सिर्फ बड़े बैंकों के नाम पर न जाएं, FD में सुरक्षा और मोटा मुनाफा पाने के लिए अपनाएं ये 5 'गोल्डन रूल्स'
भारत में 'फिक्स्ड डिपॉजिट' (FD) को निवेश का सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह केवल निवेश नहीं, बल्कि उनके भविष्य की सुरक्षा का एक आधार स्तंभ है। अक्सर हम अपने माता-पिता या बड़ों को यह कहते सुनते हैं कि "पैसे किसी बड़े और सरकारी बैंक में ही जमा करना, वहां पैसा डूबेगा नहीं।" यह धारणा इतनी मजबूत है कि लोग कम ब्याज दर पर भी बड़े बैंकों में लाखों रुपये जमा कर देते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई किसी बैंक का 'बड़ा' होना आपके पैसे की शत-प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी है? हकीकत इससे थोड़ी अलग है। आपकी FD की सुरक्षा बैंक की ब्रांडिंग या उसकी शाखाओं की संख्या पर नहीं, बल्कि एक सरकारी सुरक्षा कवच पर निर्भर करती है जिसे DICGC कहा जाता है।
क्या है DICGC और 5 लाख रुपये का सुरक्षा कवच?
'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसका मुख्य काम बैंक जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
नियम यह है कि यदि कोई बैंक दिवालिया हो जाता है या उस पर कोई वित्तीय संकट आता है और वह लेनदारों का पैसा लौटाने में असमर्थ होता है, तो DICGC प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान करता है।
यहाँ ध्यान देने वाली तीन महत्वपूर्ण बातें हैं:
एक ही बैंक में निवेश का जोखिम: क्यों 'बड़ा' हमेशा बेहतर नहीं?
कल्पना कीजिए कि आपने किसी प्रतिष्ठित बड़े बैंक में अपनी पूरी बचत यानी 10 लाख रुपये की FD कराई है। भगवान न करे, लेकिन अगर उस बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होती है और RBI उस पर मोरेटोरियम (निकासी पर पाबंदी) लगा देता है, तो आपके साथ क्या होगा?
ऐसी स्थिति में, आपको केवल 5 लाख रुपये तक का ही बीमा कवर मिलेगा। बाकी के 5 लाख रुपये बैंक की संपत्ति की नीलामी या भविष्य की रिकवरी पर निर्भर करेंगे, जिसमें सालों लग सकते हैं। इसके अलावा, मोरेटोरियम के दौरान आप अपनी जरूरत के लिए भी पैसा नहीं निकाल पाएंगे और ब्याज मिलना भी बंद हो सकता है।
इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि असली जोखिम बैंक के आकार में नहीं, बल्कि 'अत्यधिक केंद्रीकरण' (Concentration Risk) में है। यानी अपना सारा पैसा एक ही जगह रखना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
छोटे फाइनेंस बैंक: ज्यादा ब्याज और समान सुरक्षा
आजकल कई छोटे फाइनेंस बैंक बड़े बैंकों की तुलना में काफी बेहतर ब्याज दरें दे रहे हैं। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जहां बड़े बैंक 1 से 5 साल की अवधि के लिए 6.5% से 7% के आसपास ब्याज दे रहे हैं, वहीं छोटे बैंक 7.5% से 7.9% तक का रिटर्न दे रहे हैं।
ये बैंक अधिक ब्याज इसलिए देते हैं क्योंकि उन्हें अपना आधार मजबूत करने के लिए जमा राशि की आवश्यकता होती है। चूँकि ये बैंक भी RBI के कड़े नियमों के अधीन हैं और DICGC बीमा के दायरे में आते हैं, इसलिए इनमें 5 लाख रुपये तक का निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है।
तीन साल की अवधि में यह छोटा सा दिखने वाला ब्याज का अंतर आपको हजारों रुपयों का अतिरिक्त लाभ दे सकता है।
तरलता (Liquidity) और इमरजेंसी फंड की रणनीति
FD कराते समय अक्सर लोग 'लिक्विडिटी' को भूल जाते हैं। संकट के समय पैसा हाथ में होना जरूरी है। यदि कोई बैंक नियामक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, तो आपका पैसा कुछ समय के लिए फंस सकता है।
इसलिए, अपनी पूरी बचत को लॉक न करें। अपनी जरूरतों को तीन हिस्सों में बांटें:
निष्कर्ष: समझदारी ही असली सुरक्षा है
अंत में, सबक बिल्कुल साफ है। FD की सुरक्षा का असली मंत्र 'विविधीकरण' (Diversification) है, न कि केवल बैंक की 'प्रसिद्धि'। अपनी जमा पूंजी को अलग-अलग बैंकों में बांटकर आप न केवल अपने पूरे पैसे को बीमा के दायरे में ला सकते हैं, बल्कि अपनी कमाई को भी अधिकतम कर सकते हैं।
निवेश के मामले में आंख मूंदकर किसी ब्रांड पर भरोसा करने के बजाय नियमों और आंकड़ों पर भरोसा करना ही असली समझदारी है।
Disclaimer: सूचना के उद्देश्य के लिए: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है। इसका उद्देश्य पाठकों को बैंकिंग सुरक्षा और निवेश के सामान्य नियमों (जैसे DICGC कवर) के बारे में शिक्षित करना है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई किसी बैंक का 'बड़ा' होना आपके पैसे की शत-प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी है? हकीकत इससे थोड़ी अलग है। आपकी FD की सुरक्षा बैंक की ब्रांडिंग या उसकी शाखाओं की संख्या पर नहीं, बल्कि एक सरकारी सुरक्षा कवच पर निर्भर करती है जिसे DICGC कहा जाता है।
क्या है DICGC और 5 लाख रुपये का सुरक्षा कवच?
'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। इसका मुख्य काम बैंक जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है।नियम यह है कि यदि कोई बैंक दिवालिया हो जाता है या उस पर कोई वित्तीय संकट आता है और वह लेनदारों का पैसा लौटाने में असमर्थ होता है, तो DICGC प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान करता है।
यहाँ ध्यान देने वाली तीन महत्वपूर्ण बातें हैं:
- मूलधन और ब्याज दोनों शामिल: इस 5 लाख रुपये की सीमा में आपकी जमा की गई राशि और उस पर अर्जित ब्याज, दोनों को जोड़ा जाता है।
- प्रति बैंक सीमा: यह सीमा 'प्रति बैंक' होती है। यानी अगर आपके एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में कई खाते हैं, तो भी कुल सुरक्षा 5 लाख ही होगी।
- सभी बैंकों पर लागू: यह सुरक्षा बड़े कमर्शियल बैंकों और छोटे फाइनेंस बैंकों (Small Finance Banks), दोनों पर समान रूप से लागू होती है। यानी कानून की नजर में 5 लाख रुपये तक के लिए छोटा बैंक भी उतना ही सुरक्षित है जितना कोई बड़ा बैंक।
एक ही बैंक में निवेश का जोखिम: क्यों 'बड़ा' हमेशा बेहतर नहीं?
कल्पना कीजिए कि आपने किसी प्रतिष्ठित बड़े बैंक में अपनी पूरी बचत यानी 10 लाख रुपये की FD कराई है। भगवान न करे, लेकिन अगर उस बैंक की वित्तीय स्थिति खराब होती है और RBI उस पर मोरेटोरियम (निकासी पर पाबंदी) लगा देता है, तो आपके साथ क्या होगा?ऐसी स्थिति में, आपको केवल 5 लाख रुपये तक का ही बीमा कवर मिलेगा। बाकी के 5 लाख रुपये बैंक की संपत्ति की नीलामी या भविष्य की रिकवरी पर निर्भर करेंगे, जिसमें सालों लग सकते हैं। इसके अलावा, मोरेटोरियम के दौरान आप अपनी जरूरत के लिए भी पैसा नहीं निकाल पाएंगे और ब्याज मिलना भी बंद हो सकता है।
इसीलिए विशेषज्ञों का मानना है कि असली जोखिम बैंक के आकार में नहीं, बल्कि 'अत्यधिक केंद्रीकरण' (Concentration Risk) में है। यानी अपना सारा पैसा एक ही जगह रखना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।
छोटे फाइनेंस बैंक: ज्यादा ब्याज और समान सुरक्षा
आजकल कई छोटे फाइनेंस बैंक बड़े बैंकों की तुलना में काफी बेहतर ब्याज दरें दे रहे हैं। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जहां बड़े बैंक 1 से 5 साल की अवधि के लिए 6.5% से 7% के आसपास ब्याज दे रहे हैं, वहीं छोटे बैंक 7.5% से 7.9% तक का रिटर्न दे रहे हैं। ये बैंक अधिक ब्याज इसलिए देते हैं क्योंकि उन्हें अपना आधार मजबूत करने के लिए जमा राशि की आवश्यकता होती है। चूँकि ये बैंक भी RBI के कड़े नियमों के अधीन हैं और DICGC बीमा के दायरे में आते हैं, इसलिए इनमें 5 लाख रुपये तक का निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है।
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मुनाफे का गणित:
मान लीजिए आपके पास 8 लाख रुपये हैं।- विकल्प A: आपने पूरे 8 लाख एक बड़े बैंक में 6.5% पर रखे। सुरक्षा केवल 5 लाख की मिली और रिटर्न कम रहा।
- विकल्प B: आपने 4 लाख एक बड़े बैंक में और 4 लाख एक छोटे फाइनेंस बैंक में 7.5% पर रखे। यहाँ आपके पूरे 8 लाख रुपये बीमा कवर के दायरे में हैं (क्योंकि दोनों अलग-अलग बैंक हैं) और आपको औसतन ज्यादा ब्याज भी मिल रहा है।
तीन साल की अवधि में यह छोटा सा दिखने वाला ब्याज का अंतर आपको हजारों रुपयों का अतिरिक्त लाभ दे सकता है।
तरलता (Liquidity) और इमरजेंसी फंड की रणनीति
FD कराते समय अक्सर लोग 'लिक्विडिटी' को भूल जाते हैं। संकट के समय पैसा हाथ में होना जरूरी है। यदि कोई बैंक नियामक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, तो आपका पैसा कुछ समय के लिए फंस सकता है। इसलिए, अपनी पूरी बचत को लॉक न करें। अपनी जरूरतों को तीन हिस्सों में बांटें:
- इमरजेंसी फंड: इसे लिक्विड फंड्स या सेविंग्स अकाउंट में रखें जहाँ से इसे तुरंत निकाला जा सके।
- सुरक्षित FD: इसे अलग-अलग बैंकों (बड़े और छोटे) में 5-5 लाख की सीमा के भीतर बांटकर रखें।
- लंबी अवधि का निवेश: बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करें।
निष्कर्ष: समझदारी ही असली सुरक्षा है
अंत में, सबक बिल्कुल साफ है। FD की सुरक्षा का असली मंत्र 'विविधीकरण' (Diversification) है, न कि केवल बैंक की 'प्रसिद्धि'। अपनी जमा पूंजी को अलग-अलग बैंकों में बांटकर आप न केवल अपने पूरे पैसे को बीमा के दायरे में ला सकते हैं, बल्कि अपनी कमाई को भी अधिकतम कर सकते हैं।निवेश के मामले में आंख मूंदकर किसी ब्रांड पर भरोसा करने के बजाय नियमों और आंकड़ों पर भरोसा करना ही असली समझदारी है।
Disclaimer: सूचना के उद्देश्य के लिए: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से है। इसका उद्देश्य पाठकों को बैंकिंग सुरक्षा और निवेश के सामान्य नियमों (जैसे DICGC कवर) के बारे में शिक्षित करना है।









