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FD या स्मॉल सेविंग स्कीम्स: 2026 में कहां बनेगा आपका पैसा? जानिए फायदे और नुकसान का पूरा गणित

निवेश का सबसे पहला नियम है—रिटर्न। अगर हम मौजूदा आंकड़ों की तुलना करें, तो सरकारी योजनाएं बैंकों पर भारी पड़ती दिखाई देती हैं। सरकार ने हाल ही में मार्च तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे निवेशकों को स्थिर रिटर्न का भरोसा मिला है।
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  • बैंक एफडी (Bank FD): अभी ज्यादातर बड़े बैंक 1 साल से 3 साल की एफडी पर 6.25% से 6.50% के आसपास ब्याज दे रहे हैं। (सीनियर सिटीजन्स को .50% एक्स्ट्रा मिलता है)।

  • स्मॉल सेविंग स्कीम्स: यहाँ रिटर्न का पलड़ा भारी है। ब्याज दरें 6.7% से शुरू होकर 8.2% तक जाती हैं।


रिटर्न ही सब कुछ नहीं, 'लॉक-इन' को भी समझें

ज्यादा ब्याज देखकर सीधे सरकारी स्कीम में कूदना समझदारी नहीं है। आपको "लिक्विडिटी" यानी पैसे निकालने की आजादी पर भी ध्यान देना होगा।

  1. फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक एफडी में आपको आजादी मिलती है। आप 6 महीने, 1 साल या 2 साल के लिए पैसा जमा कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर थोड़ा जुर्माना देकर तोड़ भी सकते हैं।


  • बंधन (Lock-in): स्मॉल सेविंग स्कीम्स में आपका पैसा एक तय समय के लिए लॉक हो जाता है। जैसे पीपीएफ में 15 साल और एनएससी में 5 साल। अगर आपको लगता है कि अगले कुछ सालों में आपको पैसों की अचानक जरूरत पड़ सकती है, तो ये स्कीम्स आपको फंसा सकती हैं।

  • प्रमुख स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें इस प्रकार हैं:

    1. सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS): 8.20 प्रतिशत

    2. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): 8.20 प्रतिशत


  • नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC): 7.70 प्रतिशत

  • किसान विकास पत्र (KVP): 7.50 प्रतिशत

  • महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट: 7.50 प्रतिशत

  • पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (MIS): 7.40 प्रतिशत

  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): 7.10 प्रतिशत


  • नेशनल सेविंग टाइम डिपॉजिट: 6.9 से 7.5 प्रतिशत

  • नेशनल सेविंग आरडी (RD): 6.70 प्रतिशत

  • आंकड़े साफ बताते हैं कि रिटर्न के मामले में फिलहाल सरकारी योजनाएं बैंक एफडी से थोड़ा आगे नजर आ रही हैं।

    लॉक-इन पीरियड और लिक्विडिटी

    रिटर्न के अलावा, आपको यह भी देखना होगा कि आपको अपने पैसों की जरूरत कब पड़ सकती है।


    • स्मॉल सेविंग स्कीम्स: इनमें ज्यादा ब्याज तो मिलता है, लेकिन पैसा एक निश्चित समय के लिए लॉक हो जाता है। उदाहरण के लिए, एनएससी (NSC) में 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जबकि पीपीएफ (PPF) में यह 15 साल का होता है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ती है, तो निकासी के नियम थोड़े सख्त हो सकते हैं।

    • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): एफडी में निवेश की अवधि चुनने की पूरी आजादी होती है। आप 7 दिन से लेकर 10 साल तक की एफडी करा सकते हैं। यह छोटी अवधि के लक्ष्यों (2 से 3 साल) के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें लिक्विडिटी (तरलता) ज्यादा होती है।

    टैक्स का गणित समझना है जरूरी

    निवेश से होने वाली कमाई पर टैक्स का असर आपके असली मुनाफे को कम कर सकता है।

    • एफडी (FD): एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। यह आपकी सालाना आय में जुड़ता है और आप जिस टैक्स स्लैब में आते हैं, उसके अनुसार आपको टैक्स देना पड़ता है। यानी अगर आप उच्च टैक्स स्लैब में आते हैं, तो एफडी का रिटर्न आपके लिए कम आकर्षक हो सकता है।


  • स्मॉल सेविंग स्कीम्स: इनमें से कई योजनाओं में टैक्स छूट का लाभ मिलता है। हालांकि, पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत एनएससी और पीपीएफ में निवेश पर छूट अब उतनी प्रभावी नहीं रह गई हो, लेकिन इनसे मिलने वाला ब्याज अभी भी कई मामलों में टैक्स-फ्री होता है। पीपीएफ तो "Exempt-Exempt-Exempt" (EEE) श्रेणी में आता है, जिसका अर्थ है कि निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी तीनों पर कोई टैक्स नहीं लगता।

  • कैलकुलेशन:कहां कितना फायदा?

    मान लीजिए आपके पास 1 लाख रुपये हैं।

    • अगर आप इसे 5 साल के लिए किसी बैंक एफडी में 6.50% की दर पर निवेश करते हैं, तो ब्याज टैक्सेबल होगा।

    • वहीं, अगर आप इसे एनएससी में 7.7% की दर पर 5 साल के लिए लगाते हैं, तो आपको न केवल ज्यादा ब्याज मिलेगा, बल्कि टैक्स के बाद का रिटर्न भी एफडी से काफी बेहतर होगा।


    क्या है सही रणनीति?

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय संतुलन बनाना सबसे अच्छा है।

    1. लंबी अवधि के लिए: अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई है और आप 15 साल या उससे ज्यादा समय तक निवेश कर सकते हैं, तो पीपीएफ (PPF) सबसे बेहतर है।

    2. मध्यम अवधि के लिए: 5 साल के नजरिए से एनएससी (NSC) एक शानदार विकल्प है, जो सरकारी गारंटी के साथ आता है।

    3. छोटी अवधि के लिए: अगर आपको 1 से 3 साल में पैसों की जरूरत है, तो बैंक एफडी (FD) सबसे सुरक्षित और सुलझा हुआ विकल्प है।


    अपने पोर्टफोलियो में इन तीनों का सही मिश्रण रखकर आप सुरक्षा, रिटर्न और लिक्विडिटी तीनों का लाभ उठा सकते हैं। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और रिस्क लेने की क्षमता का आकलन जरूर करें।