ITR Filing 2026 : रिटर्न भरने से पहले इन 6 बातों का रखें ध्यान, नहीं तो फंस सकता है Refund
अगर आप भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए है। क्या आपको पता है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है? बड़ी संख्या में करदाता अपने रिटर्न फाइल भी कर चुके हैं। अगर आप भी ITR दाखिल करने जा रहे हैं, तो कुछ अहम बातों को पहले समझ लेना जरूरी है। अब ITR फाइल करना सिर्फ टैक्स रिफंड पाने या एक औपचारिकता पूरी करने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे जुड़ी कई जरूरी चीजें हैं, जिनका असर आपके वित्तीय रिकॉर्ड, लोन एप्लीकेशन और भविष्य की टैक्स प्लानिंग पर भी पड़ता है।
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम सही ITR फॉर्म को चुनना है। आपकी इनकम के सोर्स, नौकरी, बिजनेस, विदेशी इनकम और दूसरी वित्तीय जानकारियों के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म जारी किए गए हैं। अगर आप गलत ITR फॉर्म चुनकर रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपका रिटर्न इनवैलिड माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको दोबारा सही फॉर्म के साथ ITR फाइल करना पड़ सकता है, जिससे समय और मेहनत दोनों बढ़ सकती हैं।
ITR दाखिल करने से पहले AIS (Annual Information Statement), Form 26AS, Form 16 और प्री-फिल्ड डेटा को गौर से जांच लेना चाहिए। इन दस्तावेजों में आपकी इनकम, TDS, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। अगर इनमें किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर दिखाई देता है, तो उसे पहले ही ठीक कर लेना बेहतर होता है। ऐसा करने से भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस या स्पष्टीकरण मांगने जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।
अक्सर लोग ITR दाखिल करते समय सिर्फ अपनी सैलरी से होने वाली इनकम की जानकारी देते हैं और बैंक ब्याज, किराये की इनकम, फ्रीलांस काम या दूसरे सोर्स से हुई कमाई को बताना भूल जाते हैं। इनकम टैक्स कानूनों के अनुसार सभी तरह की इनकम को संबंधित कैटेगरी के तहत घोषित करना जरूरी है। यदि कोई इनकम छिपाई जाती है, तो बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिल सकता है।
अगर आपको ग्रेच्युटी (Gratuity), लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment), कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) या दूसरी कोई टैक्स-फ्री राशि प्राप्त हुई है, तो उसकी जानकारी भी ITR में देनी चाहिए। भले ही इस इनकम पर टैक्स न लगता हो, लेकिन इसे रिटर्न में दिखाना जरूरी है, ताकि आपकी घोषित इनकम और निवेश से जुड़ी जानकारी में कोई गलती न रहे।
धारा 80C, 80D और दूसरे प्रावधानों के तहत टैक्स छूट या कटौती का दावा तभी करें, जब आप सच में उसके पात्र हों। गलत तरीके से छूट या कटौती का दावा करने पर बाद में अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना देना पड़ सकता है। इसलिए ITR दाखिल करते समय सभी दस्तावेजों की जांच कर सही जानकारी ही दर्ज करें।
अगर आपको Tax Refund मिलने की उम्मीद है, तो ITR दाखिल करने से पहले यह पक्का कर लें कि आपका बैंक खाता आयकर पोर्टल पर सही तरीके से वैलिडेटेड (Validated) और सक्रिय (Active) है। बैंक खाते की जानकारी में किसी तरह की गलती या अकाउंट वेरिफिकेशन न होने की स्थिति में आपका रिफंड अटक सकता है या उसके मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले बैंक खाते की जानकारी एक बार जरूर जांच लें।
सही ITR फॉर्म का चुनाव है जरूरी
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम सही ITR फॉर्म को चुनना है। आपकी इनकम के सोर्स, नौकरी, बिजनेस, विदेशी इनकम और दूसरी वित्तीय जानकारियों के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म जारी किए गए हैं। अगर आप गलत ITR फॉर्म चुनकर रिटर्न दाखिल करते हैं, तो आपका रिटर्न इनवैलिड माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में आपको दोबारा सही फॉर्म के साथ ITR फाइल करना पड़ सकता है, जिससे समय और मेहनत दोनों बढ़ सकती हैं।
Form 16, Form 26AS और AIS को अच्छे से जांच लें
ITR दाखिल करने से पहले AIS (Annual Information Statement), Form 26AS, Form 16 और प्री-फिल्ड डेटा को गौर से जांच लेना चाहिए। इन दस्तावेजों में आपकी इनकम, TDS, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। अगर इनमें किसी तरह की गड़बड़ी या अंतर दिखाई देता है, तो उसे पहले ही ठीक कर लेना बेहतर होता है। ऐसा करने से भविष्य में आयकर विभाग की ओर से नोटिस या स्पष्टीकरण मांगने जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।
इनकम के सभी सोर्स की जानकारी दें
अक्सर लोग ITR दाखिल करते समय सिर्फ अपनी सैलरी से होने वाली इनकम की जानकारी देते हैं और बैंक ब्याज, किराये की इनकम, फ्रीलांस काम या दूसरे सोर्स से हुई कमाई को बताना भूल जाते हैं। इनकम टैक्स कानूनों के अनुसार सभी तरह की इनकम को संबंधित कैटेगरी के तहत घोषित करना जरूरी है। यदि कोई इनकम छिपाई जाती है, तो बाद में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिल सकता है।
टैक्स-फ्री इनकम की भी करें घोषणा
अगर आपको ग्रेच्युटी (Gratuity), लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment), कम्यूटेड पेंशन (Commuted Pension) या दूसरी कोई टैक्स-फ्री राशि प्राप्त हुई है, तो उसकी जानकारी भी ITR में देनी चाहिए। भले ही इस इनकम पर टैक्स न लगता हो, लेकिन इसे रिटर्न में दिखाना जरूरी है, ताकि आपकी घोषित इनकम और निवेश से जुड़ी जानकारी में कोई गलती न रहे।
सही छूट और कटौती का ही दावा करें
धारा 80C, 80D और दूसरे प्रावधानों के तहत टैक्स छूट या कटौती का दावा तभी करें, जब आप सच में उसके पात्र हों। गलत तरीके से छूट या कटौती का दावा करने पर बाद में अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना देना पड़ सकता है। इसलिए ITR दाखिल करते समय सभी दस्तावेजों की जांच कर सही जानकारी ही दर्ज करें।
बैंक खाते की जानकारी जरूर सत्यापित करें
अगर आपको Tax Refund मिलने की उम्मीद है, तो ITR दाखिल करने से पहले यह पक्का कर लें कि आपका बैंक खाता आयकर पोर्टल पर सही तरीके से वैलिडेटेड (Validated) और सक्रिय (Active) है। बैंक खाते की जानकारी में किसी तरह की गलती या अकाउंट वेरिफिकेशन न होने की स्थिति में आपका रिफंड अटक सकता है या उसके मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए रिटर्न फाइल करने से पहले बैंक खाते की जानकारी एक बार जरूर जांच लें।
Next Story