Budget 2026: रेल, डिफेंस या इंफ्रा? जानिए इस बजट में कौन सा सेक्टर भरेगा आपकी जेब
पिछले कुछ सालों के ट्रेंड को देखें तो सरकार का पूरा जोर 'कैपेक्स' (Capital Expenditure) यानी पूंजीगत खर्च पर रहा है। संकेतों की मानें तो वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए भी सरकार इस रफ़्तार को थमने नहीं देगी।
क्या है 'कैपेक्स'
अक्सर खबरों में हम 'कैपेक्स' शब्द सुनते हैं। सरल शब्दों में कहें तो कैपेक्स वो पैसा है जो सरकार देश की लंबी अवधि की संपत्ति बनाने पर खर्च करती है। इसमें सड़कें, पुल, रेलवे लाइन, हवाई अड्डे, अस्पताल और स्कूलों का निर्माण शामिल है।
जब सरकार कैपेक्स बढ़ाती है, तो इसका सीधा मतलब है कि इन सेक्टर्स में काम बढ़ेगा। काम बढ़ने से कंपनियों को ऑर्डर मिलेंगे, रोजगार पैदा होंगे और अंततः देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसीलिए शेयर बाजार के निवेशक कैपेक्स के आंकड़ों पर चील जैसी नजर रखते हैं।
वित्त वर्ष 2026 के लिए कैपेक्स की रकम 11.21 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। जानकारों का अनुमान है कि सरकार इसे 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। यानी यह आंकड़ा करीब 12 लाख करोड़ (12 ट्रिलियन) रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, कुछ लोगों के मन में सवाल है कि यह बढ़ोतरी 30-40% क्यों नहीं हो सकती? इस पर पीडब्ल्यूसी (PwC) के एक्सपर्ट राणेन बनर्जी का तर्क बहुत व्यावहारिक है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था में पैसा खपाने की भी एक सीमा होती है। अगर सरकार रातों-रात बजट को 30% बढ़ा भी दे, तो उसे जमीन पर उतारने के लिए उतनी ही बड़ी संख्या में कंस्ट्रक्शन कंपनियों और भारी मशीनों की जरूरत होगी, जो तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकतीं। इसलिए 10% से 15% की वृद्धि एक संतुलित और यथार्थवादी कदम माना जा रहा है।
रेल, रोड या डिफेंस... कौन मारेगा बाजी?
निवेशकों के लिए सबसे काम की बात यह है कि पैसा कहाँ लगाया जाए? आइए समझते हैं कि ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स किस सेक्टर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
1 फरवरी को आने वाला बजट बाजार के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। पिछले एक साल में कैपेक्स से जुड़े शेयरों ( Capex Stocks ) की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन अगर सरकार ने निवेश का गियर बदला, तो कंस्ट्रक्शन, डिफेंस और रेलवे से जुड़ी अच्छी कंपनियों के शेयरों में फिर से जान आ सकती है।
हालांकि, सरकार वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगी, इसलिए बहुत ज्यादा लोक-लुभावन घोषणाओं की उम्मीद कम है। एक स्मार्ट निवेशक के तौर पर आपकी नजर उन कंपनियों पर होनी चाहिए जिनके पास मजबूत ऑर्डर बुक है और जो सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा हैं।
क्या है 'कैपेक्स'
अक्सर खबरों में हम 'कैपेक्स' शब्द सुनते हैं। सरल शब्दों में कहें तो कैपेक्स वो पैसा है जो सरकार देश की लंबी अवधि की संपत्ति बनाने पर खर्च करती है। इसमें सड़कें, पुल, रेलवे लाइन, हवाई अड्डे, अस्पताल और स्कूलों का निर्माण शामिल है।जब सरकार कैपेक्स बढ़ाती है, तो इसका सीधा मतलब है कि इन सेक्टर्स में काम बढ़ेगा। काम बढ़ने से कंपनियों को ऑर्डर मिलेंगे, रोजगार पैदा होंगे और अंततः देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसीलिए शेयर बाजार के निवेशक कैपेक्स के आंकड़ों पर चील जैसी नजर रखते हैं।
इस बार खर्च में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद?
वित्त वर्ष 2026 के लिए कैपेक्स की रकम 11.21 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। जानकारों का अनुमान है कि सरकार इसे 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। यानी यह आंकड़ा करीब 12 लाख करोड़ (12 ट्रिलियन) रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि, कुछ लोगों के मन में सवाल है कि यह बढ़ोतरी 30-40% क्यों नहीं हो सकती? इस पर पीडब्ल्यूसी (PwC) के एक्सपर्ट राणेन बनर्जी का तर्क बहुत व्यावहारिक है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था में पैसा खपाने की भी एक सीमा होती है। अगर सरकार रातों-रात बजट को 30% बढ़ा भी दे, तो उसे जमीन पर उतारने के लिए उतनी ही बड़ी संख्या में कंस्ट्रक्शन कंपनियों और भारी मशीनों की जरूरत होगी, जो तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकतीं। इसलिए 10% से 15% की वृद्धि एक संतुलित और यथार्थवादी कदम माना जा रहा है।
रेल, रोड या डिफेंस... कौन मारेगा बाजी?
निवेशकों के लिए सबसे काम की बात यह है कि पैसा कहाँ लगाया जाए? आइए समझते हैं कि ब्रोकरेज हाउस और मार्केट एक्सपर्ट्स किस सेक्टर को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित हैं।1. डिफेंस सेक्टर (Defence Sector):
सबसे आगे इस बार के बजट में जिस सेक्टर के सबसे ज्यादा चमकने की उम्मीद है, वह है डिफेंस। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में डिफेंस खर्च पिछले अनुमानित 1.8 लाख करोड़ रुपये के आधार से 15% तक बढ़ सकता है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:- सरकार का 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशीकरण पर जोर।
- सेना के लिए जरूरी साजो-सामान की इमरजेंसी खरीदारी।
- घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बजट में अलग से आवंटन।
2. रेलवे (Railways):
सुरक्षा और आधुनिकता पर फोकस रेलवे हमेशा से बजट का अहम हिस्सा रहा है। इस बार सरकार का फोकस नई पटरियाँ बिछाने से ज्यादा 'सुरक्षा' पर हो सकता है। हालिया घटनाओं को देखते हुए कवच सिस्टम (Kavach System), बेहतर सिग्नलिंग और पटरियों के नवीनीकरण पर बड़ा खर्च हो सकता है। इसके अलावा नई और आधुनिक ट्रेनों की खरीद भी जारी रहेगी।3. इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure):
रफ्तार बनी रहेगी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए आवंटन में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार पहले से चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर जोर देगी। इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा), डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) जैसे नए जमाने के सेक्टर्स पर भी सरकार का हाथ खुला रह सकता है।निवेशकों को क्या करना चाहिए?
1 फरवरी को आने वाला बजट बाजार के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। पिछले एक साल में कैपेक्स से जुड़े शेयरों ( Capex Stocks ) की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है, लेकिन अगर सरकार ने निवेश का गियर बदला, तो कंस्ट्रक्शन, डिफेंस और रेलवे से जुड़ी अच्छी कंपनियों के शेयरों में फिर से जान आ सकती है। हालांकि, सरकार वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगी, इसलिए बहुत ज्यादा लोक-लुभावन घोषणाओं की उम्मीद कम है। एक स्मार्ट निवेशक के तौर पर आपकी नजर उन कंपनियों पर होनी चाहिए जिनके पास मजबूत ऑर्डर बुक है और जो सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा हैं।
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