गीजर खराब हो जाए या पाइप फट जाए तो खर्च कौन देगा? किरायेदार और मकान मालिक दोनों के लिए कानून जानना जरूरी

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आप एक किराए के घर में रहते हैं और अचानक गीजर काम करना बंद कर दे या फिर बाथरूम की पाइप लूक हो जाए तो सबसे पहले सवाल उठता है कि क्या यह मरम्मत का खर्च कौन देगा? क्या ये खर्च किराएदार को देना होगा या फिर मकान मालिक को? भारत में किराए पर रहने वावे लाखों के बीच यह विवाद काफी आम है। कई बार मामला कुछ हजार रुपये की मरम्मत का होता है। लेकिन, नियम न पता होने के कारण विवाद बढ़ जाता है। बता दें कि इस तरह के विवाद को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 किया। आज भी कई मकान मालिक या फिर किराएदार इस एक्ट से अनजान है। नीचे मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कौन-देगा मरम्मत का खर्च?
ज्यादातर किरायेदार यह मान लेते हैं कि घर में होने वाली हर खराबी को ठीक करवाना मकान मालिक की जिम्मेदारी होती है। वहीं, दूसरी तरफ कई मकान-मालिक छोटी-मोटी मरम्मत का खर्च उठाने से डरते हैं। इन मामलों में मॉडल टेंनेंसी एक्ट काफी बैलेंस्ड है।

मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 के अनुसार घर को उसी स्थिति में बनाए रखने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होती है। जिस हालात में घर दिया जाता है उसमें कोई टूट-फूट होती है तो उसे अलग माना जाता है। इसका मतलब है कि ये जरूरी नहीं कि हर बार मकान मालिक ही खर्च उठाए। कई मामलों में किरायेदार की भी जिम्मेदारी बनती है। सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट रेंट एग्रीमेंट होता है। इसमें पहले से तय होना चाहिए कि कौन-सी मरम्मत कौन-करवाएगा।

मकान मालिक मरम्मत करने से मना कर दें
कई मामले में यह देखा गया है कि घर में कोई बड़ी परेशानी आ जाती है तो मकान मालिक उसे ठीक करवाने में देरी करता है। ऐसी स्थिति में किरायेदार के पास लीगल ऑप्शन है। अगर मरम्मत मकान-मालिक की जिम्मेदारी में आती है और वह इसे नहीं करवाता है तो किरायेदार खुद मरम्मत करवा सकता है।

इसके बाद उस खर्च को किराए से बांटा जा सकता है। हालांकि, इसके लिए एक सीमा तय की गई है। किसी भी महीने में किराए से काटी गई राशि टोटल मंथली रेंट के 50% से ज्यादा नहीं हो सकती। वहीं, अगर मरम्मत न होने के कारण घर रहने लायक नहीं है तो किरायेदार 15 दिन का नोटिस देकर मकान खाली कर सकता है।

किरायेदार की ये जिम्मेदारी
इस कानून में किरायेदार की भी जिम्मेदारी के बारे में बताया गया है। नियमों के अनुसार किरायेदार को भी घर की देखभाल करनी होती है। किरायेदार की जिम्मेदारी है कि वे घर को नुकसान पहुंचाने से बचाएं। वहीं, अगर किसी भी परेशानी की जानकारी समय रहते ही मकान मालिक को दे।

उदाहरण के तौर पर अगर पाइप में छोटी लीकेज दिख रही है और किरायेदार महीनों तक इसकी जानकारी नहीं देता जिससे बाद में बड़ा नुकसान हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय हो सकती है। वहीं, अगर किरायेदार अपनी जिम्मेदारी वाली मरम्मत नहीं करवाता है तो मकान मालिक उसे खुद ठीक करवाकर वो खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट से काट सकता है।

प्राकृतिक आपदा को लेकर ये है नियम
हर बार किसी नुकसान के लिए सिर्फ एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। कई बार बाढ़, भूकंप, आग या फिर चक्रवात जैसे प्राकृतिक आपदा से भी घर को नुकसान पहुंचता है। इस हालात में कानून इस नुकसान को फोर्स मेज्योर घटना मानती है।

अगर प्राकृतिक आपदा के कारण घर टूट जाए या रहने लायक न हो तो मकान मालिक उस अवधि का किराया नहीं मांग सकता। वहीं, अगर घर को दोबारा रहने लायक बनाना आसान नहीं है तो मकान मालिक किरायेदार को किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करेगा।