Blinkit-Swiggy-Zepto से पिछड़ी Tata Digital की BigBasket, क्या नए CEO बदल पाएंगे कंपनी की किस्मत?

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Tata Group की ऑनलाइन ग्रॉसरी कंपनी BigBasket के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कंपनी ने प्रॉफिट की राह पर लौटने के लिए अपनी ऑपरेशनल मौजूदगू को लगभग आधा करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि BigBasket अब देश के करीब 40 ऐसे शहरों पर फोकस करेगा, जहां उसका बिजनेस पहले से ऑपरेटिंग प्रॉफिट में है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर Tata Digital की स्ट्रैटेजी पर दिखेगा। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि क्या यह कदम कंपनी के बढ़ते घाटे को कम कर पाएगा। साथ ही, टाटा ग्रुप का डिजिटल बिजनेस कितना मजबूत होगा।
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नए CEO पर घाटा कम करने की जिम्मेदारी
हाल ही में BigBasket की कमान अमित नंदा (Amit Nanda) को सौंपी गई। वह इससे पहले लंबे समय तक Amazon India में काम कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार उन्हें साफ तौर पर कंपनी को मुनाफे में लाने की जिम्मेदारी दी गई। पिछले कुछ सालों में क्विक कॉमर्स सेक्टर में कॉम्पटीशन काफी बढ़ा है। इस सेक्टर में Blinkit , Zepto , Swiggy Instamart और Amazon की मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में BigBasket पर मार्जिन बचाने और घाटा कम करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

पहले BigBasket 76 शहरों में मौजूद था। लेकिन, अब कंपनी कई शहरों से बाहर निकलने की तैयारी कर रही है। कंपनी उन शहरों से बाहर निकलेगी जहां कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रहा है। सूत्रों के अनुसार कंपनी बड़े शहरों में ज्यादा निवेश करेगी। इसकी वजह साफ है कि बड़े शहरों में आबादी ज्यादा है, ऑनलाइन ऑर्डर ज्यादा आते हैं और क्विक कॉमर्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है।

कंपनी की स्ट्रैटेजी अब "क्लस्टर मॉडल" पर होगी। इसका मतलब है कि जिन शहरों में पहले से मजबूक कस्टमर बेस्ड हैं, वहीं ज्यादा डार्क स्टोर और बेहतर डिलीवरी नेटवर्क तैयार होगा। इससे लागत घटेगी और हर ऑर्डर पर कमाई बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Tata Digital क्यों बदल रहा स्ट्रैटेजी?
सूत्रों के अनुसार, BigBasket अब संस्थापकों के नेतृत्व वाले मॉडल से निकलकर पूरी तरह प्रोफेशनल मैनेजमेंट मॉडल की और बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा भी कंपनी के लगातार बढ़ते घाटा और ज्यादा कैश बर्न को लेकर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में अह कंपनी के भीतर फैसले तेजी से लेने, जवाबदेही बढ़ाने और खर्च पर सख्त कंट्रोव रखने पर जोर दिया जा रहा है।

नए CEO अमित नंदा का फोकस तीन चीजों पर रहेगा:

  • कस्टमर एक्सपीरियंस बेहतर बनाना
  • सही प्राइसिंग
  • प्रोडक्ट की अवेलेबिलिटी
BigBasket कैसे पीछे छूटा?
एक समय ऑनलाइन ग्रॉसरी मार्केट में BigBasket सबसे बड़ा नाम था। लेकिन, क्विक कॉमर्स मॉडल आने के बाद कंपनी पीछे रह गई। मार्च तिमाही के अंत तक में जहां Blinkit के पास 2,243 डार्क स्टोर थे। वहीं, Swiggy Instamart के पास 1,143 और Zepto के पास 1,139 डार्क स्टोर्स थे। दूसरी तरफ BigBasket के पास करीब 800 डार्क स्टोर्स हैं। इसका मतलब है कि नेटवर्क के मामले में कंपनी अपने कॉम्पटीटर से काफी पीछे है।

अब Amazon भी Amazon Now प्लेटफॉर्म के जरिये क्विक कॉमर्स में तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी का टारगेट 300 शहरों तक पहुंचना है। वहीं, Flipkart Minutes भी हर महीने करीब 100 नए डार्क स्टोर जोड़ रही है।

पूर्व CEO ने मानी अपनी गलती
BigBasket के सह-संस्थापक और पूर्व CEO हरि मेनन ने कंपनी छोड़ दी। उन्होंने LinkedIn पोस्ट में लिखा कि शुरुआत में उन्हें भरोसा नहीं था कि कस्टमर 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी जैसी सर्विस को इतनी तेजी से अपनाएंगे। उन्होंने माना कि कस्टमर की पसंद उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बदली है। इसी वजह से क्विक कॉमर्स मार्केट तेजी से बढ़ गया।