हिमाचल ने लहराया शिक्षा का परचम, देश का चौथा पूर्ण शिक्षित राज्य बना

हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल करते हुए खुद को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया है। इससे पहले त्रिपुरा, मिज़ोरम और गोवा यह उपलब्धि प्राप्त कर चुके हैं, जबकि लद्दाख पूर्ण साक्षर केंद्रशासित प्रदेश बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने इस उपलब्धि को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
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हिमाचल प्रदेश की साक्षरता उपलब्धि


शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर अपने वर्चुअल संबोधन में कहा, “यह सरकार, समाज और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों की शक्ति को दर्शाता है।” उन्होंने बताया कि भारत की साक्षरता दर 2011 में 74 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 80.9 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा, “यह तब तक सही मायने में प्रगति नहीं होगी, जब तक साक्षरता प्रत्येक नागरिक के लिए जीवंत वास्तविकता न बन जाए।” हिमाचल प्रदेश की यह उपलब्धि शिक्षा को सभ्यता का आधार मानने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि को मजबूत करती है।

ULLAS’ कार्यक्रम की भूमिका


शिक्षा मंत्री ने बताया कि Understanding of Lifelong Learning for All in Society (ULLAS) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम में अब तक 3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 42 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े हैं। इनमें से 1.83 करोड़ लोगों ने बुनियादी साक्षरता व गणनात्मक आकलन भी पूरा किया है।


डिजिटल युग में साक्षरता


राज्य शिक्षा मंत्री जयंत चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों वाले राज्यों का पूर्ण साक्षरता हासिल करना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा, “सीमित स्कूलों, शिक्षकों और संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद, समुदायों ने स्वयं को संगठित किया, स्वयंसेवकों ने आगे बढ़कर योगदान दिया और सरकारों ने समर्थन प्रदान किया।” चौधरी ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की भी सराहना की, जिसने शिक्षा और समावेश को तेजी से बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि दशकों में होने वाली प्रगति भारत ने एक दशक में हासिल की है।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सफलता


शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों का साक्षरता में आगे आना प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अवसंरचना के बावजूद स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों ने मिलकर यह लक्ष्य हासिल किया।


हिमाचल प्रदेश की पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि भारत के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल पढ़ने-लिखने की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल साक्षरता और आत्मनिर्भरता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। उल्लास कार्यक्रम और सामूहिक प्रयासों के साथ, भारत विश्व स्तर पर साक्षरता के क्षेत्र में एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह उपलब्धि न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।