UPI पेमेंट पर MDR की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ सकती है आगे, इस दिन से लागू होने की संभावना, जानें अपडेट

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UPI पर MDR आने वाली 15 अक्टूबर से लागू होना है लेकिन त्योहारी सीजन में UPI से खरीदारी करने वाले कारोबारियों के लिए राहत की खबर सामने आई है. UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने की योजना को फिलहाल टाला जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर से लागू होने वाला यह नियम अब 1 जनवरी 2027 तक टलने की संभावना है. इस पर फैसला अगले कुछ दिनों में लिया जा सकता है.


UPI पर MDRमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में MDR लागू करने के समय को लेकर चर्चा हुई है. यह कमेटी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की देखरेख में काम करती है. बुधवार को हुई बैठक में MDR को लागू करने की तारीख समेत इससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर विचार किया गया है. दरअसल, कारोबारियों और व्यापारिक संगठनों ने त्योहारी सीजन में MDR लागू करने पर चिंता जताई थी. उनका कहना है कि इस दौरान बिक्री पहले से काफी बढ़ जाती है. ऐसे में UPI पेमेंट पर शुल्क लगने से कारोबारियों की लागत और बढ़ सकती है.
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2000 रुपये या उससे ज्यादा की UPI पेमेंट्स पर MDR UPI पर MDR की नई व्यवस्था के तहत, 2000 रुपये तक के UPI पेमेंट को MDR से बाहर रखने का फैसला पहले ही किया जा चुका है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर MDR लागू होने की तारीख आगे बढ़ती है, तब भी यह छूट बरकरार रहेगी यानी छोटे मूल्य के UPI पेमेंट करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा. MDR मुख्य रूप से 2000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा दुकानदारों वाले UPI लेनदेन पर लागू होना है.



NPCI की प्रस्तावित व्यवस्था में 2000 रुपये से ज्यादा के पात्र दुकानदारों वाले UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की बात कही गई है. इसी के विरोध में इस महीने की शुरुआत में थोक कारोबारियों और दुकानदारों ने नो UPI डे भी मनाया था. कारोबारियों की मांग है कि UPI पेमेंट पर शुल्क लगाने से पहले इसके असर को ठीक से समझा जाए, खासकर ऐसे समय में जब त्योहारी खरीदारी तेजी से बढ़ रही है.



इसके अलावा कमेटी छोटे कारोबारियों को MDR से राहत देने के विकल्प पर भी विचार कर रही है. इसके तहत सालाना 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों को शुल्क से बाहर रखा जा सकता है. फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था में 1 लाख रुपये तक के मासिक कारोबार वाले कारोबारियों को छूट देने की बात थी. अगर 40 लाख रुपये की सालाना सीमा तय होती है, तो बड़ी संख्या में छोटे दुकानदार और कारोबारी MDR के दायरे से बाहर रह सकते हैं.