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House Rent Rules 2026: मकान किराए पर देते समय इन बातों का रखें ध्यान, वरना लगेगा फाइन

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आज के समय में बहुत से लोग अतिरिक्त आय के लिए अपने घर या फ्लैट को किराए पर देते हैं। बड़े शहरों में तो यह एक आम बात बन चुकी है। लेकिन कई मकान मालिक ऐसे भी होते हैं जो बिना सही जानकारी के घर किराए पर दे देते हैं और बाद में उन्हें कानूनी समस्याओं या जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
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हाल के वर्षों में किराए के घरों से जुड़े नियमों को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। इन नियमों का मकसद मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों की सुरक्षा करना है। अगर कोई मकान मालिक इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे आर्थिक दंड भी भरना पड़ सकता है।

इसलिए अगर आप भी अपना घर किराए पर देने की सोच रहे हैं तो इन महत्वपूर्ण नियमों को जरूर समझ लें।


रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूरी

सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि किराए का एग्रीमेंट आधिकारिक रूप से रजिस्टर होना चाहिए। कई लोग सिर्फ साधारण कागज पर लिखकर किराए का समझौता कर लेते हैं, लेकिन यह तरीका कानूनी रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता।

नए नियमों के अनुसार किराए का एग्रीमेंट तय समय के भीतर रजिस्टर कराना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो जुर्माना भी लग सकता है। कई मामलों में यह जुर्माना लगभग 5000 रुपये तक हो सकता है।


रजिस्ट्रेशन होने से मकान मालिक और किरायेदार दोनों के पास एक कानूनी दस्तावेज होता है जो भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में काम आता है।

किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी

घर किराए पर देने से पहले किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन करवाना भी बहुत जरूरी होता है। कई राज्यों में यह प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई है।

पुलिस वेरिफिकेशन से यह सुनिश्चित किया जाता है कि किरायेदार की पहचान सही है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अगर मकान मालिक यह प्रक्रिया पूरी नहीं करता है तो कुछ शहरों में उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

यह कदम मकान मालिक की सुरक्षा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।


सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा तय

पहले कई शहरों में मकान मालिक किरायेदार से 6 से 10 महीने तक का एडवांस सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग लेते थे। लेकिन नए नियमों के अनुसार अब इसमें सीमा तय कर दी गई है।

आमतौर पर रिहायशी घर के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिकतम दो महीने के किराए तक ही रखा जा सकता है। जबकि कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यह सीमा छह महीने तक हो सकती है।

इस नियम का उद्देश्य किरायेदारों पर आर्थिक बोझ कम करना और किराए के बाजार को ज्यादा संतुलित बनाना है।

किराया बढ़ाने के भी नियम हैं

कई बार देखा जाता है कि मकान मालिक अचानक किराया बढ़ा देते हैं। लेकिन नए नियमों के तहत ऐसा करना आसान नहीं है।

अगर मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है तो उसे पहले से लिखित सूचना देनी होगी। कई मामलों में लगभग 90 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है।

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इससे किरायेदार को नए किराए के हिसाब से योजना बनाने का समय मिल जाता है और विवाद की संभावना कम हो जाती है।

डिजिटल भुगतान और रिकॉर्ड रखना जरूरी

आजकल किराए के लेनदेन में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है। खासकर अगर किराया एक निश्चित सीमा से अधिक है तो बैंक ट्रांसफर, यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान करना बेहतर माना जाता है।

डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे लेनदेन का स्पष्ट रिकॉर्ड रहता है। भविष्य में अगर कोई विवाद होता है तो यही रिकॉर्ड सबूत के रूप में काम आता है।

इसलिए मकान मालिकों को हमेशा किराए की रसीद या डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।

विवाद होने पर क्या करें

अगर मकान मालिक और किरायेदार के बीच किसी तरह का विवाद हो जाता है तो अब इसके समाधान के लिए विशेष रेंट ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। इन अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों का जल्दी निपटारा करना है।


रिपोर्ट्स के अनुसार कई मामलों में विवादों को लगभग 60 दिनों के भीतर सुलझाने का लक्ष्य रखा गया है।

इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकता है और दोनों पक्षों को जल्दी राहत मिल सकती है।



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