₹5,000 SIP से बन जाएंगे करोड़पति? CA ने बताया निवेशकों की सबसे बड़ी गलती
आजकल ₹5,000 की मासिक SIP (Systematic Investment Plan) को लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का सबसे आसान तरीका बताया जाता है। निवेश से जुड़े कई कैलकुलेटर और उदाहरण यह दिखाते हैं कि छोटी-सी रकम को नियमित रूप से निवेश करके समय के साथ बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
हालांकि, बेंगलुरु के CA नितिन कौशिक का मानना है कि इस पूरी तस्वीर का एक अहम पहलू अक्सर निवेशकों की नजर से छूट जाता है। लोग आमतौर पर कंपाउंडिंग की ताकत पर ध्यान देते हैं, लेकिन महंगाई यानी Inflation के असर को उतनी गंभीरता से नहीं समझते। उनके अनुसार, सिर्फ SIP शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय के साथ निवेश राशि बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।
उनके मुताबिक, निवेशकों को आकर्षक कंपाउंडिंग चार्ट दिखाए जाते हैं, जिनमें भविष्य में बनने वाली बड़ी रकम पर जोर दिया जाता है। लेकिन इन गणनाओं में अक्सर यह बात प्रमुखता से नहीं बताई जाती कि समय के साथ Inflation लगातार पैसे की खरीद क्षमता को कम करता रहता है।
लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई निवेशक दशकों तक अपनी SIP राशि को बिना बढ़ाए उसी स्तर पर बनाए रखता है, तो यह एक महंगी गलती साबित हो सकती है।
उनके अनुसार, यदि कोई निवेशक 12% वार्षिक रिटर्न के अनुमान के साथ 20 वर्षों तक लगातार ₹5,000 की SIP जारी रखता है, तो उसका निवेश लगभग ₹50 लाख के फंड में बदल सकता है।
पहली नजर में यह रकम काफी आकर्षक और प्रभावशाली लगती है। यही वजह है कि SIP और कंपाउंडिंग को लेकर ऐसे उदाहरण निवेशकों को काफी प्रेरित करते हैं।
उन्होंने 6% वार्षिक Inflation दर का उदाहरण देते हुए बताया कि 20 साल बाद मिलने वाले ₹50 लाख की खरीद क्षमता आज के समय में लगभग ₹15 लाख के बराबर रह जाएगी।
यानी कागज पर दिखने वाला बड़ा फंड वास्तविक जीवन में उतना प्रभावशाली नहीं हो सकता, जितना पहली नजर में दिखाई देता है।
यदि आपकी आय, खर्च और जीवनशैली की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन आपकी SIP राशि वर्षों तक एक जैसी बनी हुई है, तो संभव है कि आप वास्तविक संपत्ति बनाने के बजाय केवल अपनी खरीद क्षमता का एक हिस्सा बचा रहे हों।
ऐसी स्थिति में निवेश बढ़ने के बावजूद वित्तीय लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
उनका मानना है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, निवेशकों को अपनी SIP में भी क्रमिक बढ़ोतरी करनी चाहिए। इससे कंपाउंडिंग का लाभ और अधिक प्रभावी हो जाता है और Inflation के असर को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।
यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर Step-Up SIP या SIP Top-Up जैसी रणनीतियों की सलाह देते हैं, जिनमें निवेशक हर साल अपनी निवेश राशि बढ़ाते हैं।
हालांकि, बेंगलुरु के CA नितिन कौशिक का मानना है कि इस पूरी तस्वीर का एक अहम पहलू अक्सर निवेशकों की नजर से छूट जाता है। लोग आमतौर पर कंपाउंडिंग की ताकत पर ध्यान देते हैं, लेकिन महंगाई यानी Inflation के असर को उतनी गंभीरता से नहीं समझते। उनके अनुसार, सिर्फ SIP शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय के साथ निवेश राशि बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।
SIP और Compounding का आकर्षण
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने एक पोस्ट में नितिन कौशिक ने कहा कि निवेश उद्योग अक्सर छोटी और स्थिर SIP को लेकर निवेशकों के बीच एक आरामदायक धारणा बना देता है।उनके मुताबिक, निवेशकों को आकर्षक कंपाउंडिंग चार्ट दिखाए जाते हैं, जिनमें भविष्य में बनने वाली बड़ी रकम पर जोर दिया जाता है। लेकिन इन गणनाओं में अक्सर यह बात प्रमुखता से नहीं बताई जाती कि समय के साथ Inflation लगातार पैसे की खरीद क्षमता को कम करता रहता है।
छोटी SIP से शुरुआत करना गलत नहीं
नितिन कौशिक का कहना है कि छोटी रकम से निवेश शुरू करने में कोई बुराई नहीं है। वास्तव में, एक छोटी SIP वित्तीय अनुशासन विकसित करने और नियमित निवेश की आदत बनाने का बेहतरीन तरीका है।लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई निवेशक दशकों तक अपनी SIP राशि को बिना बढ़ाए उसी स्तर पर बनाए रखता है, तो यह एक महंगी गलती साबित हो सकती है।
₹5,000 SIP का उदाहरण
अपनी बात समझाने के लिए नितिन कौशिक ने ₹5,000 प्रति माह की SIP का उदाहरण दिया।उनके अनुसार, यदि कोई निवेशक 12% वार्षिक रिटर्न के अनुमान के साथ 20 वर्षों तक लगातार ₹5,000 की SIP जारी रखता है, तो उसका निवेश लगभग ₹50 लाख के फंड में बदल सकता है।
पहली नजर में यह रकम काफी आकर्षक और प्रभावशाली लगती है। यही वजह है कि SIP और कंपाउंडिंग को लेकर ऐसे उदाहरण निवेशकों को काफी प्रेरित करते हैं।
Inflation बदल देता है पूरी तस्वीर
हालांकि, नितिन कौशिक के अनुसार वास्तविक तस्वीर तब सामने आती है जब महंगाई दर को भी गणना में शामिल किया जाता है।उन्होंने 6% वार्षिक Inflation दर का उदाहरण देते हुए बताया कि 20 साल बाद मिलने वाले ₹50 लाख की खरीद क्षमता आज के समय में लगभग ₹15 लाख के बराबर रह जाएगी।
यानी कागज पर दिखने वाला बड़ा फंड वास्तविक जीवन में उतना प्रभावशाली नहीं हो सकता, जितना पहली नजर में दिखाई देता है।
स्थिर निवेश भी बन सकता है जोखिम
नितिन कौशिक का मानना है कि यहीं पर अधिकांश निवेशक संपत्ति निर्माण को लेकर गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं।यदि आपकी आय, खर्च और जीवनशैली की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन आपकी SIP राशि वर्षों तक एक जैसी बनी हुई है, तो संभव है कि आप वास्तविक संपत्ति बनाने के बजाय केवल अपनी खरीद क्षमता का एक हिस्सा बचा रहे हों।
ऐसी स्थिति में निवेश बढ़ने के बावजूद वित्तीय लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
असली Wealth Creation का फॉर्मूला क्या है?
CA नितिन कौशिक के अनुसार, लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण का सबसे बड़ा आधार शुरुआती SIP राशि नहीं है, बल्कि समय-समय पर निवेश को बढ़ाने की क्षमता है।उनका मानना है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, निवेशकों को अपनी SIP में भी क्रमिक बढ़ोतरी करनी चाहिए। इससे कंपाउंडिंग का लाभ और अधिक प्रभावी हो जाता है और Inflation के असर को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।
यही कारण है कि वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर Step-Up SIP या SIP Top-Up जैसी रणनीतियों की सलाह देते हैं, जिनमें निवेशक हर साल अपनी निवेश राशि बढ़ाते हैं।
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