Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया 92.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव
भारतीय करेंसी के लिए आज का दिन काफी मुश्किलों भरा रहा। सोमवार 9 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कारोबार शुरू होते ही रुपये में कमजोरी दिखने लगी और ये 92.31 के रिकॉर्ड स्तर तक नीचे गिर गया। पिछले कारोबारी दिन ये 91.74 पर बंद हुआ था, लेकिन आज बाजार खुलते ही इसमें बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार की तुलना में रुपये में 50 पैसे से ज्यादा की कमी आई है। ये पिछले कई महीनों में एक दिन में होने वाली सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। इससे साफ पता चलता है कि भारतीय करेंसी पर इस समय कितना ज्यादा दबाव बना हुआ है।

अस्वीकरण: न्यूज़पॉइंट पर दी गई सभी खबरें और बातें सिर्फ आपको जानकारी देने के लिए हैं। यहां दी गई किसी भी जानकारी को पढ़कर लिए गए फैसले से अगर किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो इसके लिए न्यूज़पॉइंट जिम्मेदार नहीं होगा। कोई भी बड़ा कदम उठाने या कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने स्तर पर पूरी जांच-पड़ताल जरूर कर लें।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल के दामों में आया भारी उछाल है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड के दाम करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और ये अब 117 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है। पिछले कुछ ही दिनों में तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया भर को डर है कि तेल की सप्लाई रुक सकती है। खासकर 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' वाले रास्ते से होने वाले व्यापार पर खतरा मंडरा रहा है, जो तेल की आवाजाही के लिए बहुत जरूरी रास्ता है।ईरान के हालात और असर
ईरान के भीतर भी बड़े बदलाव हो रहे हैं जिससे दुनिया भर के बाजार डरे हुए हैं। मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया बड़ा नेता चुना गया है। ये संकेत देता है कि वहां की सरकार अभी भी कड़े फैसले लेने के पक्ष में है। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहा ईरान का ये संघर्ष जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा है। भारत के लिए ये बड़ी चिंता की बात है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है। जब भी तेल महंगा होता है, तो भारत का खर्च बढ़ जाता है और इसका सीधा नुकसान रुपये की कीमत को उठाना पड़ता है।दुनिया भर के बाजारों का हाल
सिर्फ भारतीय रुपया ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजारों में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिका के बाजारों में गिरावट के संकेत मिलने के बाद एशिया के बाजारों में भी हड़कंप मच गया। जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार करीब 6.5 प्रतिशत तक गिर गए। जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो निवेशक अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर लगाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अमेरिकी डॉलर काफी मजबूत हो जाता है और भारत जैसे उभरते देशों की करेंसी कमजोर पड़ने लगती है। यही वजह है कि आज रुपये को काफी नुकसान उठाना पड़ा।रिजर्व बैंक की कोशिशें
रुपये को ज्यादा गिरने से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बाजार में दखल दिया है। जानकारों के मुताबिक, बाजार खुलने से पहले ही रिजर्व बैंक ने डॉलर बेचे ताकि रुपये की गिरावट को थोड़ा रोका जा सके। रिजर्व बैंक की इस कोशिश से रुपया एक बार 92.30 से संभलकर 92.20 तक आया था। लेकिन बाहरी दबाव इतना ज्यादा है कि रुपया फिर से नीचे गिर गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर रुपये में इसी तरह का उतार-चढ़ाव जारी रहा, तो रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में और भी बड़े कदम उठा सकता है।घरेलू कारणों का असर
ग्लोबल कारणों के साथ-साथ कुछ घरेलू खबरें भी बाजार पर असर डाल रही हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का फैसला किया है। इस योजना पर करीब 35 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। बाजार के विशेषज्ञ इन आर्थिक फैसलों पर भी नजर रख रहे हैं। तेल की बढ़ती कीमतें, दुनिया के देशों के बीच आपसी तनाव और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालना, ये ऐसी चीजें हैं जो आने वाले समय में रुपये की चाल तय करेंगी। फिलहाल रुपये में स्थिरता आने के संकेत कम ही दिख रहे हैं।अस्वीकरण: न्यूज़पॉइंट पर दी गई सभी खबरें और बातें सिर्फ आपको जानकारी देने के लिए हैं। यहां दी गई किसी भी जानकारी को पढ़कर लिए गए फैसले से अगर किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो इसके लिए न्यूज़पॉइंट जिम्मेदार नहीं होगा। कोई भी बड़ा कदम उठाने या कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने स्तर पर पूरी जांच-पड़ताल जरूर कर लें।









