अफगान महिलाओं को ड्रेस कोड के नाम पर हिरासत में लेना 'गैरकानूनी और अस्वीकार्य': यूएन के विशेष दूत
काबुल, 9 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान में मानवाधिकार स्थिति की निगरानी करने वाले यूएन की ओर से तैनात विशेष दूत और प्रतिवेदक रिचर्ड बैनेट ने महिला अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। बेनेट ने हेरात प्रांत में महिलाओं और लड़कियों को तय ड्रेस कोड का पालन न करने पर पुलिस हिरासत में लिए जाने को अफसोसनाक बताया है। उन्होंने तालिबान प्रशासन से इन गिरफ्तारियों को तुरंत रोकने और हिरासत में ली गई महिलाओं को रिहा करने की मांग उठाई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान में "नैतिकता " कानून की हिफाजत में तैनात पुलिस ने हेरात में कम से कम 21 महिलाओं और लड़कियों को कथित तौर पर निर्धारित ड्रेस कोड का पालन न करने के आरोप में हिरासत में लिया है।
गिरफ्तारियां शहर के कई इलाकों, जिनमें साउदर्न रोड, अल्मास मार्केट और क़सर क्षेत्र शामिल हैं, में की गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिरासत में ली गई महिलाओं में हेरात क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यरत एक नर्स भी शामिल है।
रिचर्ड बेनेट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पोस्ट में कहा," लगातार तीसरे दिन बड़ी संख्या में महिलाओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया जा रहा है, जो न केवल चिंताजनक है बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य और अवैध भी है।
ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।"यह घटनाक्रम उस निर्देश के बाद सामने आया है जिसे हेरात में तालिबान के "सदाचार के प्रचार और बुराई की रोकथाम" विभाग ने जारी किया था। इस निर्देश में पुरुष अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि उनके परिवार की महिलाएं तालिबान की ओर से निर्धारित इस्लामी पहनावे के नियमों का पालन करें।
एएमयू टीवी ने बताया कि निर्देश के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों पर बिना उचित पर्दे, चेहरे को ढके बिना, तंग कपड़े पहनने या मेकअप करने वाली महिलाओं को हिरासत में लिया जा सकता है और उन्हें महिला निरोध केंद्र भेजा जा सकता है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 2021 में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें माध्यमिक शिक्षा पर रोक, विश्वविद्यालयों में पढ़ाई से प्रतिबंध, रोजगार के अवसरों में कमी और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी पर नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं। हालिया गिरफ्तारियों ने महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
--आईएएनएस
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