इंफोसिस AI से नहीं डरती, नंदन नीलेकणी ने कहा, इंफोसिस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिप्लेस नहीं कर सकता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस याने AI को लेकर दुनिया भर में यह बहस चल रही है कि क्या यह पारंपरिक आईटी सर्विस कंपनियों के बिजनेस मॉडल को कमजोर कर देगी. कोडिंग, टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कई काम अब AI टूल्स की मदद से तेजी से होने लगे हैं. ऐसे माहौल में कई निवेशकों को चिंता है कि भारतीय आईटी कंपनियों की ग्रोथ पर दबाव बढ़ सकता है. लेकिन Infosys के चेयरमैन नंदन नीलेकणी का मानना है कि AI उनकी जैसी कंपनियों को खत्म नहीं करेगी, बल्कि उनकी प्रासंगिकता और बढ़ाएगी. कंपनी की एजीएम में मंगलवार को उन्होंने कहा कि AI को अवसर के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि कंपनियों के सामने ऑपर्च्युनिटी गैप नहीं बल्कि एक्जीक्यूशन गैप है. यानी चुनौती AI बनाने की नहीं, बल्कि उसे बड़े स्तर पर लागू करने की है.

इस समय आईटी सेक्टर संकट के दौर में है और लार्जकैप आईटी कंपनियों के शेयर पिछले एक साल से गहरी गिरावट में है.
AI आईटी बिजनेस को कैसे प्रभावित कर रही है?AI का सबसे बड़ा असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोडिंग पर दिखाई दे रहा है. आज कई AI टूल्स मिनटों में वह काम कर सकते हैं, जिसमें पहले इंजीनियरों को घंटों या दिनों का समय लगता था. इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है और कंपनियां कम संसाधनों में ज्यादा काम कर पा रही हैं.
यही कारण है कि निवेशकों को डर है कि अगर कम लोगों से ज्यादा काम हो सकता है तो आईटी कंपनियों की पारंपरिक हेडकाउंट-आधारित ग्रोथ प्रभावित हो सकती है. हाल के महीनों में भारतीय आईटी शेयरों पर दबाव की एक वजह यही चिंता भी रही है.
Infosys को एआई से खतरा क्यों नहीं दिख रहा?नीलेकणी का तर्क है कि कोड लिखना आईटी सर्विस का केवल एक हिस्सा है. बड़े इंटरप्राइजेज को AI अपनाने के लिए अपने पुराने सिस्टम मॉडर्नाइज करने होंगे, डेटा को व्यवस्थित करना होगा, साइबर सिक्योरिटी मजबूत करनी होगी और AI को मौजूदा बिज़नेस प्रोसेस में जोड़ना होगा. यह काम केवल AI टूल्स नहीं कर सकते, इसके लिए कंसल्टेंट, इंजीनियर, सिस्टम इंटीग्रेशन एक्सपर्ट और आईटी सर्विस कंपनियों की जरूरत पड़ेगी.
नीलेकणी के अनुसार AI एक फोर्स मल्टीप्लायर है, जो कंपनियों की क्षमता बढ़ाएगा. इसी सोच के तहत Infosys आने वाले वर्षों में AI से जुड़ी पहल पर लगभग 1 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है.
आईटी सेक्टर में नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?Infosys का मानना है कि नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप जरूर बदलेगा. भविष्य में केवल कोडिंग जानना पर्याप्त नहीं होगा. कर्मचारियों को AI मॉडल्स के साथ काम करना, ऑर्केस्ट्रेशन, डेटा मैनेजमेंट और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन जैसी नई स्किल्स सीखनी होंगी.
इस समय आईटी सेक्टर संकट के दौर में है और लार्जकैप आईटी कंपनियों के शेयर पिछले एक साल से गहरी गिरावट में है.
AI आईटी बिजनेस को कैसे प्रभावित कर रही है?AI का सबसे बड़ा असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और कोडिंग पर दिखाई दे रहा है. आज कई AI टूल्स मिनटों में वह काम कर सकते हैं, जिसमें पहले इंजीनियरों को घंटों या दिनों का समय लगता था. इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है और कंपनियां कम संसाधनों में ज्यादा काम कर पा रही हैं.
यही कारण है कि निवेशकों को डर है कि अगर कम लोगों से ज्यादा काम हो सकता है तो आईटी कंपनियों की पारंपरिक हेडकाउंट-आधारित ग्रोथ प्रभावित हो सकती है. हाल के महीनों में भारतीय आईटी शेयरों पर दबाव की एक वजह यही चिंता भी रही है.
Infosys को एआई से खतरा क्यों नहीं दिख रहा?नीलेकणी का तर्क है कि कोड लिखना आईटी सर्विस का केवल एक हिस्सा है. बड़े इंटरप्राइजेज को AI अपनाने के लिए अपने पुराने सिस्टम मॉडर्नाइज करने होंगे, डेटा को व्यवस्थित करना होगा, साइबर सिक्योरिटी मजबूत करनी होगी और AI को मौजूदा बिज़नेस प्रोसेस में जोड़ना होगा. यह काम केवल AI टूल्स नहीं कर सकते, इसके लिए कंसल्टेंट, इंजीनियर, सिस्टम इंटीग्रेशन एक्सपर्ट और आईटी सर्विस कंपनियों की जरूरत पड़ेगी.
नीलेकणी के अनुसार AI एक फोर्स मल्टीप्लायर है, जो कंपनियों की क्षमता बढ़ाएगा. इसी सोच के तहत Infosys आने वाले वर्षों में AI से जुड़ी पहल पर लगभग 1 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है.
आईटी सेक्टर में नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा?Infosys का मानना है कि नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप जरूर बदलेगा. भविष्य में केवल कोडिंग जानना पर्याप्त नहीं होगा. कर्मचारियों को AI मॉडल्स के साथ काम करना, ऑर्केस्ट्रेशन, डेटा मैनेजमेंट और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन जैसी नई स्किल्स सीखनी होंगी.
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