India Crude Oil Purchase: न रूस, न अमेरिका, भारत की स्‍ट्रेटेजी में बदलाव, 50 लाख बैरल तेल की इस खरीद से संकेत समझिए

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की कच्‍चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदने की स्‍ट्रेटेजी में बड़े बदलाव का संकेत है। वह अपने सोर्सेज को डायवर्सिफाई कर रहा है। इसका मकसद किसी एक या चंद देशों पर निर्भरता घटाना है। व्यापार सूत्रों ने बताया कि सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने इस हफ्ते एक टेंडर के जरिए पश्चिम अफ्रीका और मिडिल ईस्‍ट से 50 लाख बैरल कच्चा तेल (क्रूड) खरीदा।
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न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि आईओसी ने अपनी पारादीप रिफाइनरी में डिलीवरी के लिए अंगोला का किस्‍सानजे (Kissanje) और नेंबा (Nemba) कच्चा तेल (क्रूड) खरीदा।

भारत की टोकरी में ऊसान और मुरबन
कंपनी ने वडीनार में डिलीवरी के लिए एक्‍सोनमोबिल (ExxonMobil) से नाइजीरिया का ऊसान (Usan) कच्चा तेल और मर्क्‍यूरिया (Mercuria) से अबू धाबी का मुरबन कच्चा तेल भी खरीदा।

सूत्रों ने बताया कि आईओसी ने चेन्‍नई में डिलीवरी के लिए टोटलएनर्जीज की ट्रेडिंग इकाई टोस्‍टा से भी मुरबन क्रूड खरीदा।

उन्होंने आगे बताया कि पश्चिम अफ्रीकी कार्गो डेटेड ब्रेंट के मुकाबले लगभग 4 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर बिके। जबकि मुरबन कार्गो डेटेड ब्रेंट के मुकाबले लगभग उसी कीमत या थोड़े प्रीमियम पर बेचे गए।

कंपनियां आमतौर पर अपनी कमर्शियल बिक्री पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देती हैं।

स्‍ट्रेटेजी में बदलाव के साफ संकेत
  • भारत ने 2022 के बाद से रूस से भारी डिस्‍काउंट पर क्रूड खरीदा।
  • यह भारत के कुल आयात का करीब 40% तक पहुंच गया।
  • हालांकि, पिछले कुछ महीनों में रूस से तेल खरीदने में एक्‍जीक्‍यूशन रिस्‍क बढ़ा है।
  • इसकी वजह अमेरिकी प्रतिबंधों का सख्‍त होना, पेमेंट रूट की जटिलता और शिपिंग रूट से जुड़े नियम हैं।

आईओसी की तेल खरीद का पैटर्न दिखाता है कि भारत अब किसी एक देश या कॉरिडोर पर अपनी निर्भरता को सीमित नहीं रखना चाहता है। इसका मकसद यह है कि अगर सप्‍लाई में कोई रुकावट आए तो देश में ईंधन संकट खड़ा न हो।

अपने लिए रास्ते खुले रखना चाहता है भारत
पश्चिम अफ्रीका और संयुक्‍त अरब अमीरात (यूएई) से तेल की डिलीवरी ज्‍यादा भरोसेमंद मानी जाती है। दोनों से भारत ने तेल की खरीद की है। भारत अब सभी अंडे एक ही टोकरी में न रखने की स्‍ट्रेटेजी पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

रूसी और अमेरिकी तेल का विकल्प खुला रखकर पश्चिम अफ्रीका और मिडल ईस्ट से सोर्सिंग बढ़ाना यही दिखाता है। इससे पता चलता है कि भारत अपनी एनर्जी सिक्‍योरिटी के लिए कमर्शियल बेनिफिट के साथ जियोपॉलिटिकल रिस्क को भी पूरी तरह से बैलेंस करने में लगा है।