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RBI Rule Update: एक व्यक्ति कितने बैंकों में खुलवा सकता है खाता? जानिए क्या कहते हैं रिजर्व बैंक के नियम

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आज के इस आधुनिक दौर में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसका बैंक अकाउंट न हो। लोग अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने और बचत करने के लिए बैंक खाता खुलवाते हैं। कई लोग तो एक से ज्यादा यानी दो, तीन या उससे भी अधिक अकाउंट्स रखते हैं। इंटरनेट और डिजिटलाइजेशन ने बैंकिंग सिस्टम को इतना आसान बना दिया है कि लोग अलग-अलग बैंकों में अपने खाते खोलने के लिए आसानी से प्रेरित हो जाते हैं।
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टेक्नोलॉजी में आए नए बदलावों की वजह से अब किसी को भी बैंक की शाखा (ब्रांच) में जाकर लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ती। लोग अपने घर बैठे-बैठे ही मोबाइल से कुछ मिनटों में नया खाता खोल लेते हैं। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में यह सवाल या उलझन रहती है कि क्या एक से ज्यादा बैंक अकाउंट रखने पर कोई कानूनी समस्या हो सकती है? अगर आप भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि आरबीआई (RBI) के नियमों के मुताबिक एक व्यक्ति को कितने बैंक खाते खोलने की इजाजत है, तो इसकी पूरी जानकारी नीचे विस्तार से दी गई है।

जानिए क्या है बैंक अकाउंट रखने की कानूनी सीमा


अगर सीधे शब्दों में कहें तो भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से किसी भी नागरिक के लिए बैंक अकाउंट खोलने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। इसका मतलब है कि आप अपनी मर्जी से जितने चाहें उतने बैंकों में अनलिमिटेड अकाउंट्स खुलवा सकते हैं। कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है।

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हालांकि, कानूनन छूट होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बहुत सारे बैंक अकाउंट रखना आपके लिए फायदेमंद ही होगा। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स और आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि एक आम इंसान के लिए दो से तीन बैंक अकाउंट्स रखना सबसे सही और आदर्श माना जाता है।

आप अपने इन खातों को अपनी जरूरत के हिसाब से बांट सकते हैं। मिसाल के तौर पर, आपका एक अकाउंट आपकी सैलरी या मुख्य बिजनेस के लिए हो सकता है। दूसरा अकाउंट आपके निवेश (इन्वेस्टमेंट) या घर के रोजमर्रा के खर्चों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, तीसरे अकाउंट को आप इमरजेंसी फंड या लंबी अवधि की बचत के तौर पर रख सकते हैं। इस संख्या से ज्यादा अकाउंट होने पर फायदों के मुकाबले नुकसान बढ़ने लगते हैं और इतने सारे खातों को संभालना एक आम व्यक्ति के लिए सिरदर्द बन जाता है।


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जरूरत से ज्यादा बैंक खाते रखने के नुकसान


  • मिनिमम बैलेंस का झंझट: बहुत सारे बैंक अकाउंट रखने का सबसे बड़ा नुकसान 'मिनिमम बैलेंस' (न्यूनतम राशि) बनाए रखने की मजबूरी है। आजकल लगभग सभी सरकारी और प्राइवेट कमर्शियल बैंक अपने खातों को एक्टिव रखने के लिए एक निश्चित मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त लगाते हैं। अगर आपके पास 5 या 6 अकाउंट हैं और आप उन सभी में जरूरी मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाते हैं, तो बैंक आपके ऊपर भारी पेनाल्टी (जुर्माना) लगा देते हैं। इससे आपके खाते से आपकी मेहनत की कमाई बेवजह कटती रहती है।
  • सालाना मेंटेनेंस और छुपे हुए चार्ज: हर एक्टिव बैंक अकाउंट के साथ आपको डेबिट कार्ड (एटीएम), एसएमएस अलर्ट और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। बैंक इन सुविधाओं के बदले हर साल एनुअल मेंटेनेंस चार्ज और हिडन फीस वसूलते हैं। जितने ज्यादा अकाउंट होंगे, उतना ही ज्यादा यह सालाना चार्ज आपकी जेब पर बोझ बढ़ाएगा।
  • अकाउंट का बंद होना और फ्रॉड का खतरा: जब हमारे पास बहुत सारे बैंक अकाउंट होते हैं, तो हम उन सभी के लेन-देन (ट्रांजैक्शंस) पर नियमित रूप से नजर नहीं रख पाते। साइबर क्राइम और धोखाधड़ी के इस दौर में ऐसे खातों के मिसयूज होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, यदि किसी खाते में लंबे समय तक (आमतौर पर दो साल या उससे अधिक) कोई लेन-देन न किया जाए, तो बैंक उसे 'डॉरमेंट' (निष्क्रिय) घोषित कर देता है, जिसे दोबारा चालू कराने के लिए आपको फिर से भाग-दौड़ करनी पड़ती है।

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सही समझदारी में ही है फायदा


आर्थिक समझदारी इसी में है कि आप सिर्फ उतने ही खाते चालू रखें जितने की आपको असल में जरूरत है। बेकार पड़े या इस्तेमाल न होने वाले अतिरिक्त बैंक खातों को बंद कर देना ही बेहतर विकल्प है ताकि आप पेनाल्टी और मानसिक तनाव दोनों से बच सकें।






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