रसोई गैस सिलेंडर के लिए अब OTP है जरूरी: तेल कंपनियों ने बदले नियम, जानें आप पर क्या होगा असर
अगर आप भी घर पर रसोई गैस सिलेंडर मंगवाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) यानी ओटीपी (OTP) सिस्टम को काफी सख्त कर दिया है। अब तेल कंपनियों के लिए यह अनिवार्य हो गया है कि कम से कम 80 प्रतिशत डिलीवरी ओटीपी के माध्यम से ही पूरी की जाए।
इसका सीधा मतलब यह है कि जब आपके घर सिलेंडर आएगा, तो आपको अपने मोबाइल पर आया हुआ चार अंकों का कोड डिलीवरी मैन को देना होगा। जब तक वह कोड सिस्टम में दर्ज नहीं होगा, तब तक कागजों में आपकी डिलीवरी अधूरी मानी जाएगी।
क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव?
दरअसल, यह सिस्टम लगभग पांच साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या और लोगों की हिचक की वजह से इसे अनिवार्य नहीं किया गया था। अब कंपनियों ने इसे कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है। अगर गैस एजेंसियां बिना ओटीपी के सिलेंडर बांटती हैं, तो उनके रिकॉर्ड में स्टॉक कम नहीं होगा। नतीजा यह होगा कि तेल कंपनियां एजेंसी को नया स्टॉक तब तक नहीं भेजेंगी जब तक उनका पिछला स्टॉक 20 प्रतिशत से कम न हो जाए। इससे बाजार में सिलेंडर की किल्लत बढ़ सकती है।
उपभोक्ताओं के सामने आ रही हैं चुनौतियां
नए नियमों की वजह से उन लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है जो बिना बुकिंग के सिलेंडर लेने के आदी थे। अब बिना आधिकारिक बुकिंग और ओटीपी के सिलेंडर मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। साथ ही, नियम यह भी है कि एक सिलेंडर लेने के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की जा सकती है। ऐसे में जो लोग समय से पहले बुकिंग के लिए दबाव बना रहे हैं, उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
इतना ही नहीं, हाल ही में कुछ बॉटलिंग प्लांट बंद रहने की वजह से भी सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा है। अगर आप चाहते हैं कि आपको समय पर सिलेंडर मिले, तो अपना मोबाइल नंबर गैस एजेंसी में अपडेट रखें और बुकिंग के समय आने वाले ओटीपी को संभाल कर रखें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। गैस सिलेंडर के नियमों और कीमतों में बदलाव समय-समय पर सरकार और तेल कंपनियों द्वारा किए जाते हैं। किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपनी संबंधित गैस एजेंसी या आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क करें।
इसका सीधा मतलब यह है कि जब आपके घर सिलेंडर आएगा, तो आपको अपने मोबाइल पर आया हुआ चार अंकों का कोड डिलीवरी मैन को देना होगा। जब तक वह कोड सिस्टम में दर्ज नहीं होगा, तब तक कागजों में आपकी डिलीवरी अधूरी मानी जाएगी।
क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव?
दरअसल, यह सिस्टम लगभग पांच साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या और लोगों की हिचक की वजह से इसे अनिवार्य नहीं किया गया था। अब कंपनियों ने इसे कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है। अगर गैस एजेंसियां बिना ओटीपी के सिलेंडर बांटती हैं, तो उनके रिकॉर्ड में स्टॉक कम नहीं होगा। नतीजा यह होगा कि तेल कंपनियां एजेंसी को नया स्टॉक तब तक नहीं भेजेंगी जब तक उनका पिछला स्टॉक 20 प्रतिशत से कम न हो जाए। इससे बाजार में सिलेंडर की किल्लत बढ़ सकती है।उपभोक्ताओं के सामने आ रही हैं चुनौतियां
नए नियमों की वजह से उन लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है जो बिना बुकिंग के सिलेंडर लेने के आदी थे। अब बिना आधिकारिक बुकिंग और ओटीपी के सिलेंडर मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। साथ ही, नियम यह भी है कि एक सिलेंडर लेने के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की जा सकती है। ऐसे में जो लोग समय से पहले बुकिंग के लिए दबाव बना रहे हैं, उन्हें निराशा हाथ लग रही है। इतना ही नहीं, हाल ही में कुछ बॉटलिंग प्लांट बंद रहने की वजह से भी सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा है। अगर आप चाहते हैं कि आपको समय पर सिलेंडर मिले, तो अपना मोबाइल नंबर गैस एजेंसी में अपडेट रखें और बुकिंग के समय आने वाले ओटीपी को संभाल कर रखें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। गैस सिलेंडर के नियमों और कीमतों में बदलाव समय-समय पर सरकार और तेल कंपनियों द्वारा किए जाते हैं। किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपनी संबंधित गैस एजेंसी या आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क करें।
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