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बैंक एफडी या पोस्ट ऑफिस: 2026 में सुरक्षित निवेश के लिए कौन सा विकल्प है आपके लिए बेस्ट?

अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने और उस पर बेहतर रिटर्न पाने के लिए निवेशक हमेशा सबसे सुरक्षित रास्ता तलाशते हैं। साल 2026 में भी निवेशकों के बीच यह असमंजस बना हुआ है कि वे बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाएं या पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं जैसे पीपीएफ (PPF) और एनएससी (NSC) पर भरोसा करें। जहाँ बैंक एफडी आपको निवेश में लचीलापन देती है वहीं सरकारी योजनाएं टैक्स छूट और गारंटीड ऊंचे ब्याज का भरोसा देती हैं।
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बैंक एफडी और सरकारी योजनाओं का अंतर

रिटेल निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट हमेशा से एक पसंदीदा विकल्प रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बैंक अलग अलग अवधियों के लिए निवेश की सुविधा देते हैं जिससे छोटे समय के लिए पैसा जमा करना आसान हो जाता है।


दूसरी ओर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) और किसान विकास पत्र (KVP) जैसी योजनाएं सीधे भारत सरकार द्वारा समर्थित हैं। सरकार ने मार्च 2026 तिमाही के लिए इन योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है जिससे ये बैंक एफडी के मुकाबले आज भी काफी आकर्षक बनी हुई हैं।

ब्याज दरों में कौन है आगे?



निवेश का मुख्य उद्देश्य शानदार रिटर्न पाना होता है। वर्तमान में ज्यादातर बड़े बैंक 1 से 3 साल की एफडी पर 6.25 प्रतिशत से 6.80 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं। कुछ चुनिंदा बैंकों में यह दर 7.10 प्रतिशत तक जा सकती है।

इसके उलट अगर आप सरकारी छोटी बचत योजनाओं को देखें तो वहां ब्याज दरें 6.9 प्रतिशत से लेकर 8.2 प्रतिशत तक हैं। इसका मतलब है कि शुद्ध ब्याज के मामले में सरकारी योजनाएं बैंक एफडी से कहीं आगे हैं। उदाहरण के लिए सुकन्या समृद्धि और सीनियर सिटीजन स्कीम में मिलने वाला 8.2 प्रतिशत का ब्याज किसी भी सुरक्षित बैंक एफडी से कहीं ज्यादा है।

2026 की प्रमुख ब्याज दरें एक नजर में

निवेश करने से पहले इन दरों को समझना जरूरी है। सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम दोनों ही 8.20 प्रतिशत की शानदार दर के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) 7.70 प्रतिशत का रिटर्न दे रहा है।


महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र और किसान विकास पत्र (KVP) दोनों में 7.50 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है। पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (MIS) 7.40 प्रतिशत और पीपीएफ (PPF) 7.10 प्रतिशत की दर दे रही है।

लॉक इन पीरियड और लचीलापन

सरकारी योजनाओं में ब्याज ज्यादा है लेकिन वहां लॉक इन पीरियड की पाबंदी होती है। जैसे एनएससी में 5 साल तक पैसा लॉक रहता है और पीपीएफ 15 साल की लंबी अवधि की योजना है। यह रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए तो अच्छा है लेकिन आपातकाल में पैसा निकालना मुश्किल हो सकता है।

इसके विपरीत बैंक एफडी में आपको काफी लचीलापन मिलता है। आप 7 दिनों से लेकर 10 साल तक की अवधि चुन सकते हैं और जरूरत पड़ने पर समय से पहले पैसा भी निकाल सकते हैं। हालांकि बैंक इसके लिए थोड़ा जुर्माना लेते हैं लेकिन नकदी की जरूरत पड़ने पर यह बेहतर विकल्प है।

टैक्स का गणित



निवेश की कमाई पर टैक्स एक बड़ा कारक है। एफडी से मिलने वाले ब्याज को आपकी वार्षिक आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स लगता है। इसके अलावा बैंक एक सीमा के बाद टीडीएस भी काटते हैं।

वहीं छोटी बचत योजनाओं में टैक्स का बोझ काफी कम है। पीपीएफ जैसी योजनाओं को 'EEE' का दर्जा प्राप्त है जिसका मतलब है कि निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी राशि टैक्स फ्री होती है। एनएससी में भी टैक्स छूट का लाभ मिलता है जिससे यह टैक्स बचाने का एक बेहतरीन जरिया बन जाता है।