पीएम मोदी की गोल्ड नहीं खरीदने की अपील ने ज्वेलरी बाजार में मचाया हड़कंप, रोजगार और मुनाफे को लेकर बढ़ी चिंता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल हैदराबाद से देश की जनता से अपील की कि एक साल तक सोने की खरीदारी ना की जाए। उनकी इस अपील का ज्वेलरी मार्केट पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। कल्याण ज्वेलर्स, टाइटन जैसी कंपनियों के शेयर्स में भारी गिरावट के अलावा सोने का कारोबार करने वाले व्यापारियों और सुनारों की दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों की भी चिंता बढ़ गई है।

क्या कम हो जाएगी सोने की खरीदारी? भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। हमारे यहां केवल निवेश के लिए ही नहीं बल्कि तीज-त्योहारों के मौके पर भी सोना खरीदना परंपरा से जुड़ा है। कई ऐसे त्यौहार आते हैं जब सर्राफा बाजारों में भीड़ लग जाती है। शादी-ब्याह, सालगिरह, मुंडन जैसे अवसरों पर भी सोना खरीदने की परंपरा चली आ रही है। ऐसे में आम जनता सोने की खरीदारी एकदम से कम कर देती है तो इससे ज्वैलरी इंडस्ट्री भारी घाटे का सामना कर सकती है। कई लोगों की नौकरियां जा सकती है। सोने के व्यापार से जुड़े व्यापारियों का मुनाफा कम हो सकता है या वे घाटे में जा सकते हैं।
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पीएम मोदी की अपील के बाद चिंता में व्यापारीमिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल का इस मामले पर कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद कई व्यापारियों ने चिंता व्यक्त की है। इस समय शादियों का सीजन चल रहा है, जो सोने की खरीदारी के लिए पीक सीजन माना जाता है। ऐसे में पीएम मोदी की अपील के बाद खरीदारी में गिरावट आने की आशंका बढ़ रही है। पहले ही कीमत बढ़ने के कारण कई लोग सोने से दूरी बना चुके हैं। जो लोग पहले 22 कैरेट के गहने खरीदना पसंद करते थे और वे 18 और 9 कैरेट के गहने पसंद कर रहे हैं।

आभूषण उद्योग में रोजगार पर असरऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े का कहना है कि पीएम मोदी की अपील के बाद प्रत्यक्ष रूप से एक करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार पर असर देखने को मिल सकता है।

पीएम मोदी की अपील का कारणमिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण पीएम मोदी ने देश की जनता से आह्वान किया है कि विदेशी मुद्रा के खर्च को बचाने के लिए एक साल तक सोने की खरीदारी नहीं की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ईंधन खपत को कम करने की अपील भी की है। वर्क फ्रॉम होम पर लौटने कि सलाह के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को कहा है कि अनावश्यक विदेश यात्रा पर न जाए, विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग ना करें और आत्मनिर्भर भारत से जुड़े।

दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हो चुकी है। अमेरिका, जापान जैसे कई देशों ने तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी है लेकिन भारत अभी भी 2 साल पुरानी कीमतों पर पेट्रोल और डीजल बेच रहा है। जिसका सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है। जो रोजाना 1600-1700 करोड रुपए का नुकसान झेल रही हैं।

अब जब मिडल ईस्ट का तनाव खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा है, अनिश्चितताएं बढ़ती जा रही है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट कब आएगी यह अंदेशा नहीं लगाया जा रहा है तो ऐसे में भारत सरकार चाहती है कि विदेशी मुद्रा जितना कम खर्च हो सके उतना कम की जाए। क्योंकि पहले ही तेल और गैस के लिए सरकार भारी बड़ा खर्च कर रही है।