नितिन गडकरी ने लॉन्च किया नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम MLFF, अब टोल प्लाजा पर नहीं लगेगी लंबी लाइन, ईधन की भी होगी बचत
केंद्र सरकार देश में टोल कलेक्शन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. इसी कड़ी में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई Multi Lane Free Flow (MLFF) बैरियर-लेस टोल प्रणाली की शुरुआत की है. सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी.

क्या है MLFF टोल सिस्टम ?
MLFF यानी मल्टी लेन फ्री फ्लो एक आधुनिक बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम है. इसमें वाहन बिना रुके सीधे टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. यह प्रणाली Automatic Number Plate Recognition (ANPR) और फास्टैग तकनीक की मदद से काम करेगी. कैमरे वाहन का नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और फास्टैग खाते से टोल राशि अपने आप कट जाएगी. इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है.
दिल्ली और गुजरात में शुरू हुई नई व्यवस्था
हाल ही में देश का पहला MLFF सिस्टम गुजरात के Chorayasi टोल प्लाजा में शुरू किया गया था. इसके बाद अब दिल्ली के Mundka–Bakkarwala टोल प्लाजा पर भी इस नई प्रणाली की शुरुआत की गई है. सरकार के अनुसार, फिलहाल 17 और टोल प्लाजा को MLFF सिस्टम में बदला जा रहा है. इसके अलावा दिल्ली-NCR, राजस्थान और गुजरात के 108 टोल प्लाजा के लिए टेंडर भी जारी किए गए हैं.
रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी के अनुसार, इस नई तकनीक से हर साल करीब 295 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी. इसके साथ ही लगभग 81 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है. नितिन गडकरी के अनुसार, यह प्रणाली लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी मजबूत करेगी क्योंकि माल ढुलाई में समय कम लगेगा और परिवहन ज्यादा तेज और आसान होगा. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में टोल कलेक्शन की ऑपरेशनल लागत भी घटकर 3-4 प्रतिशत तक आ जाएगी, जबकि फिलहाल यह 12-15 प्रतिशत के आसपास है.
इस नई व्यवस्था में वाहन चालकों को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना बेहद जरूरी होगा. अगर फास्टैग में पैसा नहीं होगा या वार्षिक पास सक्रिय नहीं होगा, तो वाहन मालिक को ई-नोटिस भेजा जाएगा. सरकार के अनुसार, ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी. ऐसा नहीं करने पर दोगुना टोल शुल्क देना पड़ सकता है.
क्या है MLFF टोल सिस्टम ?
MLFF यानी मल्टी लेन फ्री फ्लो एक आधुनिक बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम है. इसमें वाहन बिना रुके सीधे टोल प्लाजा से गुजर सकेंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. यह प्रणाली Automatic Number Plate Recognition (ANPR) और फास्टैग तकनीक की मदद से काम करेगी. कैमरे वाहन का नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और फास्टैग खाते से टोल राशि अपने आप कट जाएगी. इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है.
दिल्ली और गुजरात में शुरू हुई नई व्यवस्था
हाल ही में देश का पहला MLFF सिस्टम गुजरात के Chorayasi टोल प्लाजा में शुरू किया गया था. इसके बाद अब दिल्ली के Mundka–Bakkarwala टोल प्लाजा पर भी इस नई प्रणाली की शुरुआत की गई है. सरकार के अनुसार, फिलहाल 17 और टोल प्लाजा को MLFF सिस्टम में बदला जा रहा है. इसके अलावा दिल्ली-NCR, राजस्थान और गुजरात के 108 टोल प्लाजा के लिए टेंडर भी जारी किए गए हैं.
रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी के अनुसार, इस नई तकनीक से हर साल करीब 295 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी. इसके साथ ही लगभग 81 हजार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है. नितिन गडकरी के अनुसार, यह प्रणाली लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी मजबूत करेगी क्योंकि माल ढुलाई में समय कम लगेगा और परिवहन ज्यादा तेज और आसान होगा. सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में टोल कलेक्शन की ऑपरेशनल लागत भी घटकर 3-4 प्रतिशत तक आ जाएगी, जबकि फिलहाल यह 12-15 प्रतिशत के आसपास है.
इस नई व्यवस्था में वाहन चालकों को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना बेहद जरूरी होगा. अगर फास्टैग में पैसा नहीं होगा या वार्षिक पास सक्रिय नहीं होगा, तो वाहन मालिक को ई-नोटिस भेजा जाएगा. सरकार के अनुसार, ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी. ऐसा नहीं करने पर दोगुना टोल शुल्क देना पड़ सकता है.
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