बैंक फ्रॉड मामलों पर CBI हुआ सख्त, जांच में देरी को लेकर बैंकों पर उठाए सवाल, जानें डिटेल्स

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देश में बढ़ते बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ी चिंता जताई है. एजेंसी का कहना है कि कई मामलों में बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने और चार्जशीट दाखिल करने के लिए जरूरी मंजूरी समय पर नहीं मिलती है. इससे जांच और कानूनी कार्रवाई दोनों प्रभावित हो रही हैं. इस मुद्दे पर CBI, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS), विभिन्न बैंकों और उनके मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVO) के बीच अहम बैठक हुई, जिसमें लंबित मामलों और जांच प्रक्रिया को तेज करने पर चर्चा की गई है.
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बैंक फ्रॉड मामलों की जांच पर CBI
CBI के अनुसार, कई मामलों में बैंकों की ओर से अपने अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी जाती है. इसके कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला कमजोर पड़ जाता है. ऐसी स्थिति में केस विशेष CBI अदालत की बजाय सामान्य अदालत में चला जाता है, जिससे सुनवाई और कार्रवाई में अधिक समय लग सकता है.


भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत CBI को धारा 17A के तहत किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी लेनी होती है. वहीं धारा 19 के तहत अदालत में अभियोजन शुरू करने से पहले भी मंजूरी आवश्यक होती है. CBI का कहना है कि इन मंजूरियों में देरी जांच की गति को प्रभावित कर रही है.