अनिल अंबानी की मुश्किलें नहीं हो रहीं कम! SEBI ने सेटलमेंट आवेदन किया खारिज, जानिए पूरा मामला

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क्या उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं? देश के मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अनिल अंबानी और उनके कॉर्पोरेट ग्रुप की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें उन्होंने कंपनी के करीब 70 करोड़ डॉलर (लगभग 5,800 करोड़ रुपए) के कथित फंड दुरुपयोग से जुड़े मामले का सेटलमेंट करने की मांग की थी। रॉयटर्स की ओर से देखे गए डॉक्यूमेंट के मुताबिक, SEBI का मानना है कि यह मामला पब्लिक शेयरहोल्डर्स के हितों से जुड़ा है, इसलिए सेटलमेंट की मांग स्वीकार नहीं की गई। डॉक्यूमेंट के अनुसार, SEBI का आरोप है कि अनिल अंबानी और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने 65.26 बिलियन रुपए (करीब 6,526 करोड़ रुपए) को कथित तौर पर कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर अनिल अंबानी से जुड़ी संस्थाओं तक अनुचित तरीके से पहुंचाया। मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि इस तरह कंपनी के फंड का इस्तेमाल पब्लिक शेयरहोल्डर्स के हितों के बजाय निजी लाभ के लिए किया गया हो सकता है।
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पिछले करीब 18 महीनों से अनिल अंबानी और उनका ग्रुप लगातार SEBI और जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। इस दौरान ग्रुप के कई वरिष्ठ अधिकारियों को कथित धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है, जबकि अनिल अंबानी की कुछ संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं। हालांकि, ग्रुप के अधिकारियों ने सभी आरोपों से इनकार किया है और मामले अभी अदालत में विचाराधीन हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, सेबी ने सितंबर में भी इन लेनदेन को 'कंपनी के फंड का दुरुपयोग' करार दिया था। नियामक का मानना है कि यदि कंपनी के पैसों का इस्तेमाल पब्लिक शेयरहोल्डर्स के हितों के बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया है, तो यह सीरियस रेग्युलेटरी वायलेशन माना जाएगा।

अनिल अंबानी ग्रुप ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
अनिल अंबानी ग्रुप ने सेबी के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ग्रुप के प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उनका कहना है कि मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, इसलिए ग्रुप कानूनी सलाह के मुताबिक अदालत में अपना पक्ष रखेगा। वहीं, इस पूरे मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए रॉयटर्स के ईमेल का सेबी ने कोई जवाब नहीं दिया।

सेबी के फैसले की जानकारी पहली बार सामने आई
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी की ओर से अनिल अंबानी के सेटलमेंट आवेदन को खारिज करने और उन पर लगाए गए विस्तृत आरोपों की जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई थी। हालांकि, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने अक्टूबर में शेयर बाजार को दी गई सूचना में इतना जरूर बताया था कि सेबी ने कंपनी पर एक संबंधित फर्म को वित्तीय सहायता देने के मामले में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। लेकिन उस समय आरोपों का पूरा ब्योरा शेयर नहीं किया गया था।

सेटलमेंट आवेदन क्यों खारिज हुआ?
रॉयटर्स द्वारा देखे गए डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, सेबी ने सेटलमेंट आवेदन खारिज करने की एक बड़ी वजह यह भी बताई कि इसी मामले की जांच भारत की दूसरी जांच एजेंसियां भी कर रही हैं। इनमें वित्तीय अपराध और धोखाधड़ी की जांच करने वाली एजेंसियां शामिल हैं। यानी सेबी का मानना था कि जब समान मामले में दूसरी एजेंसियों की जांच जारी है, तब सेटलमेंट की अनुमति देना उचित नहीं होगा।

यह पहला मामला नहीं
अनिल अंबानी के लिए यह पहली बार नहीं है जब सेबी ने सेटलमेंट की मांग ठुकराई हो। इससे पहले भी यस बैंक में निवेश से जुड़े एक मामले में सेबी ने उनका सेटलमेंट आवेदन खारिज कर दिया था। यानी लगातार दूसरी बार सेबी ने उनके खिलाफ चल रहे मामले में समझौते की अनुमति देने से इनकार किया है।

सेबी की सेटलमेंट प्रोसेस क्या होती है?
सेबी के नियमों के मुताबिक, यदि किसी कंपनी या व्यक्ति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगता है तो वह बिना गलती स्वीकार किए एक तय राशि का पेमेंट कर मामले का सेटलमेंट करने का अनुरोध कर सकता है। लेकिन अगर सेबी इस अनुरोध को अस्वीकार कर देती है, तो वह बाद में एक विस्तृत आदेश जारी करती है, जिसमें कथित उल्लंघनों का पूरा विवरण होता है। इसके बाद जुर्माना, बाजार में कारोबार पर रोक जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, ऐसे आदेशों को अदालत में चुनौती देने का अधिकार संबंधित कंपनी या व्यक्ति के पास होता है।