HSBC ने एक महीने से भी कम समय में दूसरी बार घटाई भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग, क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर, अब क्या करें निवेशक?
HSBC ने एक बार फिर रेटिंग घटाकर भारतीय शेयर बाजार और निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। इस बार ग्लोबल ब्रोकरेज ने रेटिंग को न्यूट्रल से कम करके अंडरवेट कर दिया है। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बार है जब HSBC ने रेटिंग कम की गई हो। इसके पहले 31 मार्च को रेटिंग ओवरवेट से घटाकर न्यूट्रल की थी। कंपनी का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बने हालातों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी है। आज क्रूड ऑयल 93 डॉलर प्रति बैरल के पार और ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई। जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ रहा है।

भारत अब कम आकर्षक?गुरुवार को HSBC की तरफ से जारी नोट में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के कारण भारत उत्तर पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में निवेश के लिए अब कम आकर्षक हो गया है। इस साल बेंचमार्क निफ्टी 50 और सेंसेक्स में आई गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो रहा है।
भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग घटाने का कारण HSBC रिसर्च एनालिस्ट्स का कहना है कि पहले के जैसे अब भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने रेटिंग को न्यूट्रल से कम करके अंडरवेट कर दी है। मार्च महीने में ही एचएसबीसी ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग को न्यूट्रल किया था। लेकिन बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के कारण देश के विकास की गति धीमी हो सकती है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट में शुरू हुए तनाव के बाद तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया है।
ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। भारत ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर करता है। जिसमें से लगभग 80% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। जिस पर अभी नाकाबंदी जारी है। भारत में तेल और गैस की सप्लाई सीमित हो चुकी है। यदि मिडिल ईस्ट की स्थिति सुधरती नहीं है तो आशंका जताई जा रही है कि अभी कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद सरकार तेल और गैस की कीमत बढ़ा सकती है। जिसके कारण भारत पर महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। कंपनियों के वैल्यूएशन पर भी दबाव बढ़ सकता है। एचएसबीसी ने भी बढ़ते भू राजनीतिक तनाव को बड़ा संकट बताया है।
कम होगा विदेशी निवेश? कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मजबूत होने के कारण और रुपये में बड़ी गिरावट आई, जिसके कारण विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर भी प्रभाव पड़ा है। पहले ही निवेशकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इंपैक्ट को लेकर चिंता थी और अब मिडिल ईस्ट में बढ़ रहा तनाव केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों की चिंता भी बढ़ा रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशक भी भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं।
कब ठीक होंगे हालात 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हुई थी। तब से लेकर अब तक तेल और गैस कि सप्लाई का संकट बढ़ते जा रहा है। दुनिया के कई देश इस जंग के जल्द ही समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बनते जा रहा है। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज्यादा का उछाल देखा गया, कमोडिटी मार्केट में काफी दबाव देखा गया और भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका प्रभाव देखा गया। यदि लंबे समय तक यह तनाव जारी रहेगा तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है।
भारत अब कम आकर्षक?गुरुवार को HSBC की तरफ से जारी नोट में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के कारण भारत उत्तर पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में निवेश के लिए अब कम आकर्षक हो गया है। इस साल बेंचमार्क निफ्टी 50 और सेंसेक्स में आई गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो रहा है।
भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग घटाने का कारण HSBC रिसर्च एनालिस्ट्स का कहना है कि पहले के जैसे अब भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा नहीं किया जा रहा है। इसलिए उन्होंने रेटिंग को न्यूट्रल से कम करके अंडरवेट कर दी है। मार्च महीने में ही एचएसबीसी ने भारतीय शेयर बाजार की रेटिंग को न्यूट्रल किया था। लेकिन बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के कारण देश के विकास की गति धीमी हो सकती है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट में शुरू हुए तनाव के बाद तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया है।
ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। भारत ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर करता है। जिसमें से लगभग 80% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। जिस पर अभी नाकाबंदी जारी है। भारत में तेल और गैस की सप्लाई सीमित हो चुकी है। यदि मिडिल ईस्ट की स्थिति सुधरती नहीं है तो आशंका जताई जा रही है कि अभी कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद सरकार तेल और गैस की कीमत बढ़ा सकती है। जिसके कारण भारत पर महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। कंपनियों के वैल्यूएशन पर भी दबाव बढ़ सकता है। एचएसबीसी ने भी बढ़ते भू राजनीतिक तनाव को बड़ा संकट बताया है।
कम होगा विदेशी निवेश? कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मजबूत होने के कारण और रुपये में बड़ी गिरावट आई, जिसके कारण विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर भी प्रभाव पड़ा है। पहले ही निवेशकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इंपैक्ट को लेकर चिंता थी और अब मिडिल ईस्ट में बढ़ रहा तनाव केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों की चिंता भी बढ़ा रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशक भी भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं।
कब ठीक होंगे हालात 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हुई थी। तब से लेकर अब तक तेल और गैस कि सप्लाई का संकट बढ़ते जा रहा है। दुनिया के कई देश इस जंग के जल्द ही समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बनते जा रहा है। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज्यादा का उछाल देखा गया, कमोडिटी मार्केट में काफी दबाव देखा गया और भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका प्रभाव देखा गया। यदि लंबे समय तक यह तनाव जारी रहेगा तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है।
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