डीजल बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार की नई पहल, ईंधन बचत ही ईंधन निर्माण, MSRTC ड्राइवरों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
देश के लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों और खर्च के दबाव के बीच महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम यानी MSRTC ने डीजल बचाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है. दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने “Fuel Saving is Fuel Creation” यानी “ईंधन बचत ही ईंधन निर्माण” नाम से नई पहल लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य राज्य परिवहन की बसों में डीजल की खपत कम करना और वित्तीय अनुशासन मजबूत करना है. इस बात की जानकारी महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और MSRTC के चेयरमैन प्रताप सरनाईक ने मंत्रालय में आयोजित वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के दौरान दी है. आइए जानते हैं डिटेल्स.

महाराष्ट्र परिवहन विभाग की डीजल बचाने की पहल
परिवहन विभाग के अनुसार, फिलहाल MSRTC को हर दिन औसतन 10.87 लाख लीटर डीजल की जरूरत पड़ती है. ऐसे में बढ़ते खर्च को नियंत्रित करना अब बेहद जरूरी हो गया है. प्रताप सरनाईक ने कहा कि अगर राज्य का हर डिपो रोजाना सिर्फ 5 लीटर डीजल भी बचाए, तो पूरे महाराष्ट्र में प्रतिदिन करीब 1,000 लीटर डीजल की बचत हो सकती है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इससे रोज करीब 1 लाख रुपये की बचत संभव है. साथ ही उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बचत ही बड़े वित्तीय अनुशासन की नींव बनती है.
सरकार जल्द ही सभी डिविजनल कंट्रोलर्स और डिपो मैनेजर्स को डिपो-वार डीजल बचत लक्ष्य तय करने के निर्देश जारी करेगी. हर डिपो को बसों की ईंधन खपत का नियमित विश्लेषण करना होगा और जहां जरूरत हो वहां सुधारात्मक कदम उठाने होंगे. MSRTC ने यह भी फैसला किया है कि जो ड्राइवर डीजल बचत में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें विशेष सम्मान और इंसेंटिव अलाउंस दिया जाएगा.
MSRTC के चेयरमैन ने कहा कि ST ड्राइवर केवल वाहन चालक नहीं बल्कि संगठन की आर्थिक मजबूती के निर्माता हैं. जिम्मेदार और कुशल ड्राइवर संस्था के लाखों रुपये बचा सकते हैं.
खराब माइलेज वाले ड्राइवरों को दी जाएगी ट्रेनिंग
जिन ड्राइवरों की बसों का KPL यानी किलोमीटर प्रति लीटर प्रदर्शन खराब पाया जाएगा, उन्हें काउंसलिंग और दोबारा ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रेनिंग में कई बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जैसे स्पीड कंट्रोल, सही गियर का उपयोग, इंजन को बेवजह चालू न रखना, बेहतर ब्रेकिंग तकनीक.
इसी के साथ साथ सरकार ने बसों की रोजाना तकनीकी जांच, समय पर मरम्मत और इंजन की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए हैं. गलत टायर प्रेशर, इंजन ट्यूनिंग में गड़बड़ी, ऑयल लीकेज और ब्रेक सिस्टम की खराबी जैसी समस्याएं भी ईंधन की बर्बादी बढ़ाती हैं. ऐसे में वर्कशॉप स्टाफ को ज्यादा जिम्मेदारी से काम करने को कहा गया है.
महाराष्ट्र परिवहन विभाग की डीजल बचाने की पहल
परिवहन विभाग के अनुसार, फिलहाल MSRTC को हर दिन औसतन 10.87 लाख लीटर डीजल की जरूरत पड़ती है. ऐसे में बढ़ते खर्च को नियंत्रित करना अब बेहद जरूरी हो गया है. प्रताप सरनाईक ने कहा कि अगर राज्य का हर डिपो रोजाना सिर्फ 5 लीटर डीजल भी बचाए, तो पूरे महाराष्ट्र में प्रतिदिन करीब 1,000 लीटर डीजल की बचत हो सकती है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इससे रोज करीब 1 लाख रुपये की बचत संभव है. साथ ही उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बचत ही बड़े वित्तीय अनुशासन की नींव बनती है.
सरकार जल्द ही सभी डिविजनल कंट्रोलर्स और डिपो मैनेजर्स को डिपो-वार डीजल बचत लक्ष्य तय करने के निर्देश जारी करेगी. हर डिपो को बसों की ईंधन खपत का नियमित विश्लेषण करना होगा और जहां जरूरत हो वहां सुधारात्मक कदम उठाने होंगे. MSRTC ने यह भी फैसला किया है कि जो ड्राइवर डीजल बचत में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें विशेष सम्मान और इंसेंटिव अलाउंस दिया जाएगा.
MSRTC के चेयरमैन ने कहा कि ST ड्राइवर केवल वाहन चालक नहीं बल्कि संगठन की आर्थिक मजबूती के निर्माता हैं. जिम्मेदार और कुशल ड्राइवर संस्था के लाखों रुपये बचा सकते हैं.
खराब माइलेज वाले ड्राइवरों को दी जाएगी ट्रेनिंग
जिन ड्राइवरों की बसों का KPL यानी किलोमीटर प्रति लीटर प्रदर्शन खराब पाया जाएगा, उन्हें काउंसलिंग और दोबारा ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रेनिंग में कई बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जैसे स्पीड कंट्रोल, सही गियर का उपयोग, इंजन को बेवजह चालू न रखना, बेहतर ब्रेकिंग तकनीक.
इसी के साथ साथ सरकार ने बसों की रोजाना तकनीकी जांच, समय पर मरम्मत और इंजन की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए हैं. गलत टायर प्रेशर, इंजन ट्यूनिंग में गड़बड़ी, ऑयल लीकेज और ब्रेक सिस्टम की खराबी जैसी समस्याएं भी ईंधन की बर्बादी बढ़ाती हैं. ऐसे में वर्कशॉप स्टाफ को ज्यादा जिम्मेदारी से काम करने को कहा गया है.
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