क्या मंदिरों का सोना बेचने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम ला रही सरकार? वित्त मंत्रालय ने बताई सच्चाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना बेचने की अपील के बाद पिछले कुछ दिनों से एक और खबर काफी चर्चा में थी। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि सरकार अब Gold मोनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत करेगी। जिसके अंतर्गत मंदिरों और धार्मिक स्थलों का सोना बेचा जाएगा। इन दावों को वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। साथ ही लोगों को यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे दावों से बचना चाहिए।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की वित्त मंत्रालय ने बताई सच्चाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वित्त मंत्रालय के द्वारा एक पोस्ट के जरिए यह बताया गया कि मंदिरों के पास रखे गोल्ड रिजर्व के मोनेटाइजेशन को लेकर किए जा रहे भ्रामक दावे पर स्पष्टीकरण दिया जा रहा है। सरकार की तरफ से यह कहा गया कि सरकार किसी भी धार्मिक संस्थान मंदिरों या ट्रस्टों के पास स्थित सोने के मुद्रीकरण की योजना नहीं बना रही है। कुछ दावों में तो यह भी कहा जा रहा था कि सरकार मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने वाली है।
वित्त मंत्रालय की चेतावनी वित्त मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि ऐसी अफवाहों पर ना तो विश्वास करें और ना ही उन्हें फैलाएं। इसके साथ उन्होंने ऐसी जानकारी फैलाने वालों को चेतावनी दी है और कहा है कि इससे भ्रम की स्थिति बन सकती है, जनता गुमराह हो सकती है।
पीएम मोदी की जनता से अपील पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हो चुका है। इस समय भारत के लिए आयात महंगा होते जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर डबल नाकाबंदी के कारण सप्लाई भी बाधित है। इन सभी के कारण रुपये की वैल्यू गिरती जा रही है और डॉलर मजबूत हो रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर कम खर्च हो, आयात बिल कम हो इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपील की है कि लगभग 1 साल तक सोना नहीं खरीदा जाए और विदेश से आने वाले सामान जैसे ईंधन और अन्य चीजों का इस्तेमाल भी जितना हो सके कम करें।
सोना-चांदी का इंपोर्ट शुल्क और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस जंग का असर भारत में आम जनता पर दिखना शुरू हो चुका है। भारत में एक सप्ताह से भी कम अवधि के दौरान दो बार पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ाई जा चुकी है। सोना-चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाले शुल्क को बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। सिल्वर बार को रिस्ट्रिक्टेड श्रेणी में रखा गया है। इसलिए किया जा रहा है ताकि रुपये पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके विदेशी मुद्रा की बचत हो और देश पर बढ़ते वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। इस स्थिति में किसी भी अफवाह से जनत के बीच चिंता बढ़ सकती है। इसलिए भारत सरकार की तरफ से भी यह कहा जाता है कि हमेशा ऑफिशियल जानकारी पर ही विश्वास करें।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की वित्त मंत्रालय ने बताई सच्चाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वित्त मंत्रालय के द्वारा एक पोस्ट के जरिए यह बताया गया कि मंदिरों के पास रखे गोल्ड रिजर्व के मोनेटाइजेशन को लेकर किए जा रहे भ्रामक दावे पर स्पष्टीकरण दिया जा रहा है। सरकार की तरफ से यह कहा गया कि सरकार किसी भी धार्मिक संस्थान मंदिरों या ट्रस्टों के पास स्थित सोने के मुद्रीकरण की योजना नहीं बना रही है। कुछ दावों में तो यह भी कहा जा रहा था कि सरकार मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने वाली है।
वित्त मंत्रालय की चेतावनी वित्त मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि ऐसी अफवाहों पर ना तो विश्वास करें और ना ही उन्हें फैलाएं। इसके साथ उन्होंने ऐसी जानकारी फैलाने वालों को चेतावनी दी है और कहा है कि इससे भ्रम की स्थिति बन सकती है, जनता गुमराह हो सकती है।
पीएम मोदी की जनता से अपील पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हो चुका है। इस समय भारत के लिए आयात महंगा होते जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर डबल नाकाबंदी के कारण सप्लाई भी बाधित है। इन सभी के कारण रुपये की वैल्यू गिरती जा रही है और डॉलर मजबूत हो रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर कम खर्च हो, आयात बिल कम हो इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपील की है कि लगभग 1 साल तक सोना नहीं खरीदा जाए और विदेश से आने वाले सामान जैसे ईंधन और अन्य चीजों का इस्तेमाल भी जितना हो सके कम करें।
सोना-चांदी का इंपोर्ट शुल्क और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस जंग का असर भारत में आम जनता पर दिखना शुरू हो चुका है। भारत में एक सप्ताह से भी कम अवधि के दौरान दो बार पेट्रोल डीजल की कीमत बढ़ाई जा चुकी है। सोना-चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाले शुल्क को बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। सिल्वर बार को रिस्ट्रिक्टेड श्रेणी में रखा गया है। इसलिए किया जा रहा है ताकि रुपये पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके विदेशी मुद्रा की बचत हो और देश पर बढ़ते वित्तीय बोझ को कम किया जा सके। इस स्थिति में किसी भी अफवाह से जनत के बीच चिंता बढ़ सकती है। इसलिए भारत सरकार की तरफ से भी यह कहा जाता है कि हमेशा ऑफिशियल जानकारी पर ही विश्वास करें।
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