भारत में एलपीजी की स्थिति बेहतर, मिडिल ईस्ट में तनाव से कमी ने गैस के स्रोत बढ़ाने की राह खोली

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ईरान युद्ध से पूरी दुनिया ने ऑयल एंड गैस की कमी का सामना किया. भारत को छोड़कर कई देशों में डीज़ल पेट्रोल के दाम आसमान छूने लगे.गैस की किल्लत से भी लोग परेशान हुए. हालांकि भारत में डीज़ल,पेट्रोल के साथ साथ घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रही. अब जबकि ईरान-अमेरिका युद्ध में सीज़फायर हो गया है और शांति वार्ता शुरू होने वाली है, ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि है 40 दिनों से अधिक चले युद्ध के दौरान स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के बंद रहने के दौरान भारत में एलपीजी का स्टेटस क्या है. आगे हालात सामान्य होने की प्रबल संभावना है और उम्मीद लगाई जा सकती है कि तेल और गैस की आपूर्ति पहले की तरह सामान्य होगी, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि तेल और गैस की कमी के समय भारत ने किस तरह तेल और गैस के नए स्रोत बनाए और अपने लिए नई राह खोली.
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सरकार ने रिफाइनरियों को आदेश दिया कि वे घरेलू इस्तेमाल वाली LPG का उत्पादन बढ़ाएं ताकि कमी न हो. फिलहाल स्टॉक पर्याप्त रखने की कोशिश की जा रही है. वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में गैस के दाम बढ़े हैं, लेकिन भारत सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए टैक्स (Excise Duty) में कटौती जैसे कदम उठाए हैं ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े. इसके साथ ही भारत सरकार अब पाइप वाली गैस (PNG) पर ज़ोर दे रही है ताकि सिलेंडरों पर निर्भरता कम हो सके.

भारत के गैस स्रोतभारत अपनी ज़रूरत की लगभग 60% LPG विदेशों से खरीदता है, जबकि बाकी 40% का उत्पादन देश के भीतर रिफाइनरियों में होता है. भारत की निर्भरता सबसे ज्यादा खाड़ी देशों पर है, लेकिन पिछले दिनों भारत ने अन्य देशो से भी तेल खरीदा. कतर भारत का सबसे बड़ा पार्टनर है. इसके अलावा भारत यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और रूस से भी गैस आयात करता है.

हालांकि पिछले माह पश्चिमी एशिया में तनाव की वजह से सप्लाई थोड़ी प्रभावित हुई, इसलिए भारत अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी विकल्प तलाश रहा है.यही भारत के लिए नए विकल्प हैं, जिन पर गैस की कमी के समय विचार किया गया.

कतर से है भारत की बड़ी गैस डील

कतर के साथ भारत का रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है.मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू होने से पहले ही भारत ने कतर से एक बड़ी डील की थी. फरवरी 2024 में भारत ने कतर के साथ $78 बिलियन का एक बहुत बड़ा समझौता किया है. इसके तहत कतर भारत को 2048 तक हर साल 7.5 मिलियन टन गैस सप्लाई करेगा. इससे भारत की गैस की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा पूरा होगा.

कतर अपने गैस उत्पादन को बढ़ाने के लिए "नॉर्थ फील्ड" प्लांट पर काम कर रहा है. खबरों के मुताबिक तकनीकी कारणों और क्षेत्रीय तनाव की वजह से इस नए प्लांट से एक्सपोर्ट शुरू होने में थोड़ी देरी हुई है. अब उम्मीद है कि इस विस्तार वाले हिस्से से पूरी तरह गैस की सप्लाई 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक शुरू होगी.