How To Get 50,000 Pension: क्या है SWP? जो आपको रिटायरमेंट के बाद बना देगा मालामाल
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी अपने भविष्य को लेकर थोड़ा चिंतित रहते हैं। अक्सर मन में यह सवाल आता है कि जब शरीर पहले की तरह काम नहीं करेगा और कमाई के साधन बंद हो जाएंगे, तब क्या होगा? क्या हमें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ेगा? अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को लेकर फिक्रमंद हैं, तो हमने एक ऐसा प्लान तैयार किया है जो आपको रिटायरमेंट के बाद अगले 25 सालों तक हर महीने 50,000 रुपये की पेंशन दिलाने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं इसे कैसे हासिल करें।
अगर आपकी उम्र 25 साल है और आपको लगता है कि रिटायरमेंट प्लानिंग 40 की उम्र के बाद शुरू करनी चाहिए, तो आपको फिर से सोचने की जरूरत है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने से एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने में बहुत कम मेहनत लगती है। इसके उलट, अगर आप 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो धन जुटाने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इस सिद्धांत को "पॉवर ऑफ कंपाउंडिंग" यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत कहा जाता है।
लंबे समय तक निवेश करने से न केवल आपको अपनी मूल राशि पर ब्याज मिलता है, बल्कि ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। कंपाउंडिंग का यही असर आपके बुढ़ापे में एक वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। हर महीने 50,000 रुपये की पेंशन सुरक्षित करने के लिए अपने पैसे को समझदारी से निवेश करना बहुत जरूरी है। भारत में बहुत से लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सोने पर भरोसा करते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण इन विकल्पों की वैल्यू समय के साथ कम हो सकती है।
यही कारण है कि वित्तीय सलाहकार सुझाव देते हैं कि रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का सही संतुलन होना चाहिए। इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबे समय में 12% से 15% तक रिटर्न दे सकते हैं, जो महंगाई को मात देने के लिए बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, PPF और NPS जैसे निवेश साधन आपके पैसे को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
क्या है सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP)? जब लोग रिटायर होते हैं, तो उन्हें अक्सर प्रोविडेंट फंड या ग्रेच्युटी से एक बड़ी राशि मिलती है। जबकि बहुत से लोग इस राशि को बैंक में जमा करना चुनते हैं, विशेषज्ञ एक वैकल्पिक दृष्टिकोण की वकालत करते हैं जिसे सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) कहा जाता है। इसके जरिए आप अपने निवेश किए गए पैसे से हर महीने एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में निकाल सकते हैं।
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अगर आपकी उम्र 25 साल है और आपको लगता है कि रिटायरमेंट प्लानिंग 40 की उम्र के बाद शुरू करनी चाहिए, तो आपको फिर से सोचने की जरूरत है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने से एक मजबूत आर्थिक आधार बनाने में बहुत कम मेहनत लगती है। इसके उलट, अगर आप 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं, तो धन जुटाने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इस सिद्धांत को "पॉवर ऑफ कंपाउंडिंग" यानी चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत कहा जाता है।
लंबे समय तक निवेश करने से न केवल आपको अपनी मूल राशि पर ब्याज मिलता है, बल्कि ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। कंपाउंडिंग का यही असर आपके बुढ़ापे में एक वित्तीय सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। हर महीने 50,000 रुपये की पेंशन सुरक्षित करने के लिए अपने पैसे को समझदारी से निवेश करना बहुत जरूरी है। भारत में बहुत से लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सोने पर भरोसा करते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण इन विकल्पों की वैल्यू समय के साथ कम हो सकती है।
यही कारण है कि वित्तीय सलाहकार सुझाव देते हैं कि रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का सही संतुलन होना चाहिए। इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबे समय में 12% से 15% तक रिटर्न दे सकते हैं, जो महंगाई को मात देने के लिए बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, PPF और NPS जैसे निवेश साधन आपके पैसे को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
क्या है सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP)? जब लोग रिटायर होते हैं, तो उन्हें अक्सर प्रोविडेंट फंड या ग्रेच्युटी से एक बड़ी राशि मिलती है। जबकि बहुत से लोग इस राशि को बैंक में जमा करना चुनते हैं, विशेषज्ञ एक वैकल्पिक दृष्टिकोण की वकालत करते हैं जिसे सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) कहा जाता है। इसके जरिए आप अपने निवेश किए गए पैसे से हर महीने एक निश्चित राशि पेंशन के रूप में निकाल सकते हैं।









