खाने की चीजों पर Warning Label को लेकर सख्त हुआ SC, जानें क्या है FSSAI की नई तैयारी
बिस्किट, नमकीन जैसे पैकेज्ड सामान को खरीदते समय अक्सर ग्राहक उनका कीमत और स्वाद पर ध्यान देते हैं लेकिन अब आने वाले समय में पैकेट पर वार्निंग लेबल देखने को मिल सकता है. इस लेबर से ग्राहक को यह पता चल सकता है कि उस खाने में चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट कितना ज्यादा है. इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने अपने रुख में नरमी दिखाते हुए कहा कि वह शुरुआत से ही ज्यादा सख्त नियम अपनाने के लिए तैयार है.

FSSAI का नया प्रस्तावबता दें कि FSSAI ने पिछले महीने पैकेज्ड फूड पर लाल रंग के हेक्सागोन यानी छह कोनों वाले चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा था. इसके तहत अगर किसी प्रोडक्ट में तय सीमा से ज्यादा एडेड शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो चीजें हों, तो पैकेट पर चेतावनी दिखाई जानी थी. रेगुलेटर ने इसके लिए दो चरणों में नियम लागू करने का प्रस्ताव दिया था. दूसरे चरण में लेबलिंग के नियम और कड़े किए जाने थे.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के इस दो-चरण वाले तरीके पर सवाल उठाया है. कोर्ट में इस बात को लेकर चिंता जताई गई कि अगर सख्त चेतावनी बाद में लागू होगी, तो लोगों को जरूरी जानकारी मिलने में देरी हो सकती है. सुनवाई के दौरान FSSAI ने कहा कि वह शुरुआत से ही ज्यादा सख्त चेतावनी लेबल लागू करने पर विचार कर सकता है. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि किसी प्रोडक्ट में केवल एक ही चीज, जैसे ज्यादा नमक या ज्यादा चीनी, तय सीमा से ऊपर होने पर भी चेतावनी दी जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान, खास तौर पर बच्चों की सेहत को लेकर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए. अदालत ने इसे देश के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया.
कोर्ट ने सभी पक्षों को बाद में जारी होने वाले आदेश का अध्ययन करने और अपनी राय देने को कहा है. अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी. अब इस मामले में यह देखना अहम होगा कि FSSAI शुरुआत से ही सख्त चेतावनी लेबल लागू करता है या पहले प्रस्तावित दो चरणों वाली व्यवस्था को आगे बढ़ाता है.
FSSAI का नया प्रस्तावबता दें कि FSSAI ने पिछले महीने पैकेज्ड फूड पर लाल रंग के हेक्सागोन यानी छह कोनों वाले चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा था. इसके तहत अगर किसी प्रोडक्ट में तय सीमा से ज्यादा एडेड शुगर, नमक या सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो चीजें हों, तो पैकेट पर चेतावनी दिखाई जानी थी. रेगुलेटर ने इसके लिए दो चरणों में नियम लागू करने का प्रस्ताव दिया था. दूसरे चरण में लेबलिंग के नियम और कड़े किए जाने थे.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के इस दो-चरण वाले तरीके पर सवाल उठाया है. कोर्ट में इस बात को लेकर चिंता जताई गई कि अगर सख्त चेतावनी बाद में लागू होगी, तो लोगों को जरूरी जानकारी मिलने में देरी हो सकती है. सुनवाई के दौरान FSSAI ने कहा कि वह शुरुआत से ही ज्यादा सख्त चेतावनी लेबल लागू करने पर विचार कर सकता है. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि किसी प्रोडक्ट में केवल एक ही चीज, जैसे ज्यादा नमक या ज्यादा चीनी, तय सीमा से ऊपर होने पर भी चेतावनी दी जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान, खास तौर पर बच्चों की सेहत को लेकर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि लोगों, खासकर बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए. अदालत ने इसे देश के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया.
कोर्ट ने सभी पक्षों को बाद में जारी होने वाले आदेश का अध्ययन करने और अपनी राय देने को कहा है. अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी. अब इस मामले में यह देखना अहम होगा कि FSSAI शुरुआत से ही सख्त चेतावनी लेबल लागू करता है या पहले प्रस्तावित दो चरणों वाली व्यवस्था को आगे बढ़ाता है.
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