Fertilizer Crisis: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ गई इंसान के पेशाब की मांग, खाद संकट में किसानों ने तलाशे अनोखे विकल्प
नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर पारंपरिक नाइट्रोजन उर्वरकों (खाद) की आपूर्ति ठप होने के बाद दुनिया भर के किसान फसलों को बचाने के लिए नए और अनोखे विकल्प तलाश रहे हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक रासायनिक खादों जैसे यूरिया की आसमान छूती कीमतों के बीच अब इंसानी पेशाब , मुर्गे की बीट और केंचुआ खाद जैसे प्राकृतिक और जैविक विकल्प अचानक भारी मांग में आ गए हैं।

दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल यूरिया (एक प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी के चलते यूरिया की कीमतें कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। वहीं इस नाकेबंदी के कारण सप्लाई भी प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों ने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।
कितनी पहुंची कीमत?मिस्र का यूरिया युद्ध शुरू होने के बाद से 90% से अधिक बढ़कर 940 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि इस साल उर्वरक की कीमतों में करीब एक-तिहाई (30%) की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे खाद्य संकट गहराने का डर है। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इसके कारण 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं।
इंसानी पेशाब से बैक्टीरिया फीडइस संकट ने उन जैविक उत्पादों (बायो फर्टिलाइजर्स) को एक बड़ा मौका दे दिया है, जिन्हें किसान अब तक रासायनिक खादों से कमजोर मानते थे। इससे कई स्टार्टअप को भी ग्रोथ के मौके मिल सकते हैं।
पेशाब से बनी खाद
मुर्गे की बीट और केंचुए
सस्ते जैविक विकल्प
सरकारें भी दे रहीं बढ़ावाउर्वरकों की भारी किल्लत को देखते हुए यूरोपीय संघ (EU) ने इस सप्ताह एक नई फर्टिलाइजर स्ट्रेटेजी पेश की है। इसके तहत रासायनिक खादों के बजाय बायो-बेस्ड यानी जैव-आधारित उर्वरकों और बायोगैस से निकलने वाले कचरे के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल यूरिया (एक प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक) का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी के चलते यूरिया की कीमतें कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। वहीं इस नाकेबंदी के कारण सप्लाई भी प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों ने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।
कितनी पहुंची कीमत?मिस्र का यूरिया युद्ध शुरू होने के बाद से 90% से अधिक बढ़कर 940 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि इस साल उर्वरक की कीमतों में करीब एक-तिहाई (30%) की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे खाद्य संकट गहराने का डर है। वहीं संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इसके कारण 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं।
इंसानी पेशाब से बैक्टीरिया फीडइस संकट ने उन जैविक उत्पादों (बायो फर्टिलाइजर्स) को एक बड़ा मौका दे दिया है, जिन्हें किसान अब तक रासायनिक खादों से कमजोर मानते थे। इससे कई स्टार्टअप को भी ग्रोथ के मौके मिल सकते हैं।
पेशाब से बनी खाद
- फ्रांस के स्टार्टअप टूपी ऑर्गेनिक्स (Toopi Organics) ने स्कूलों और त्योहारों से इंसानी पेशाब इकट्ठा कर उसे एक ऐसे बैक्टीरिया फीड में बदलना शुरू किया है जो पौधों को बढ़ने में मदद करता है।
- फरवरी के बाद से कंपनी की बिक्री में 25% का उछाल आया है। कंपनी के प्रतिनिधि फ्रांस्वा जेरार्ड ने कहा कि युद्ध हमारे बिजनेस के लिए वरदान साबित हुआ है। कच्चे माल के रूप में पेशाब हर जगह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
मुर्गे की बीट और केंचुए
- मलेशिया की डेयरी कंपनी फार्म फ्रेश बीएचडी गाय-भैंसों के मलमूत्र को केंचुओं को खिलाती है, जिससे तैयार खाद घास को उपजाऊ बनाती है।
- अब वे इसमें मुर्गे की बीट भी मिला रहे हैं। ब्रिटेन के किसान जेम्स मिल्स बताते हैं कि अब मुर्गे की बीट बेचने वालों के पास खरीदारों की लंबी लाइन लगी है।
सस्ते जैविक विकल्प
- अमेरिकी कंपनी पिवट बायो (Pivot Bio) ने अपने जैविक खादों के दाम 15% तक घटा दिए हैं।
- इससे अमेरिकी किसानों को पारंपरिक खादों के मुकाबले 65% तक की बचत हो रही है। पिवट बायो को बिल गेट्स का भी समर्थन प्राप्त है।
- थाईलैंड के स्टार्टअप लिविंग रूट्स का उत्पाद यूरिया के मुकाबले बेहद सस्ता पड़ रहा है।
सरकारें भी दे रहीं बढ़ावाउर्वरकों की भारी किल्लत को देखते हुए यूरोपीय संघ (EU) ने इस सप्ताह एक नई फर्टिलाइजर स्ट्रेटेजी पेश की है। इसके तहत रासायनिक खादों के बजाय बायो-बेस्ड यानी जैव-आधारित उर्वरकों और बायोगैस से निकलने वाले कचरे के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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