10 जुलाई से खुलेगा अमेरिकी वीजा और ग्रीन कार्ड का पोर्टल, जानें USCIS की नई गाइडलाइंस और फॉर्म रिजेक्ट होने से बचाने के तरीके
अगर आप अमेरिका जाकर काम करना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बड़ा अपडेट है। आपको बता दें कि 10 जुलाई से H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड के लिए नए आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने आवेदकों को इस बार खास सावधानी बरतने को कहा है। आवेदन करते समय एक छोटी सी गलती भी आपके सपने को तोड़ सकती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको फॉर्म भरते समय किन बातों का ध्यान रखना है और किन गलतियों से बचना है।

क्या होता है H-1B वीजा ?
H-1B वीजा अमेरिका का एक वर्क वीजा है, जो अस्थायी काम करने के लिए दिया जाता है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां दुनिया भर के उन पेशेवरों को अपने यहां नौकरी पर रखती हैं, जिनके पास बेहतर स्किल्स होती है। भारतीय इंजीनियरों और आईटी पेशेवरों के बीच इस वीजा की सबसे ज्यादा मांग रहती है।
किन लोगों को मिलता है इसका फायदा?
यह वीजा हर नौकरी के लिए नहीं मिलता। यह खास तौर से उन क्षेत्रों के लिए है जहां खास पढ़ाई और विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर और रिसर्च। इसके लिए आवेदक के पास संबंधित क्षेत्र में डिग्री होना और किसी अमेरिकी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिलना जरूरी है।
क्या होता है H-1B वीजा ?
H-1B वीजा अमेरिका का एक वर्क वीजा है, जो अस्थायी काम करने के लिए दिया जाता है। इसके तहत अमेरिकी कंपनियां दुनिया भर के उन पेशेवरों को अपने यहां नौकरी पर रखती हैं, जिनके पास बेहतर स्किल्स होती है। भारतीय इंजीनियरों और आईटी पेशेवरों के बीच इस वीजा की सबसे ज्यादा मांग रहती है।
किन लोगों को मिलता है इसका फायदा?
यह वीजा हर नौकरी के लिए नहीं मिलता। यह खास तौर से उन क्षेत्रों के लिए है जहां खास पढ़ाई और विशेषज्ञता की जरूरत होती है, जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, हेल्थकेयर और रिसर्च। इसके लिए आवेदक के पास संबंधित क्षेत्र में डिग्री होना और किसी अमेरिकी कंपनी से नौकरी का ऑफर मिलना जरूरी है।
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