एक साल में गोल्ड पर कितना खर्च करता है भारत? मोतीलाल ओसवाल ने दी जानकारी, इस देश से खरीदते हैं सबसे ज्यादा सोना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील ने बाजार में हलचल मचा दी है। सोने के व्यापार से जुड़े व्यापारी और कारीगर कम व्यापार की चिंता में है तो वही विश्लेषक विश्लेषण कर रहे हैं कि यदि एक साल तक भारत की जनता सोना नहीं खरीदे तो इसका क्या असर होगा। ऐसे ही ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने भी बताया है कि पीएम मोदी की इस अपील का क्या असर हो सकता है। भारत 1 साल में सोने के आयात पर कितना खर्च करता है?

1 साल में सोने पर कितना खर्च करता है भारत भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा सोने की खरीदारी करते हैं। शादी ब्याह, तीज त्यौहार जैसे कई मौके पर सोना चांदी खरीदने की परंपरा चली आ रही है। हर साल देश में 700 से लेकर 800 टन सोने की खपत होती है। हैरानी की बात यह है कि देश में गोल्ड प्रोडक्शन केवल एक से दो टन तक ही हो पाता है। इसका मतलब यह है कि अपनी जरूरत का लगभग 90% गोल्ड भारत दूसरे देशों से मंगवाता है। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार हर साल सोने पर भारत $72,000,000 खर्च करता है।
आयात पर निर्भरता से विदेशी रिजर्व पर संकटभारत की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि भारत में सोने का उत्पादन उतना नहीं होता है जितनी खपत होती है। हालांकि आयत के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी महीने में यह 100 टन थे जो फरवरी महीने में 65 से 66 टन के बीच आ गए। इसके बाद मार्च और अप्रैल में भी आयात की मात्रा कम हुई है।
आपकी सोच से भी बड़ा होगा असर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड के अनुसार, पीएम मोदी की 1 साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील का असर आपकी सोच से भी बड़ा हो सकता है। हमारे आयात बिल में सोने का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। यदि सोने की मांग बढ़ेगी तो हमें ज्यादा डॉलर की आवश्यकता होगी। डॉलर मजबूत होता है तो रुपया कमजोर होता है। यदि ज्यादा डॉलर खर्च किए गए तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार डॉलर के आउटफ्लो को कम करके रुपये की गिरावट को सपोर्ट देना चाहती है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सके।
किस देश से सबसे ज्यादा सोना खरीदता है भारत? स्विट्जरलैंड : लगभग 40 प्रतिशत,
संयुक्त अरब अमीरात: लगभग 16 प्रतिशत,
साउथ अफ्रीका : लगभग 10 प्रतिशत,
पेरू: लगभग 8 प्रतिशत,
भारत सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड से सोना खरीदता है। इसके अलावा हांगकांग और अन्य देशों से लगभग 26 प्रतिशत सोना आयात किया जाता है। आम जनता 1 साल तक सोने की खरीदारी नहीं करती है तो गोल्ड आयात बिल कम हो सकता है। पहले ही मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। जिसके कारण भारत पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
1 साल में सोने पर कितना खर्च करता है भारत भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा सोने की खरीदारी करते हैं। शादी ब्याह, तीज त्यौहार जैसे कई मौके पर सोना चांदी खरीदने की परंपरा चली आ रही है। हर साल देश में 700 से लेकर 800 टन सोने की खपत होती है। हैरानी की बात यह है कि देश में गोल्ड प्रोडक्शन केवल एक से दो टन तक ही हो पाता है। इसका मतलब यह है कि अपनी जरूरत का लगभग 90% गोल्ड भारत दूसरे देशों से मंगवाता है। मोतीलाल ओसवाल के अनुसार हर साल सोने पर भारत $72,000,000 खर्च करता है।
आयात पर निर्भरता से विदेशी रिजर्व पर संकटभारत की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि भारत में सोने का उत्पादन उतना नहीं होता है जितनी खपत होती है। हालांकि आयत के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी महीने में यह 100 टन थे जो फरवरी महीने में 65 से 66 टन के बीच आ गए। इसके बाद मार्च और अप्रैल में भी आयात की मात्रा कम हुई है।
आपकी सोच से भी बड़ा होगा असर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस लिमिटेड के अनुसार, पीएम मोदी की 1 साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील का असर आपकी सोच से भी बड़ा हो सकता है। हमारे आयात बिल में सोने का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। यदि सोने की मांग बढ़ेगी तो हमें ज्यादा डॉलर की आवश्यकता होगी। डॉलर मजबूत होता है तो रुपया कमजोर होता है। यदि ज्यादा डॉलर खर्च किए गए तो हमारे विदेशी मुद्रा भंडार कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार डॉलर के आउटफ्लो को कम करके रुपये की गिरावट को सपोर्ट देना चाहती है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया जा सके।
किस देश से सबसे ज्यादा सोना खरीदता है भारत? स्विट्जरलैंड : लगभग 40 प्रतिशत,
संयुक्त अरब अमीरात: लगभग 16 प्रतिशत,
साउथ अफ्रीका : लगभग 10 प्रतिशत,
पेरू: लगभग 8 प्रतिशत,
भारत सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड से सोना खरीदता है। इसके अलावा हांगकांग और अन्य देशों से लगभग 26 प्रतिशत सोना आयात किया जाता है। आम जनता 1 साल तक सोने की खरीदारी नहीं करती है तो गोल्ड आयात बिल कम हो सकता है। पहले ही मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। जिसके कारण भारत पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
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