RBI कार्रवाई के बाद Paytm का बड़ा बयान, नहीं चाहिए NBFC लाइसेंस, CFO ने बताई यह बड़ी वजह

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फिनटेक कंपनी One97 Communications ने साफ कर दिया है कि फिलहाल उसकी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC लाइसेंस लेने की कोई योजना नहीं है. आपको बता दें कि One97 Communications कंपनी पेटीएम ब्रांड का ही संचालन करती है. कंपनी की Q4 अर्निंग कॉल के दौरान पेटीएम के प्रेसिडेंट और ग्रुप CFO मधुर देवड़ा ने कहा कि कंपनी NBFC लाइसेंस लेने को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है.


पेटीएम के प्रेसिडेंट और ग्रुप CFO मधुर देवड़ा ने बताया है कि पेटीएम फिलहाल win-win partnership model पर काम करना पसंद करती है. इस मॉडल में पेटीएम डिस्ट्रीब्यूशन, टेक्नोलॉजी और कलेक्शन का काम संभालती है जबकि उसके बैंकिंग और लेंडिंग पार्टनर पूंजी, जोखिम और लोन से जुड़े उतार-चढ़ाव को मैनेज करते हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट्स मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी भी मजबूत हो रही है. ऐसे में कंपनी के लिए मौजूदा बिजनेस अवसर ही काफी बड़े हैं.
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Paytm Payments Bank का लाइसेंस रद्द
आपको बता दें कि पिछले महीने यानी अप्रैल में ही भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था. RBI ने कहा था कि बैंक ने लाइसेंस से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया और बैंक का संचालन जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ पाया गया है. केंद्रीय बैंक के अनुसार, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लगातार नियामकीय शर्तों का पालन करने में विफल रहा था.


One97 Communications ने अपने कंपनी फाइलिंग में बताया कि उसका पेटीएम पेमेंट्स बैंक (PPBL) में अब कोई वित्तीय एक्सपोजर नहीं है. कंपनी ने 31 मार्च 2024 तक अपने निवेश का पूरा इम्पेयरमेंट पहले ही कर लिया था.

मार्च 2026 तिमाही में पेटीएम का प्रदर्शन
पेटीएम ने मार्च 2026 तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं. कंपनी ने चौथी तिमाही में 183 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट दर्ज किया है. एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी को 545 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. वहीं रेवेन्यू में भी शानदार बढ़ोतरी देखी गई है. मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 18.4% बढ़कर 2,264 करोड़ रुपये पहुंच गया है. पिछले साल इसी तिमाही में यह 1,912 करोड़ रुपये था.


पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में पेटीएम ने 552 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि वित्त वर्ष 2025 में कंपनी को 663 करोड़ का घाटा हुआ था. वहीं, पूरे साल का ऑपरेशनल रेवेन्यू 22.2% बढ़कर 8,437 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 6,900 करोड़ रुपये था.