Gold Hallmarking Fee Hiked: ₹45 से ₹75 हो गई सोने की हॉलमार्किंग शुल्क, BIS ने चांदी के लिए नहीं बदले रेट

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सोने चांदी की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) सोने के गहनों पर लगने वाली हॉलमार्किंग शुल्क को बढ़ा दिया है। गोल्ड के गहनों पर पहले हॉलमार्किंग शुल्क के रूप में 45 रुपये लिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 75 और रुपये प्रति आइटम कर दिया गया है। आप यदि सोना चांदी खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको बता दें कि हॉलमार्किंग फीस सोने के गहनों के वजन के हिसाब से नहीं बल्कि प्रति आइटम के हिसाब से लगती है। इसके अलावा एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम फीस 200 रुपये रखी गई है।
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चांदी पर हॉलमार्किंग फीस भी बदली?BIS के अनुसार, 14 सितंबर 2026 से केवल गोल्ड के गहनों पर बढ़ी हॉलमार्किंग फीस लागू की गई है। चांदी पर हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ है यह पहले के जैसे अभी भी 35 रुपये प्रति आर्टिकल ही है।क्या सोना खरीदना महंगा हो गया?पिछले कुछ सालों की तुलना में देखें तो सोने की कीमतों में उछाल तो आया है और ऐसे में सरकार की तरफ से हॉल मार्किंग शुल्क बढ़ाना भी ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकता है। हालांकि ज्वेलर्स के ऊपर निर्भर करता है कि इस अतिरिक्त शुल्क को वह खुद वहन करते हैं या ग्राहकों की वसूली करते हैं।


हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?सरकार की तरफ से लोगों को जागरूक किया जाता है कि जब भी आप सोने चांदी के गहने खरीदने जाए तब यह सुनिश्चित करें कि उस पर BIS की हॉलमार्किंग हो। जिससे यह सुनिश्चित होता है कि गहने कितने शुद्ध हैं। उनकी शुद्धता के आधार पर यानी 24 कैरेट, 22 कैरेट, 18 कैरेट के लिए अलग-अलग नंबर अंकित किए जाते हैं। इससे गहने खरीदते समय ग्राहकों का विश्वास और बढ़ जाता है। वे इस बात के लिए सुनिश्चित हो जाते हैं कि वे असली सोना या चांदी खरीद रहे हैं। इसलिए अगली बार जब आप भी सोना या चांदी खरीदने जाते हैं तो बिना हॉलमार्क वाले गहने ना खरीदें।


गहनों की हॉलमार्किंग की प्रक्रिया क्या है ?
  • ज्वेलर्स को पहले BIS पंजीकरण करना होता है जो निशुल्क होता है।
  • रजिस्ट्रेशन सोने और चांदी दोनों के लिए अलग-अलग होता है।
  • रजिस्टर्ड ज्वेलर्स अपने सोने या चांदी के आर्टिकल्स असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर (AHC) को भेजते हैं।
  • AHC गहनों की शुद्धता और अन्य चीजों की जांच करता है, जिसके बाद जब गहने पास हो जाते हैं तब लेजर मार्किंग की जाती है।
  • सोने चांदी के आर्टिकल्स पर BIS का लोगो और शुद्धता के आधार पर नंबर लिखा जाता है।
  • हॉलमार्किंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आर्टिकल्स ज्वेलर्स को भेज दिए जाते हैं।
  • ज्वेलर हॉलमार्किंग शुल्क का भुगतान AHC को करते हैं। BIS भी इस शुल्क से शेयर लेता है।
  • आपको बता दें कि पहली बार 14 जून 2018 को हॉलमार्किंग का नियम लागू हुआ था।