भारत के कानूनों का पालन नहीं करने वाली टेक कंपनियों पर अब सख़्ती क्यों जरूरी?
विराग गुप्ता
इंस्टाग्राम में बच्चों के यौन शोषण के कंटेंट के पेड प्रमोशन मामले में भारत सरकार की नोटिस का मेटा ने गोलमोल जवाब दिया है. कंपनी के अनुसार पिछले 6 महीनों में भारत में 1.6 लाख संदिग्ध खातों को हटाया गया है. पिछले साल दुनिया भर में फेसबुक और इंस्टाग्राम में 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध खातों के साथ बच्चों से जुड़े 3.6 करोड़ कंटेंट हटाने का दावा भी किया गया है. 96 फीसदी मामलों में औपचारिक शिकायत के बगैर मेटा कम्पनी ने आंतरिक पहचान, रिपोर्टिंग सिस्टम और AI के माध्यम से कार्रवाई करने का दावा किया है. मेटा के अनुसार यौन-शोषण, नग्नता जैसे अपराधों के खिलाफ कम्पनी की जीरो टॉलरेंस की नीति है. लेकिन ये दावे अधूरे सच को दर्शाते हैं.

अमेरिका में भारी जुर्माना
मेटा कम्पनी अमेरिका में रजिस्टर्ड है. अमेरिका के 29 राज्यों ने संघीय अदालत में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर करके आरोप लगाया है कि कम्पनी ने माता-पिता की सहमति के बगैर बच्चों के डेटा को चुराकर चिल्ड्रेन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन किया है. अमेरिका में चार राज्यों कैलिफोर्नियां, कोलोराडो, केंटकी और न्यूजर्सी ने मेटा कम्पनी से 1.4 खरब डॉलर जुर्माना वसूलने की मांग की है.
यह रकम कानून के उल्लंघन के विभिन्न मामलों और इसकी वजह से प्रभावित होने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या पर आधारित है. यह रकम मेटा के 1.5 खरब डॉलर की मार्केट कैप के करीब है. 14 अन्य राज्यों के दावों पर सुनवाई और ट्रायल फरवरी में होगा. अटार्नी जनरल के अनुसार फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफार्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे युवाओं को इसकी लत लग सके. बच्चों के यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े मामलों में ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन यूनियन में भी मेटा और दूसरी टेक कम्पनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों के साथ जुर्माना वसूलने के मामले चल रहे हैं.
भारत में इंटरमीडिएरी नियमों का पालन नहीं
BBC की रिपोर्ट के अनुसार इंस्टाग्राम ने पैसे लेकर रिकमेंडेशन एल्गोरिदम के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को भारत में बढ़ावा दिया है. मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर के राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार सोशल मीडिया में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार पाँक्सो, आईटी और बीएनएस कानूनों के अनुसार गम्भीर अपराध है. केन्द्रीय न्याय मंत्रालय के अनुसार मामलों में दोषियों को सजा के लिए 774 फास्टट्रैक अदालतों का गठन हुआ है.
यूपी के एक जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी को विशेष अदालत ने फरवरी 2026 में पाक्सो कानून के तहत फांसी की सजा सुनाई थी. लेकिन फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम के 154 करोड़ ग्राहकों वाली मेटा कंपनी के खिलाफ सिर्फ कागजी कार्रवाई हो रही है. फरवरी 2026 में IT Intermediary नियमों में हुए बदलावों के अनुसार इंस्टाग्राम वाले मामले में 2 घंटे के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी बजाए मेटा कम्पनी को जवाब देने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी गई.
बच्चों की सुरक्षा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयेसुस और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने डिजिटल जगत में बच्चों को बचाने के लिए अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अगस्त 2013 के आदेश के अनुसार 13 से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मई 2017 में महिला एवं बाल विकास, गृह, कानून, आईटी, विदेश और दूरसंचार मंत्रालय की अंतर-मंत्रालय समिति का गठन हुआ था.
साल-2021 में ट्विटर (X) के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और दिल्ली पुलिस ने नोटिस जारी किया था. उस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत के नियमों का पालन नहीं करने वाली टेक कंपनियों की सेफ हार्बर की सुरक्षा खत्म करने की बात कही थी. ऐसा ही बयान अक्टूबर 2023 में तत्कालीन आईटी मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने संसद में दिया था. नीट पेपर लीक मामले में युवाओं के कैरियर को बचाने के लिए टेलीग्राम पर प्रतिबन्ध लगा था. अब डिजिटल दानवों से मासूम बच्चों को बचाने के लिए इंस्टाग्राम और टेलीग्राम समेत सभी टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए.
इंस्टाग्राम में बच्चों के यौन शोषण के कंटेंट के पेड प्रमोशन मामले में भारत सरकार की नोटिस का मेटा ने गोलमोल जवाब दिया है. कंपनी के अनुसार पिछले 6 महीनों में भारत में 1.6 लाख संदिग्ध खातों को हटाया गया है. पिछले साल दुनिया भर में फेसबुक और इंस्टाग्राम में 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध खातों के साथ बच्चों से जुड़े 3.6 करोड़ कंटेंट हटाने का दावा भी किया गया है. 96 फीसदी मामलों में औपचारिक शिकायत के बगैर मेटा कम्पनी ने आंतरिक पहचान, रिपोर्टिंग सिस्टम और AI के माध्यम से कार्रवाई करने का दावा किया है. मेटा के अनुसार यौन-शोषण, नग्नता जैसे अपराधों के खिलाफ कम्पनी की जीरो टॉलरेंस की नीति है. लेकिन ये दावे अधूरे सच को दर्शाते हैं.
अमेरिका में भारी जुर्माना
मेटा कम्पनी अमेरिका में रजिस्टर्ड है. अमेरिका के 29 राज्यों ने संघीय अदालत में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर करके आरोप लगाया है कि कम्पनी ने माता-पिता की सहमति के बगैर बच्चों के डेटा को चुराकर चिल्ड्रेन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट का उल्लंघन किया है. अमेरिका में चार राज्यों कैलिफोर्नियां, कोलोराडो, केंटकी और न्यूजर्सी ने मेटा कम्पनी से 1.4 खरब डॉलर जुर्माना वसूलने की मांग की है.
यह रकम कानून के उल्लंघन के विभिन्न मामलों और इसकी वजह से प्रभावित होने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या पर आधारित है. यह रकम मेटा के 1.5 खरब डॉलर की मार्केट कैप के करीब है. 14 अन्य राज्यों के दावों पर सुनवाई और ट्रायल फरवरी में होगा. अटार्नी जनरल के अनुसार फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफार्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे युवाओं को इसकी लत लग सके. बच्चों के यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े मामलों में ऑस्ट्रेलिया और यूरोपियन यूनियन में भी मेटा और दूसरी टेक कम्पनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों के साथ जुर्माना वसूलने के मामले चल रहे हैं.
भारत में इंटरमीडिएरी नियमों का पालन नहीं
BBC की रिपोर्ट के अनुसार इंस्टाग्राम ने पैसे लेकर रिकमेंडेशन एल्गोरिदम के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को भारत में बढ़ावा दिया है. मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर के राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार सोशल मीडिया में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार पाँक्सो, आईटी और बीएनएस कानूनों के अनुसार गम्भीर अपराध है. केन्द्रीय न्याय मंत्रालय के अनुसार मामलों में दोषियों को सजा के लिए 774 फास्टट्रैक अदालतों का गठन हुआ है.
यूपी के एक जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी को विशेष अदालत ने फरवरी 2026 में पाक्सो कानून के तहत फांसी की सजा सुनाई थी. लेकिन फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम के 154 करोड़ ग्राहकों वाली मेटा कंपनी के खिलाफ सिर्फ कागजी कार्रवाई हो रही है. फरवरी 2026 में IT Intermediary नियमों में हुए बदलावों के अनुसार इंस्टाग्राम वाले मामले में 2 घंटे के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी बजाए मेटा कम्पनी को जवाब देने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी गई.
बच्चों की सुरक्षा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयेसुस और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने डिजिटल जगत में बच्चों को बचाने के लिए अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अगस्त 2013 के आदेश के अनुसार 13 से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मई 2017 में महिला एवं बाल विकास, गृह, कानून, आईटी, विदेश और दूरसंचार मंत्रालय की अंतर-मंत्रालय समिति का गठन हुआ था.
साल-2021 में ट्विटर (X) के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और दिल्ली पुलिस ने नोटिस जारी किया था. उस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत के नियमों का पालन नहीं करने वाली टेक कंपनियों की सेफ हार्बर की सुरक्षा खत्म करने की बात कही थी. ऐसा ही बयान अक्टूबर 2023 में तत्कालीन आईटी मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने संसद में दिया था. नीट पेपर लीक मामले में युवाओं के कैरियर को बचाने के लिए टेलीग्राम पर प्रतिबन्ध लगा था. अब डिजिटल दानवों से मासूम बच्चों को बचाने के लिए इंस्टाग्राम और टेलीग्राम समेत सभी टेक कंपनियों के खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए.
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