UPI MDR पर बोलें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा, चार्ज लगने से लेनदेन में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं
UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर 2026 से लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR इस समय लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. खासकर 2000 से ज्यादा के कुछ लेनदेन पर फीस लगने की बात पर कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट यूजर्स का काफी ध्यान है. इस बीच RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा है कि छोटी सी फीस लगने से UPI ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. बता दें कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों से लिया जाता है.

UPI MDR पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, अभी UPI लेनदेन की संख्या में किसी तरह की गिरावट देखने को नहीं मिली है. उनके अनुसार, अगर MDR के तौर पर छोटी फीस ली जाती है तो इससे UPI के कुल ट्रांजैक्शन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. आगे उन्होंने कहा कि फिलहाल RBI को UPI के लेनदेन में किसी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं. उनका मानना है कि छोटी फीस की वजह से लोग बड़े पैमाने पर UPI का इस्तेमाल बंद नहीं करेंगे.
बता दें कि पिछले महीने सरकार ने UPI के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की अनुमति दी थी. इसके तहत 2000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लगाया जा सकता है. हालांकि, यह बदलाव सभी तरह के UPI पेमेंट पर लागू नहीं होगा.
बैंकिंग सेक्टर पर RBI गवर्नर RBI गवर्नर ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहने की उम्मीद है. इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिलेगा. उनका कहना है कि सिस्टम में मौजूद ज्यादा नकदी को लेकर RBI स्थिति पर नजर रख रहा है. हालांकि, आने वाले लंबे समय तक हाल के हफ्तों जैसी बहुत ज्यादा अतिरिक्त नकदी रहने की उम्मीद नहीं है.
संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI को इस बात की जानकारी है कि सिस्टम में ज्यादा नकदी रहने की स्थिति में कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है. हालांकि, केंद्रीय बैंक को फिलहाल ऐसी स्थिति बनने की उम्मीद नहीं है. इसके अलावा RBI गवर्नर ने FCNR(B) योजना का भी जिक्र किया है. इस योजना के तहत प्रवासी भारतीयों से बैंकों ने करीब 13.3 अरब डॉलर जमा जुटाए हैं. उन्होंने इसे देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत बताया है.
UPI MDR पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, अभी UPI लेनदेन की संख्या में किसी तरह की गिरावट देखने को नहीं मिली है. उनके अनुसार, अगर MDR के तौर पर छोटी फीस ली जाती है तो इससे UPI के कुल ट्रांजैक्शन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. आगे उन्होंने कहा कि फिलहाल RBI को UPI के लेनदेन में किसी गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे हैं. उनका मानना है कि छोटी फीस की वजह से लोग बड़े पैमाने पर UPI का इस्तेमाल बंद नहीं करेंगे.
बता दें कि पिछले महीने सरकार ने UPI के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की अनुमति दी थी. इसके तहत 2000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लगाया जा सकता है. हालांकि, यह बदलाव सभी तरह के UPI पेमेंट पर लागू नहीं होगा.
बैंकिंग सेक्टर पर RBI गवर्नर RBI गवर्नर ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर भी अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहने की उम्मीद है. इससे देश की आर्थिक गतिविधियों को भी सहारा मिलेगा. उनका कहना है कि सिस्टम में मौजूद ज्यादा नकदी को लेकर RBI स्थिति पर नजर रख रहा है. हालांकि, आने वाले लंबे समय तक हाल के हफ्तों जैसी बहुत ज्यादा अतिरिक्त नकदी रहने की उम्मीद नहीं है.
संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI को इस बात की जानकारी है कि सिस्टम में ज्यादा नकदी रहने की स्थिति में कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है. हालांकि, केंद्रीय बैंक को फिलहाल ऐसी स्थिति बनने की उम्मीद नहीं है. इसके अलावा RBI गवर्नर ने FCNR(B) योजना का भी जिक्र किया है. इस योजना के तहत प्रवासी भारतीयों से बैंकों ने करीब 13.3 अरब डॉलर जमा जुटाए हैं. उन्होंने इसे देश की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत बताया है.
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