कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने करोड़ों खाताधारकों को बड़ी राहत देते हुए धन निकासी के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब कर्मचारियों को अपनी जरूरतों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने या हफ्तों इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। संगठन ने एक विशेष 'ऑटो-मोड' सुविधा शुरू की है, जो एडवांस पीएफ क्लेम को बहुत कम समय में प्रोसेस करती है। यह सुविधा विशेष रूप से मेडिकल इमरजेंसी, शिक्षा, शादी और घर खरीदने जैसे कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई है। इससे उन लोगों को सबसे ज्यादा मदद मिलती है जिन्हें अचानक पैसों की सख्त जरूरत होती है।
निकासी की सीमा में वृद्धि
पहले के नियमों के अनुसार, ऑटो सेटलमेंट मोड के माध्यम से निकासी की सीमा कम थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹1 लाख कर दिया गया है। इससे पहले यह सीमा मात्र ₹50,000 थी। सीमा बढ़ने से खाताधारक अपनी बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियों को आसानी से पूरा कर सकते हैं। इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के मैन्युअल वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मानवीय देरी की संभावना खत्म हो जाती है।
तेज प्रोसेसिंग का लाभ
बीते समय में पीएफ क्लेम सेटल होने में 15 से 20 दिनों का समय लग जाता था। इस लंबी अवधि के पीछे मुख्य कारण दस्तावेजों की भौतिक जांच और केवाईसी का मिलान करना था। लेकिन अब कंप्यूटर आधारित ऑटोमैटिक सिस्टम पात्रता, केवाईसी स्थिति और बैंक विवरणों का सत्यापन खुद ही कर लेता है। यदि सभी जानकारी सही पाई जाती है, तो पैसा सीधे बैंक खाते में 3 से 4 दिनों के भीतर भेज दिया जाता है।
पात्रता और आवश्यक शर्तें
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कुछ बुनियादी शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है। खाताधारक का यूएएन सक्रिय होना चाहिए और उसका आधार कार्ड बैंक खाते और पीएफ खाते से लिंक होना चाहिए। इसके अलावा, सदस्य का बैंक विवरण और केवाईसी पूरी तरह अपडेट होनी चाहिए। यह सुविधा मुख्य रूप से बीमारी के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब इसका विस्तार शादी और शिक्षा जैसे उद्देश्यों के लिए भी कर दिया गया है।
ऑनलाइन आवेदन की सरल प्रक्रिया
पैसा निकालने के लिए सबसे पहले ईपीएफओ पोर्टल पर यूएएन और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करना होता है। इसके बाद 'ऑनलाइन सर्विसेज' में जाकर क्लेम सेक्शन को चुनना पड़ता है। बैंक खाते के सत्यापन के बाद 'प्रोसीड फॉर ऑनलाइन क्लेम' पर क्लिक करना होता है। नए पेज पर पीएफ एडवांस फॉर्म 31 का चयन करना होता है। यहाँ निकासी का कारण, वांछित राशि और अपना पता भरना आवश्यक है। अंत में चेक या पासबुक की स्कैन कॉपी अपलोड करके आधार आधारित ओटीपी के जरिए इसे सत्यापित किया जाता है। एक बार प्रक्रिया पूरी होने पर आवेदन नियोक्ता के पास जाता है और वहां से मंजूरी मिलते ही ऑटो मोड सक्रिय हो जाता है।