ट्रेन में तेज आवाज में फोन चलाने पर कितना लगेगा जुर्माना, जानें नए नियम

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भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेन में यात्रा करने के लिए कई नियम बनाएं गए हैं. ऐसे में अगर यात्री अपनी यात्रा के दौरान इन नियमों का उल्लंघन करता है तो रेलवे द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है. अब दक्षिण रेलवे ने यात्रियों के लिए जरूरी निर्देश जारी किए हैं. दरअसल, अब ट्रेन और रेलवे स्टेशन पर स्पीकर के जरिए तेज आवाज में गाने या वीडियो चलाने और शोर मचाने जैसे मामलों में कार्रवाई की जा सकती है. रेलवे के निर्देशों में जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी जिक्र है. ऐसे में यात्रियों के लिए यह जानना जरूरी है कि नए नियम क्या हैं और उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना लग सकता है. आइए जानते हैं.
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ट्रेन में तेज आवाज करने पर लगेगा जुर्मानादक्षिण रेलवे के मुख्यालय की वाणिज्यिक शाखा ने 16 अक्टूबर को जारी पत्र में अपने मंडलों को निर्देश दिया है कि यात्रियों को इस बारे में जागरूक किया जाए. इसके लिए रेलवे स्टेशनों पर हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में घोषणाएं करने और सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया है. इन घोषणाओं में यात्रियों से अपील की जाएगी कि वह मोबाइल पर स्पीकर लगाकर गाने या वीडियो न चलाएं और ट्रेन या रेलवे परिसर में तेज आवाज में बातचीत करने से बचें. जरूरत पड़ने पर हेडफोन का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी जाएगी.



दक्षिण रेलवे के पत्र में रेलवे अधिनियम की धारा 145 का उल्लेख किया गया है. इसके तहत उपद्रव करने, अशोभनीय व्यवहार करने या गाली-गलौज और अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई की जा सकती है. पत्र के अनुसार, ऐसे मामलों में यात्री को ट्रेन या रेलवे परिसर से हटाया जा सकता है और 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, टिकट या पास से जुड़े नियमों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है.



रेलवे के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि अगर कोई यात्री रेलवे के अधिकृत कर्मचारी के मना करने के बाद भी उपद्रव जारी रखता है, तो उसे अधिक सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. पत्र में छह महीने तक की साधारण कैद, 5000 रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है. हालांकि, कार्रवाई मामले की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी.


रेलवे ने क्यों लिया यह फैसला?रेलवे का कहना है कि स्टेशनों और ट्रेनों में मोबाइल फोन के स्पीकर पर गाने, वीडियो और दूसरी सामग्री चलाने से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो रही है. मोबाइल इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण सार्वजनिक जगहों पर इस तरह की घटनाएं बढ़ने की चिंता भी जताई गई है.



रेलवे बोर्ड ने इससे पहले 23 जुलाई 2012 को भी यात्रियों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर निर्देश दिए थे. उस समय खासतौर पर एसी कोच में तेज आवाज में बातचीत करने, लंबे फोन कॉल करने और तेज या आपत्तिजनक रिंगटोन से दूसरे यात्रियों को होने वाली परेशानी पर ध्यान दिलाया गया था. यात्रियों से फोन को साइलेंट या वाइब्रेशन मोड पर रखने, आवाज धीमी रखने और बातचीत छोटी रखने की अपील की गई थी.