Salary Hike Mutual Fund: सैलरी बढ़ते ही एसआईपी बढ़ाने से पहले जरूर चेक करें ये महत्वपूर्ण बातें
नौकरीपेशा लोगों के लिए सैलरी हाइक यानी वेतन में बढ़ोतरी हमेशा एक बड़ी खुशी लेकर आती है। जब भी हाथ में ज्यादा पैसे आते हैं, तो वित्तीय सलाहकार अक्सर यह सलाह देते हैं कि आपको अपने निवेश का दायरा भी बढ़ा देना चाहिए। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ज्यादातर लोग सैलरी बढ़ते ही अपनी मंथली एसआईपी की राशि को बढ़ाने का फैसला करते हैं, जिसे स्टेप-अप या टॉप-अप एसआईपी कहा जाता है। यह आपकी भविष्य की वेल्थ क्रिएशन यानी संपत्ति बनाने की रफ्तार को तेज करने का एक शानदार जरिया है। हालांकि, जोश में आकर सीधे अपने एसआईपी अमाउंट को बढ़ाने से पहले आपको अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति, बढ़े हुए खर्चों और भविष्य के लक्ष्यों का एक बार अच्छी तरह मूल्यांकन जरूर कर लेना चाहिए।
पहले अपने बढ़े हुए टैक्स स्लैब का हिसाब लगाएं
सैलरी इंक्रीमेंट का सीधा असर आपके हाथ में आने वाली नेट सैलरी यानी टेक-होम पे पर पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी होने के बाद आप इनकम टैक्स के एक नए और ऊंचे टैक्स स्लैब में पहुँच जाते हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी बढ़ी हुई सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार के पास चला जाता है। इसलिए, अपनी मंथली एसआईपी का अमाउंट बढ़ाने की योजना बनाने से पहले आपको यह स्पष्ट रूप से देख लेना चाहिए कि टैक्स कटने के बाद असल में आपके हाथ में कितनी अतिरिक्त नकदी आ रही है। अगर आप बिना सोचे-समझे निवेश की रकम बढ़ा देते हैं, तो महीने के अंत में आपको नकदी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन और आपातकालीन फंड की समीक्षा करें
जैसे ही लोगों की आमदनी बढ़ती है, वैसे ही उनके रहन-सहन का खर्च भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है, जिसे वित्तीय भाषा में लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। नए गैजेट्स खरीदना, बेहतर घर में शिफ्ट होना या छुट्टियां मनाने जाना जैसे खर्चे अक्सर सैलरी हाइक के बाद बढ़ जाते हैं। म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अपनी एसआईपी राशि तय करने से पहले इन नए और बढ़े हुए खर्चों का एक बजट बना लें। इसके साथ ही, आपकी बदली हुई जीवनशैली के हिसाब से आपका इमरजेंसी फंड यानी आपातकालीन कोष भी बड़ा होना चाहिए। निवेश बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके पास कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर की आपातकालीन राशि सुरक्षित रखी हुई है।अपने वित्तीय लक्ष्यों और एसेट एलोकेशन को रीबैलेंस करें
अपनी एसआईपी राशि में बढ़ोतरी करने से पहले अपने पुराने वित्तीय लक्ष्यों जैसे कि बच्चों की शिक्षा, घर की डाउनपेमेंट या रिटायरमेंट फंड की समीक्षा करना बेहद फायदेमंद होता है। आपको यह देखना चाहिए कि आपका वर्तमान पोर्टफोलियो किस एसेट क्लास जैसे कि इक्विटी या डेट फंड में कितना निवेशित है। अगर शेयर बाजार में आपका निवेश तय सीमा से अधिक हो गया है, तो बढ़े हुए सैलरी के पैसे को केवल इक्विटी एसआईपी में डालने के बजाय डेट फंड या अन्य सुरक्षित निवेश माध्यमों में डालकर अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहिए। इससे आपका रिस्क यानी जोखिम का स्तर संतुलित रहता है।लोन का भुगतान बनाम एसआईपी में निवेश बढ़ाना
यदि आपके ऊपर पहले से ही कोई पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन चल रहा है, तो सैलरी हाइक के बाद आपके पास दो रास्ते होते हैं। पहला रास्ता यह है कि आप अपने लोन का प्री-पेमेंट यानी समय से पहले भुगतान करके कर्ज के बोझ को कम करें, और दूसरा रास्ता अपनी मंथली एसआईपी को बढ़ाने का है। वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि आपके लोन की ब्याज दर आपके म्यूचुअल फंड से मिलने वाले संभावित रिटर्न से अधिक है, तो बढ़े हुए पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होता है। कर्ज मुक्त होने के बाद आप पूरी आजादी और बढ़े हुए फंड के साथ अपनी एसआईपी को और भी ज्यादा रफ्तार दे सकते हैं।Next Story