बुद्ध पूर्णिमा के दिन ज़रूर करें ये काम, जीवन में आएगी सकारात्मकता
हर साल वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। यह दिन सिर्फ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में भी बहुत खास माना जाता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था और इसी दिन उन्होंने महापरिनिर्वाण भी प्राप्त किया था। इसलिए यह दिन बहुत पवित्र माना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा 2025 में कब है?
पंचांग के अनुसार, इस साल बुद्ध पूर्णिमा 12 मई, सोमवार को मनाई जाएगी।
उदयातिथि के अनुसार 12 मई को ही बुद्ध पूर्णिमा मनाना शुभ माना गया है।
क्यों खास है बुद्ध पूर्णिमा?
बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ भगवान बुद्ध के जन्म का दिन नहीं है, बल्कि यही वह दिन है जब उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके अलावा, कुशीनगर में इसी दिन उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
यह दिन हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने जीवन में शांति, सत्य और संयम अपना सकते हैं। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, गंगा जैसे पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं।
सिद्धार्थ से बुद्ध बनने की कहानी
भगवान बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ था। वह एक राजकुमार थे लेकिन उन्हें राजसी वैभव में कोई आनंद नहीं मिला। उन्होंने सत्य की खोज में अपना राजपाठ छोड़ दिया और सात साल तक कठिन तप किया। अंत में वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह ‘बुद्ध’ कहलाए।
बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करें?
मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति से पहले भगवान बुद्ध को एक महिला ने खीर खिलाई थी। तभी से बुद्ध पूर्णिमा पर खीर बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है।
बुद्ध पूर्णिमा 2025 में कब है?
पंचांग के अनुसार, इस साल बुद्ध पूर्णिमा 12 मई, सोमवार को मनाई जाएगी।
- वैशाख पूर्णिमा तिथि शुरू होगी 11 मई को शाम 8:01 बजे
- समाप्त होगी 12 मई को रात 10:25 बजे
- चंद्रोदय का समय: 12 मई को शाम 6:57 बजे
उदयातिथि के अनुसार 12 मई को ही बुद्ध पूर्णिमा मनाना शुभ माना गया है।
क्यों खास है बुद्ध पूर्णिमा?
बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ भगवान बुद्ध के जन्म का दिन नहीं है, बल्कि यही वह दिन है जब उन्हें बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके अलावा, कुशीनगर में इसी दिन उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
यह दिन हमें सिखाता है कि कैसे हम अपने जीवन में शांति, सत्य और संयम अपना सकते हैं। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, गंगा जैसे पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं।
सिद्धार्थ से बुद्ध बनने की कहानी
भगवान बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ था। वह एक राजकुमार थे लेकिन उन्हें राजसी वैभव में कोई आनंद नहीं मिला। उन्होंने सत्य की खोज में अपना राजपाठ छोड़ दिया और सात साल तक कठिन तप किया। अंत में वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह ‘बुद्ध’ कहलाए।
बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- भगवान बुद्ध की मूर्ति को स्नान कराएं।
- खीर बनाकर भगवान बुद्ध को भोग लगाएं।
- ध्यान और प्रार्थना करें।
- गरीबों को अन्न, वस्त्र और दान दें।
- बुद्ध की शिक्षाओं का पाठ करें और उन पर अमल करने का संकल्प लें।
बुद्ध पूर्णिमा का भोजन
मान्यता है कि ज्ञान प्राप्ति से पहले भगवान बुद्ध को एक महिला ने खीर खिलाई थी। तभी से बुद्ध पूर्णिमा पर खीर बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है।
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