Post Office FD vs NSC: 50,000 रुपये के निवेश पर कहाँ मिलेगा सबसे ज्यादा मुनाफा?
मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए निवेश का मतलब सिर्फ पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना भी होता है। जब बात सुरक्षा और भरोसे की आती है, तो आज भी भारतीय डाकघर (Post Office) की बचत योजनाएं सबसे ऊपर रहती हैं। अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि अगर उनके पास 50,000 रुपये जैसी एकमुश्त राशि है, तो उसे 5 साल के लिए कहाँ लगाना बेहतर होगा: पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (Time Deposit) में या नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) में?
आइए, साल 2026 की ताजा ब्याज दरों और नियमों के आधार पर इन दोनों का बारीकी से विश्लेषण करते हैं।
जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के लिए सरकार ने जो ब्याज दरें तय की हैं, उनमें NSC बाजी मारता दिख रहा है।
पोस्ट ऑफिस FD (5 साल): अगर आप 5 साल की अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (Time Deposit) चुनते हैं, तो इस पर आपको 7.5% की वार्षिक ब्याज दर मिलती है। इसकी खास बात यह है कि इसमें ब्याज की गणना तिमाही (Quarterly) आधार पर होती है, जो आपके रिटर्न को थोड़ा बढ़ा देती है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC): वर्तमान में NSC पर 7.7% की वार्षिक ब्याज दर मिल रही है। इसमें ब्याज की गणना सालाना आधार पर कंपाउंड की जाती है और पूरा पैसा मैच्योरिटी के समय ही मिलता है।
चौंकिए मत! यहाँ ब्याज दर कम होने के बावजूद FD का रिटर्न NSC के लगभग बराबर या थोड़ा ज्यादा इसलिए दिख रहा है क्योंकि FD में 'तिमाही कंपाउंडिंग' का लाभ मिलता है, जबकि NSC में सालाना कंपाउंडिंग होती है।
टैक्स और अन्य फायदे
निवेश के फैसले में टैक्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
इनकम टैक्स छूट: अच्छी खबर यह है कि दोनों ही योजनाओं में 5 साल के निवेश पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।
TDS का झमेला: पोस्ट ऑफिस की इन योजनाओं की एक बड़ी खूबी यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाले पैसे पर पोस्ट ऑफिस अपनी तरफ से कोई TDS नहीं काटता है। हालांकि, यह आपकी कुल आय में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लग सकता है।
ऋण की सुविधा: जरूरत पड़ने पर आप NSC को बैंक में गिरवी रखकर लोन भी ले सकते हैं, जो इसे एक लचीला विकल्प बनाता है।
आपके लिए क्या बेहतर है?
चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपको मिलने वाला ब्याज हर साल आपके हाथ में आए (Annual Payout), तो पोस्ट ऑफिस FD बेहतर है क्योंकि इसमें ब्याज सालाना आधार पर बैंक खाते में क्रेडिट करने का विकल्प होता है।
वहीं, अगर आप अपनी बेटी की पढ़ाई या भविष्य के किसी बड़े लक्ष्य के लिए पैसा भूल जाना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह खुद-ब-खुद बढ़ता रहे, तो NSC एक शानदार अनुशासित बचत का तरीका है क्योंकि इसमें पैसा निकालने का विकल्प केवल 5 साल बाद ही मिलता है।
आइए, साल 2026 की ताजा ब्याज दरों और नियमों के आधार पर इन दोनों का बारीकी से विश्लेषण करते हैं।
ब्याज दरों का गणित: कौन है आगे?
जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के लिए सरकार ने जो ब्याज दरें तय की हैं, उनमें NSC बाजी मारता दिख रहा है।
पोस्ट ऑफिस FD (5 साल): अगर आप 5 साल की अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (Time Deposit) चुनते हैं, तो इस पर आपको 7.5% की वार्षिक ब्याज दर मिलती है। इसकी खास बात यह है कि इसमें ब्याज की गणना तिमाही (Quarterly) आधार पर होती है, जो आपके रिटर्न को थोड़ा बढ़ा देती है।
You may also like
South Korea: Two seriously hurt, another 11 injured after bus plows into pedestrians in Seoul
"Pune voted on 'vichar, pragati, aur vikas": BJP's Murlidhar Mohol lauds BJP showing in Pune, Pimpri polls- Navsari's upgrade in water, drainage network to benefit over 25,000 residents (Ld)
Father's liver donation gives new lease of life to 1-year-old Uzbek baby suffering from rare genetic liver disorder
Maharashtra civic polls: BJP leading in Chhatrapati Sambhajinagar, Congress in Latur
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC): वर्तमान में NSC पर 7.7% की वार्षिक ब्याज दर मिल रही है। इसमें ब्याज की गणना सालाना आधार पर कंपाउंड की जाती है और पूरा पैसा मैच्योरिटी के समय ही मिलता है।
- ₹50,000 के निवेश पर कितना मिलेगा रिटर्न?
- अगर आप 50,000 रुपये का निवेश 5 साल के लिए करते हैं, तो अनुमानित आंकड़े कुछ इस तरह होंगे:
- 5 साल की FD में: 7.5% ब्याज दर के हिसाब से 5 साल बाद आपकी राशि लगभग 72,497 रुपये हो जाएगी। यानी आपको करीब 22,497 रुपये का ब्याज मिलेगा।
- NSC में: 7.7% ब्याज दर के हिसाब से मैच्योरिटी पर आपको लगभग 72,452 रुपये मिलेंगे।
चौंकिए मत! यहाँ ब्याज दर कम होने के बावजूद FD का रिटर्न NSC के लगभग बराबर या थोड़ा ज्यादा इसलिए दिख रहा है क्योंकि FD में 'तिमाही कंपाउंडिंग' का लाभ मिलता है, जबकि NSC में सालाना कंपाउंडिंग होती है।
टैक्स और अन्य फायदे
निवेश के फैसले में टैक्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
इनकम टैक्स छूट: अच्छी खबर यह है कि दोनों ही योजनाओं में 5 साल के निवेश पर आपको आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।
TDS का झमेला: पोस्ट ऑफिस की इन योजनाओं की एक बड़ी खूबी यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाले पैसे पर पोस्ट ऑफिस अपनी तरफ से कोई TDS नहीं काटता है। हालांकि, यह आपकी कुल आय में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लग सकता है।
ऋण की सुविधा: जरूरत पड़ने पर आप NSC को बैंक में गिरवी रखकर लोन भी ले सकते हैं, जो इसे एक लचीला विकल्प बनाता है।
आपके लिए क्या बेहतर है?
चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपको मिलने वाला ब्याज हर साल आपके हाथ में आए (Annual Payout), तो पोस्ट ऑफिस FD बेहतर है क्योंकि इसमें ब्याज सालाना आधार पर बैंक खाते में क्रेडिट करने का विकल्प होता है।
वहीं, अगर आप अपनी बेटी की पढ़ाई या भविष्य के किसी बड़े लक्ष्य के लिए पैसा भूल जाना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह खुद-ब-खुद बढ़ता रहे, तो NSC एक शानदार अनुशासित बचत का तरीका है क्योंकि इसमें पैसा निकालने का विकल्प केवल 5 साल बाद ही मिलता है।









