DA: महंगाई भत्ता क्या होता है और सरकार इसे किस आधार पर बढ़ाती है? समझें जरूरी बातें
बढ़ती महंगाई के बीच लोगों के रोजमर्रा के खर्च बढ़ते है. ऐसे में सैलरी में बढ़ोतरी होना जरूरी होता है. यहां पर महंगाई भत्ता यानी DA काम आता है. सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में मिलने वाला महंगाई भत्ता यानी DA काफी अहम होता है. यह भत्ता बढ़ती महंगाई के असर को कम करने में मदद करता है और कर्मचारियों की जेब को कुछ राहत देता है. केंद्र सरकार आमतौर पर साल में दो बार महंगाई भत्ते में बदलाव करती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि DA कितने तरह का होता है और इसकी गणना कैसे की जाती है? आइए समझते हैं.

महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है?महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी के आधार पर दिया जाता है. इसका उद्देश्य बढ़ती कीमतों के असर को कम करना है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले लोगों के लिए DA में आमतौर पर जनवरी और जुलाई से बदलाव लागू किया जाता है. इसकी घोषणा अक्सर मार्च और अक्टूबर के आसपास होती है, हालांकि तारीख तय नहीं होती हैं.
बता दें कि अप्रैल 2026 में केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. इसके बाद DA 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया था. यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू की गई. इसका लाभ रेलवे और रक्षा सेवाओं के पात्र कर्मचारियों को भी मिलता है.
दो तरह का महंगाई भत्तामहंगाई भत्ता मुख्य रूप से दो तरह का होता है. पहला औद्योगिक महंगाई भत्ता ( IDA ) और दूसरा परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA).
औद्योगिक महंगाई भत्ता (IDA)- यह मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए होता है. इसमें महंगाई के आंकड़ों के आधार पर आमतौर पर हर तीन महीने में बदलाव की समीक्षा की जाती है.
परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA)- यह न्यूनतम मजदूरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए लागू होता है. इसमें महंगाई के असर को देखते हुए बदलाव किया जाता है. हालांकि, इसे हर छह महीने में बदला जाना जरूरी नहीं है. इसका संशोधन संबंधित न्यूनतम मजदूरी नियमों और सरकारी फैसलों पर निर्भर करता है.
DA की गणना कैसे होती है ?DA में बढ़ोतरी तय करने के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI-IW के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. यह सूचकांक बताता है कि समय के साथ रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतों में कितना बदलाव हुआ है. सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के DA की गणना में पिछले 12 महीनों के औसत सूचकांक को आधार बनाया जाता है. इसके लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्मूला कुछ इस तरह से है-
DA प्रतिशत = [(पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW − 261.42) ÷ 261.42] × 100
यहां 261.42 एक तय आधार संख्या है, जिसका इस्तेमाल संबंधित गणना में किया जाता है. सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अलग आधार और अवधि लागू हो सकती है.
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फायदा केंद्र और राज्य सरकारों के पात्र कर्मचारियों को मिल सकता है. पेंशन पाने वाले लोगों को भी संबंधित नियमों के अनुसार महंगाई राहत यानी DR दी जाती है. वहीं हर कर्मचारी की सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी एक जैसी नहीं होती. इसका कारण यह है कि DA की गणना बेसिक सैलरी पर होती है. ऐसे में जिस कर्मचारी की बेसिक सैलरी अधिक होगी, उसे समान प्रतिशत की बढ़ोतरी पर ज्यादा रुपये मिलेंगे.
महंगाई भत्ता (DA) क्या होता है?महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी के आधार पर दिया जाता है. इसका उद्देश्य बढ़ती कीमतों के असर को कम करना है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन पाने वाले लोगों के लिए DA में आमतौर पर जनवरी और जुलाई से बदलाव लागू किया जाता है. इसकी घोषणा अक्सर मार्च और अक्टूबर के आसपास होती है, हालांकि तारीख तय नहीं होती हैं.
बता दें कि अप्रैल 2026 में केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. इसके बाद DA 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया था. यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू की गई. इसका लाभ रेलवे और रक्षा सेवाओं के पात्र कर्मचारियों को भी मिलता है.
दो तरह का महंगाई भत्तामहंगाई भत्ता मुख्य रूप से दो तरह का होता है. पहला औद्योगिक महंगाई भत्ता ( IDA ) और दूसरा परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA).
औद्योगिक महंगाई भत्ता (IDA)- यह मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए होता है. इसमें महंगाई के आंकड़ों के आधार पर आमतौर पर हर तीन महीने में बदलाव की समीक्षा की जाती है.
परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA)- यह न्यूनतम मजदूरी पाने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए लागू होता है. इसमें महंगाई के असर को देखते हुए बदलाव किया जाता है. हालांकि, इसे हर छह महीने में बदला जाना जरूरी नहीं है. इसका संशोधन संबंधित न्यूनतम मजदूरी नियमों और सरकारी फैसलों पर निर्भर करता है.
DA की गणना कैसे होती है ?DA में बढ़ोतरी तय करने के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी AICPI-IW के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. यह सूचकांक बताता है कि समय के साथ रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं की कीमतों में कितना बदलाव हुआ है. सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के DA की गणना में पिछले 12 महीनों के औसत सूचकांक को आधार बनाया जाता है. इसके लिए इस्तेमाल होने वाला फॉर्मूला कुछ इस तरह से है-
DA प्रतिशत = [(पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW − 261.42) ÷ 261.42] × 100
यहां 261.42 एक तय आधार संख्या है, जिसका इस्तेमाल संबंधित गणना में किया जाता है. सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अलग आधार और अवधि लागू हो सकती है.
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फायदा केंद्र और राज्य सरकारों के पात्र कर्मचारियों को मिल सकता है. पेंशन पाने वाले लोगों को भी संबंधित नियमों के अनुसार महंगाई राहत यानी DR दी जाती है. वहीं हर कर्मचारी की सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी एक जैसी नहीं होती. इसका कारण यह है कि DA की गणना बेसिक सैलरी पर होती है. ऐसे में जिस कर्मचारी की बेसिक सैलरी अधिक होगी, उसे समान प्रतिशत की बढ़ोतरी पर ज्यादा रुपये मिलेंगे.
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