पोर्ट और पावर से आगे बढ़ेगा अडानी ग्रुप, गौतम अडानी ने पेश किया अगले 10 साल का विजन

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देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप में शामिल अडानी ग्रुप अब सिर्फ नए बंदरगाह, एयरपोर्ट्स या रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स बनाने पर ही फोकस नहीं करेगा। ग्रुप के चेयरमैन गौतम गौतम अडानी ने बुधवार को 30वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में संकेत दिया कि कंपनी का नेक्स्ट डेवलपमेंट फेज अंदरूनी बदलावों और संगठन को ज्यादा मजबूत बनाने पर बेस्ड होगा। शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए उन्होंने तीन बड़े बदलावों की रूपरेखा पेश की, जिनमें संगठन को आसान बनाना, पार्टनर्स के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना और कर्मचारियों को इस परिवर्तन का केंद्र बनाना शामिल है। अडानी ने इसे अगले दशक के लिए ग्रुप का विजन और स्ट्रैटेजिक ब्लूप्रिंट बताया।
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अडानी ने कहा कि यह सिर्फ कारोबारी विस्तार की योजना नहीं है, बल्कि अगले दशक के लिए अडानी ग्रुप की वर्क स्टाइल और ऑर्गनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर को मजबूत करने का रोडमैप है। उन्होंने इसे भारत के सबसे बड़े कारोबारी ग्रुपों में से एक के लिए अगले दस सालों का रणनीतिक ब्लूप्रिंट बताया। गौतम अडानी ने कहा- 'मैं उन तीन बुनियादी कदमों के बारे में बात करना चाहता हूं, जिन्हें हम उस संगठन के निर्माण के लिए उठा रहे हैं, जो अगले दशक के लिए हमारे विजन को अमल में लाएगा।'

संगठन को आसान बनाकर फैसलों की रफ्तार बढ़ाएगा अडानी ग्रुप
गौतम अडानी ने अपने विजन के पहले स्तंभ के रूप में संगठन को ज्यादा आसाम और प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने माना कि जैसे-जैसे अडानी ग्रुप एनर्जी, एयरपोर्ट, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में विस्तार कर रहा है, वैसे-वैसे कंपनी के भीतर जटिलताएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में बड़े संगठन को संभालने के लिए कामकाज को आसान और तेज बनाना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से ग्रुप अपने हेडक्वार्टर्स में थ्री-टियर ऑर्गनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर लागू कर रहा है। इसका मकसद अनावश्यक प्रोसेसेज को कम करना, जिम्मेदारियां स्पष्ट करना और फैसलों को सीधे क्रियान्वयन से जोड़ना है। अडानी का मानना है कि अगले दौर की ग्रोथ के लिए भारी-भरकम कॉरपोरेट स्ट्रक्चर्स नहीं, बल्कि तेज निर्णय लेने वाली और चुस्त संस्थाओं की जरूरत होगी।

कॉन्ट्रैक्टर्स को सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर नहीं, पार्टनर माना जाएगा
गौतम अडानी की ओर से बताए गए दूसरे बड़े बदलाव का संबंध कॉन्ट्रैक्टर्स और सप्लायर्स के साथ रिश्तों से है। उन्होंने कहा कि अडानी ग्रुप अब कॉन्ट्रैक्टर्स को केवल प्रोजेक्ट पूरा करने वाले सहयोगी के रूप में नहीं देखेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में भागीदार के रूप में मानेगा। इसके तहत ग्रुप ऐसे लॉन्ग-टर्म और स्टेबल रिलेशनशिप्स विकसित करना चाहता है, जिनमें कॉन्ट्रैक्टर्स की ग्रोथ को भी सपोर्ट मिले। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके प्रॉफिट मार्जिन सिक्योर्ड रहें और उनके इंटरेस्ट ग्रुप के लॉन्ग-टर्म गोल्स के अनुरूप हों। अडानी के अनुसार, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स केवल कैपिटल के दम पर नहीं बनते, बल्कि हजारों इंजीनियरिंग कंपनियों, कंस्ट्रक्शन फर्म्स और सप्लायर्स की भागीदारी से साकार होते हैं।

कर्मचारियों की गरिमा को बनाया जाएगा सबसे बड़ी प्राथमिकता
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कर्मचारियों से जुड़ा है। गौतम अडानी ने खुद इसे ग्रुप की रणनीति का सबसे अहम स्तंभ बताया। उनका कहना है कि अडानी ग्रुप के बदलाव और ग्रोथ की पूरी प्रोसेस में कर्मचारियों की गरिमा और सम्मान को केंद्र में रखा जाएगा। वर्तमान में अडानी ग्रुप और उसके कॉन्ट्रैक्टर नेटवर्क में लगभग चार लाख लोग काम करते हैं। इनमें से करीब 85% कर्मचारी फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं, जो बंदरगाहों, एयरपोर्ट्स, पावर प्लांट्स, ट्रांसमिशन लाइनों, सोलर पार्कों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कार्यरत हैं। ऐसे में कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना ग्रुप की प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

कर्मचारियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
AGM के दौरान गौतम अडानी ने कहा कि ग्रुप यह सुनिश्चित करेगा कि हर कर्मचारी के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो। इसके लिए साफ-सुथरे रहने की व्यवस्था, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच, सुरक्षित कार्यस्थल और समय पर उचित वेतन उपलब्ध कराया जाएगा। अडानी के अनुसार, कर्मचारी केवल कंपनी की कार्यशक्ति नहीं हैं, बल्कि ग्रुप की सफलता की असली नींव हैं। इसलिए उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना भी कंपनी की जिम्मेदारी है।