भारत की कृषि में अगली क्रांति सिर्फ ज्यादा उत्पादन नहीं, बेहतर प्रोसेसिंग की है
विकी डोडानी
भारत जिस पैमाने पर खाद्यान्न का उत्पादन करता है, वह पूरी दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय होना चाहिए। फिर भी इस प्रचुरता का एक बड़ा हिस्सा कभी ऐसे रूप में थाली तक नहीं पहुंच पाता, जो उसका मूल्य, पोषण या किसान की गरिमा बनाए रख सके।
कटाई के बाद होने वाला नुकसान और प्रोसेसिंग की सीमित पहुंच केवल तकनीकी समस्याएं नहीं हैं। ये ग्रामीण आय के रोजाना होने वाले क्षरण का कारण हैं। यही वजह है कि एक अच्छा मौसम भी किसी किसान परिवार को आर्थिक असुरक्षा से नहीं बचा पाता। यही वह संरचनात्मक अंतर है जो देश को खेत के उत्पादन को उच्च मूल्य वाले उत्पादों और स्थायी समृद्धि में बदलने से रोकता है।

भारत जिस पैमाने पर खाद्यान्न का उत्पादन करता है, वह पूरी दुनिया के लिए ईर्ष्या का विषय होना चाहिए। फिर भी इस प्रचुरता का एक बड़ा हिस्सा कभी ऐसे रूप में थाली तक नहीं पहुंच पाता, जो उसका मूल्य, पोषण या किसान की गरिमा बनाए रख सके।
कटाई के बाद होने वाला नुकसान और प्रोसेसिंग की सीमित पहुंच केवल तकनीकी समस्याएं नहीं हैं। ये ग्रामीण आय के रोजाना होने वाले क्षरण का कारण हैं। यही वजह है कि एक अच्छा मौसम भी किसी किसान परिवार को आर्थिक असुरक्षा से नहीं बचा पाता। यही वह संरचनात्मक अंतर है जो देश को खेत के उत्पादन को उच्च मूल्य वाले उत्पादों और स्थायी समृद्धि में बदलने से रोकता है।
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