खुशखबरी: बढ़ सकती है पीएफ की सैलरी लिमिट, करोड़ों कर्मचारियों को होगा फायदा
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ रही है। अगर आपकी सैलरी 15,000 रुपये से ज़्यादा है और अब तक आप पीएफ (PF) के अनिवार्य दायरे से बाहर थे, तो जल्द ही आपको ईपीएफओ (EPFO) की सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकता है। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत वेतन सीमा (Wage Ceiling) को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
क्या है सरकार की नई योजना?
वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए (DA) मिलाकर 15,000 रुपये तक है, उनके लिए पीएफ में योगदान करना अनिवार्य है। लेकिन यह सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी और पिछले 11 वर्षों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सरकार इसे बढ़ाकर 25,000 से 30,000 रुपये के बीच करने की तैयारी में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को इस सीमा पर पुनर्विचार करने और चार महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
मध्यम वर्ग को कैसे होगा फायदा?
अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों नए कर्मचारी पीएफ के दायरे में आ जाएंगे। विशेष रूप से 15,000 से 30,000 रुपये के बीच कमाने वाले मध्यम वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा।
पीएफ का दायरा बढ़ने का मतलब है कि अब अधिक लोग रिटायरमेंट के लिए बचत कर पाएंगे। हालांकि इससे हाथ में आने वाली सैलरी (In-hand Salary) में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को ईपीएस (EPS) पेंशन और मुफ्त बीमा (EDLI) जैसी सुविधाओं का लाभ भी अनिवार्य रूप से मिलने लगेगा।
सीमा बढ़ाना क्यों ज़रूरी है?
2014 के बाद से महंगाई और न्यूनतम वेतन में काफी वृद्धि हुई है। कई राज्यों में तो अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन ही 15,000 रुपये से ऊपर निकल गया है। ऐसे में पुराने नियमों के कारण कम आय वाले लाखों कर्मचारी भी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह गए थे। मजदूर संगठन लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे थे ताकि बदलती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
सरकार का यह फैसला न केवल बचत को बढ़ावा देगा बल्कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को नौकरी बदलने या रिटायर होने के बाद एक मजबूत वित्तीय आधार भी प्रदान करेगा।
क्या है सरकार की नई योजना?
वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए (DA) मिलाकर 15,000 रुपये तक है, उनके लिए पीएफ में योगदान करना अनिवार्य है। लेकिन यह सीमा सितंबर 2014 में तय की गई थी और पिछले 11 वर्षों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सरकार इसे बढ़ाकर 25,000 से 30,000 रुपये के बीच करने की तैयारी में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को इस सीमा पर पुनर्विचार करने और चार महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।मध्यम वर्ग को कैसे होगा फायदा?
अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों नए कर्मचारी पीएफ के दायरे में आ जाएंगे। विशेष रूप से 15,000 से 30,000 रुपये के बीच कमाने वाले मध्यम वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा।पीएफ का दायरा बढ़ने का मतलब है कि अब अधिक लोग रिटायरमेंट के लिए बचत कर पाएंगे। हालांकि इससे हाथ में आने वाली सैलरी (In-hand Salary) में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार होगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को ईपीएस (EPS) पेंशन और मुफ्त बीमा (EDLI) जैसी सुविधाओं का लाभ भी अनिवार्य रूप से मिलने लगेगा।
सीमा बढ़ाना क्यों ज़रूरी है?
2014 के बाद से महंगाई और न्यूनतम वेतन में काफी वृद्धि हुई है। कई राज्यों में तो अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन ही 15,000 रुपये से ऊपर निकल गया है। ऐसे में पुराने नियमों के कारण कम आय वाले लाखों कर्मचारी भी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह गए थे। मजदूर संगठन लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे थे ताकि बदलती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। सरकार का यह फैसला न केवल बचत को बढ़ावा देगा बल्कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को नौकरी बदलने या रिटायर होने के बाद एक मजबूत वित्तीय आधार भी प्रदान करेगा।









