधार नहीं हुआ, तो आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा होने पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे सभी तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे और आपकी जेब पर ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा।

नितिन कामथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि भारत इस वक्त दोहरे संकट से जूझ रहा है। पहला संकट अल नीनो (El Nino) के कारण कमजोर मानसून का खतरा है, और दूसरा संकट पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की आसमान छूती कीमतें हैं। जब ये दोनों चीजें एक साथ मिलती हैं, तो देश में महंगाई बेकाबू हो सकती है। आपको बता दें कि पिछले एक साल से आरबीआई ने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखा है। लेकिन अगर पेट्रोल, डीजल, खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों के दाम लगातार बढ़ते रहे, तो केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।



कमजोर मानसून बढ़ाएगा मुसीबत


नितिन कामथ ने अपनी पोस्ट में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि इस साल सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश होने का अनुमान है। भले ही यह आंकड़ा देखने में छोटा लगे, लेकिन भारत में सालभर की कुल बारिश का लगभग 70 फीसदी हिस्सा मानसून के दौरान ही होता है। आज भी देश के करीब 60 फीसदी किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर हैं। कामथ ने ध्यान दिलाया कि साल 1951 के बाद से जितने भी सालों में अल नीनो का असर रहा है, उनमें से करीब 60 फीसदी बार भारत को सूखे या कम बारिश का सामना करना पड़ा है। कमजोर मानसून का सीधा असर चावल, दाल, चीनी और सब्जियों जैसी जरूरी फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। जैसे ही फसलों को नुकसान होगा, देश में खाने-पीने की चीजों की महंगाई बहुत तेजी से बढ़ जाएगी।

कच्चे तेल का संकट


ग्लोबल एनर्जी मार्केट भी इस समय भारत पर लगातार दबाव बना रहा है। नितिन कामथ ने हॉर्मुज जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) के हालातों को एक बड़ा संकट बताया है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की औसत कीमत अप्रैल में 114 डॉलर प्रति बैरल और मई में करीब 106 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक स्तर है। कच्चे तेल के महंगे होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, बल्कि माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) का खर्च, खाद की लागत और देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ जाता है।







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