EPFO Pension Update 2026: 30,000 रुपये हुई सैलरी लिमिट तो कितनी मिलेगी न्यूनतम पेंशन?
निजी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ ( EPFO ) से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। लंबे समय से चली आ रही 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट को बढ़ाने की चर्चा अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले चार महीनों के भीतर इस सीमा को संशोधित करने पर फैसला ले।
अगर यह सीमा बढ़कर 30,000 रुपये होती है, तो आपकी मासिक पेंशन पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि यह बदलाव आपके रिटायरमेंट को कैसे बदल सकता है।
पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × सेवा के वर्ष) ÷ 70
मध्यम आय वर्ग: जिनकी सैलरी 15,000 से 30,000 के बीच है और वे अब तक अनिवार्य पेंशन दायरे से बाहर थे, वे अब सामाजिक सुरक्षा के घेरे में आ जाएंगे।
रिटायरमेंट सुरक्षा: यह बदलाव उन लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो केवल ईपीएस पेंशन के भरोसे अपनी बुढ़ापे की लाठी देख रहे हैं।
अगर यह सीमा बढ़कर 30,000 रुपये होती है, तो आपकी मासिक पेंशन पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि यह बदलाव आपके रिटायरमेंट को कैसे बदल सकता है।
वर्तमान में पेंशन कम होने का मुख्य कारण
आज के समय में ईपीएफओ ने वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये तय की हुई है। इसका मतलब यह है कि भले ही आपकी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये हो, लेकिन पीएफ और पेंशन की गणना केवल 15,000 रुपये पर ही की जाती है। आपके नियोक्ता (Employer) के योगदान का एक हिस्सा (8.33%) कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है, जो वर्तमान में अधिकतम 1,250 रुपये प्रति माह तक सीमित है। यही कारण है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की राशि काफी कम रह जाती है।सुप्रीम कोर्ट की दखल और 30,000 की नई सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि 2014 के बाद से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि महंगाई और न्यूनतम वेतन काफी बढ़ चुके हैं। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इस लिमिट को कम से कम 30,000 रुपये किया जाए। यदि सरकार इस पर मुहर लगा देती है, तो पेंशन फंड में जमा होने वाली राशि दोगुनी हो जाएगी।नई सीमा पर कितनी मिलेगी न्यूनतम पेंशन?
ईपीएफओ पेंशन की गणना के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल करता है:पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × सेवा के वर्ष) ÷ 70
- 15,000 रुपये की सीमा पर: यदि आपने 35 साल तक योगदान दिया है, तो आपकी अधिकतम पेंशन लगभग 7,500 रुपये होती है। वहीं वर्तमान में न्यूनतम पेंशन केवल 1,000 रुपये तय है।
- 30,000 रुपये की सीमा पर: यदि वेतन सीमा को दोगुना कर दिया जाता है, तो पेंशन योग्य वेतन भी 30,000 रुपये माना जाएगा। इसी फॉर्मूले के हिसाब से आपकी अधिकतम पेंशन 15,000 रुपये तक जा सकती है। साथ ही, अनुपातिक गणना के आधार पर न्यूनतम पेंशन में भी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो बढ़कर लगभग 4,285 रुपये तक हो सकती है।
इस बदलाव से किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
नए कर्मचारी: वे कर्मचारी जो अभी करियर की शुरुआत कर रहे हैं, उनके पेंशन फंड में शुरू से ही ज्यादा पैसा जमा होगा।मध्यम आय वर्ग: जिनकी सैलरी 15,000 से 30,000 के बीच है और वे अब तक अनिवार्य पेंशन दायरे से बाहर थे, वे अब सामाजिक सुरक्षा के घेरे में आ जाएंगे।
रिटायरमेंट सुरक्षा: यह बदलाव उन लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो केवल ईपीएस पेंशन के भरोसे अपनी बुढ़ापे की लाठी देख रहे हैं।
आगे क्या होने वाला है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ को चार महीने के भीतर इस पर अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। हालांकि, इस फैसले से कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करेगा।Next Story