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खुशखबरी! इस सरकारी बैंक ने बढ़ाया एफडी पर रिटर्न, कम समय में करें ज्यादा कमाई

सुरक्षित निवेश और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के शौकीनों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गज केनरा बैंक ने अपनी एफडी ब्याज दरों में बदलाव किया है। खास बात यह है कि बैंक ने कम और मध्यम अवधि वाली एफडी पर अब पहले से बेहतर रिटर्न देने का फैसला किया है। नई दरें प्रभावी हो चुकी हैं, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को विशेष लाभ मिलने वाला है।
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7 प्रतिशत का बंपर ब्याज

केनरा बैंक की नई दरों के अनुसार, सीनियर सिटीजंस को 'कॉलेबल' फिक्स्ड डिपॉजिट पर अधिकतम 7 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। वर्तमान में जहां ब्याज दरों में नरमी का दौर चल रहा है, वहां किसी सरकारी बैंक द्वारा 7 प्रतिशत का रिटर्न देना एक बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में की गई कटौती के बाद से बाजार में ब्याज दरों पर दबाव देखा जा रहा है, ऐसे में यह कदम जमाकर्ताओं के लिए राहत भरा है।


किन अवधियों पर मिल रहा है सबसे ज्यादा फायदा?

बैंक के संशोधित ढांचे के अनुसार, कुछ खास अवधि वाली एफडी पर लंबी अवधि के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिल रहा है।
  • 555 दिनों की एफडी: सामान्य ग्राहकों को इस पर 6.50 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 7.00 प्रतिशत है।
  • 444 दिनों की एफडी: इस स्कीम में सामान्य ग्राहकों को 6.45 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 6.95 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है।

बाकी अन्य अवधियों (1 साल से अधिक) की बात करें तो बैंक ने सामान्य ग्राहकों के लिए ब्याज दर 6.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.75 प्रतिशत पर सीमित कर दी है। इसका मतलब है कि अब पैसे को बहुत लंबी अवधि के लिए लॉक करने पर अतिरिक्त ब्याज का फायदा नहीं मिलेगा।


रेपो रेट में कटौती का असर



एफडी दरों में आई यह नरमी आरबीआई की मौद्रिक नीति में बदलाव का नतीजा है। पिछले एक साल में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। हालिया 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद अब रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है। जब भी रेपो रेट कम होता है, बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत कम हो जाती है, जिसके कारण वे अपनी जमा योजनाओं (जैसे एफडी) पर मिलने वाले ब्याज को भी धीरे-धीरे कम करने लगते हैं। यही वजह है कि लंबी अवधि वाली एफडी पर रिटर्न पिछले साल के मुकाबले काफी कम हो गया है।