क्यों अटक जाता है इनकम टैक्स रिफंड? जानिए वे गलतियां जो रोक देती हैं आपके पैसे

आयकर रिटर्न यानी आईटीआर भरने के बाद हर करदाता को अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार रहता है। जिन लोगों ने जुलाई के महीने में अपना रिटर्न फाइल कर दिया था, उनमें से कई लोगों के खातों में अब तक रिफंड की रकम जमा नहीं हो सकी है। Income Tax Refund Delay July ITR Filing 2026 के आंकड़ों के अनुसार आयकर विभाग द्वारा लाखों रिटर्न्स की प्रोसेसिंग पूरी कर ली गई है, लेकिन कुछ तकनीकी या तकनीकी-प्रशासनिक कारणों की वजह से कई टैक्सपेयर्स का रिफंड पेंडिंग बना हुआ है। यदि आपका रिफंड भी अभी तक नहीं आया है तो इसके पीछे 6 प्रमुख कारण हो सकते हैं।
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ई-वेरिफिकेशन पूरा न होना और बैंक खाते का प्री-वैलिडेशन न होना

रिफंड में देरी की दो सबसे सामान्य वजहें आपके खाते के सत्यापन से जुड़ी होती हैं। 6 Reasons Why ITR Refund Pending Income Tax के तहत पहला कारण आईटीआर का ई-वेरिफिकेशन पूरा न होना है। रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होता है, और जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू नहीं करता। दूसरा बड़ा कारण बैंक खाते का प्री-वैलिडेट न होना है। यदि आपका बैंक खाता पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड नहीं है या उसमें नाम और पैन कार्ड का विवरण अलग है, तो रिफंड की राशि आपके बैंक में क्रेडिट नहीं हो पाती।


फॉर्म 26एएस और एआईएस में डेटा का मिसमैच होना

करदाता द्वारा दी गई जानकारी और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर होने पर भी रिफंड में देरी होती है। How to Check Income Tax Refund Status Online के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि कहीं आपके दावों और विभागीय आंकड़ों में असमानता तो नहीं है। यदि आपके द्वारा फाइल किए गए आईटीआर में दर्ज टीडीएस या आय का ब्योरा आपके फॉर्म 26एएस और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी एआईएस से मेल नहीं खाता है, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को प्रोसेसिंग के लिए रोक देता है और जांच के लिए रोक लगा देता है।


अतिरिक्त जानकारी की मांग और बकाया टैक्स की देनदारी

कई बार आयकर विभाग को रिटर्न का सत्यापन करने के लिए अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है। Bank Account Pre-validation for ITR Refund के साथ-साथ करदाताओं को अपने ई-फाइलिंग पोर्टल के रिस्पॉन्स सेक्शन को भी जांचते रहना चाहिए। यदि विभाग को आपके द्वारा क्लेम किए गए डिडक्शन या टैक्स छूट पर कोई संदेह होता है, तो वे नोटिस या इंटीमेशन जारी करके जवाब मांगते हैं। इसके अलावा यदि पिछले किसी वर्ष का टैक्स बकाया है, तो विभाग वर्तमान रिफंड की राशि को उस बकाए के साथ एडजस्ट कर देता है, जिससे प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगता है।

गलत फॉर्म का चयन और आईटीआर स्क्रूटनी का मामला

गलत आईटीआर फॉर्म चुनना या मामला स्क्रूटनी में चले जाना भी रिफंड में भारी देरी का कारण बनता है। Income Tax Return Verification Delay Impact के तहत यदि किसी व्यक्ति ने अपनी आय श्रेणी के हिसाब से गलत फॉर्म (जैसे आईटीआर-1 की जगह आईटीआर-2) चुन लिया है, तो विभाग उसे डिफेक्टिव रिटर्न मान लेता है। वहीं यदि आपका रिटर्न रैंडम चेकिंग या हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की वजह से स्क्रूटनी के लिए चुन लिया जाता है, तो इसकी विस्तृत जांच पूरी होने तक रिफंड जारी नहीं किया जाता है। ऐसी स्थिति में पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक करके तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए।