आजकल बाजार में Lab-Grown Gold की बहुत चर्चा हो रही है। जैसे लैब में बने हीरों ने गहनों के बाजार को बदल दिया था, वैसे ही अब लैब वाला सोना भी नई जगह बना रहा है। लोगों के मन में कई सवाल आ रहे हैं कि क्या ये असली सोने जैसा है, इसकी Production कैसे होती है और क्या इसमें Investment करना सुरक्षित है। भारत में सोने को पवित्र धातु माना जाता है। हर घर में इसका एक खास स्थान है। इस नई तकनीक और Sustainable Jewellery ने एक ऐसा बदलाव ला दिया है जिसके लिए बहुत से लोग अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। आइए इस सोने के बारे में और बातें जानते हैं।
असली सोने जैसा ही है ये सोना
लैब में बना सोना पूरी तरह से असली खदान वाले सोने जैसा ही होता है। इन दोनों में अंदर और बाहर की बनावट में कोई फर्क नहीं होता है। फर्क सिर्फ इसको तैयार करने के तरीके में देखने को मिलता है। इस नए सोने को जमीन से निकालने के बजाय, वैज्ञानिक इसे लैब में नई तकनीक से बनाते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि ये कोई सोने का पानी चढ़ा हुआ गहना या नकली सोना नहीं है। ये असली सोना है, बस इसे अलग तरीके से तैयार किया गया है।
बनाने के तरीके
लैब में सोना तैयार करने के अभी दो तरीके मौजूद हैं। पहला तरीका छोटे स्तर पर काम करता है, जहां वैज्ञानिक तकनीक की मदद से सोने के छोटे कणों को जोड़ते हैं। पर ये तरीका बहुत महंगा है इसलिए इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है। दूसरा तरीका पुराने सोने को साफ करके नया बनाने का है। इसमें कंपनियां पुराने सोने को लेकर लैब में उसे बहुत साफ और शुद्ध करती हैं। हालांकि, लैब वाले हीरों की तरह सोने का ये काम अभी आम नहीं हुआ है और अभी भी इस तकनीक पर काम चल रहा है।
इतनी चर्चा क्यों?
आजकल गहने बनाने वालों पर काफी दबाव है कि वे ऐसे नए तरीके अपनाएं जिनसे प्रकृति को नुकसान न हो। हमें समझना होगा कि खदान से सोना निकालने के काम में बहुत ज्यादा चीजें और मेहनत लगती है। इसके लिए काफी जमीन की जरूरत होती है, और कई रसायनों का इस्तेमाल भी करना पड़ता है। इस काम में बहुत सारा पानी खर्च होता है और हवा भी गंदी होती है। लोग अब ऐसे गहने मांग रहे हैं जो अच्छे तरीके से बनाए गए हों। इसलिए लैब वाला सोना एक अच्छा रास्ता बन सकता है, और धीरे-धीरे लोगों का ध्यान इस पर जा रहा है।
क्या है इसकी कीमत
अभी इसका सीधा जवाब है कि ये खदान वाले सोने से ज्यादा सस्ता नहीं होगा। लैब में सोना बनाने के लिए बड़ी मशीनें और नई तकनीक चाहिए, जिस पर अभी काम चल रहा है। आगे चलकर जब काम आसान हो जाएगा, तब कीमत पर कुछ असर पड़ सकता है। अगर इसे वापस बेचने की बात करें, तो सोने का दाम उसके वजन, शुद्धता और बाजार के भाव पर तय होता है। अगर लैब वाले सोने की शुद्धता खदान वाले सोने के बराबर है, तो उसका दाम भी लगभग उतना ही होगा। फिर भी, लोगों को इसे समझने में थोड़ा समय जरूर लगेगा।
क्या आपको ये सोना खरीदना चाहिए
अगर आप सोचते हैं कि क्या ये असली सोना है, तो इसका जवाब हां है। पर क्या ये खदान से निकले सोने से बेहतर है, तो ये आपकी पसंद पर टिका है। अगर आप प्रकृति को बचाना चाहते हैं, तो ये एक अच्छा चुनाव साबित हो सकता है। पर भारत में खदान से निकले सोने के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। बात निवेश की करें, तो ये सोने की शुद्धता और बाजार के भाव पर टिका है। लैब वाला सोना पुरानी चीजों को हटा नहीं रहा है, बल्कि बता रहा है कि गहनों की दुनिया नए दौर में जा रही है। ये देखना रोचक होगा कि कंपनियां इसे आगे कैसे अपनाती हैं।