सोना-चांदी को पछाड़ रही यह धातु, 6 महीने में दिया जबरदस्त रिटर्न, जानें कहां और कैसे करें निवेश
नई दिल्ली: अगर आप सोना और चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव से परेशान हैं तो एक धातु ऐसी है जो चुपचाप ऊपर चढ़ रही है। स्थिति ऐसी है कि रिटर्न के मामले में इसने पिछले 6 महीने में सोना और चांदी को पीछे छोड़ दिया है। यह धातु कॉपर यानी तांबा है। इसे लाल धातु भी कहा जाता है।
एमसीएक्स पर आज सुबह कॉपर में कुछ गिरावट आई, लेकिन बाद में स्थिति संभल गई। बुधवार दोपहर 1 बजे सितंबर डिलीवरी वाले कॉपर की कीमत 0.13% की तेजी के साथ प्रति किलो करीब 1415 रुपये थी। वहीं लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क कॉपर की कीमत 14,700 डॉलर प्रति टन को पार कर चुकी है जो इसका ऑल टाइम हाई है। जानकारों के मुताबिक कॉपर आगे भी बेहतर रिटर्न दे सकती है।

6 महीने में कितना रिटर्न?
कॉपर में तेजी के बड़े कारण1. AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग
दूसरा तरीका म्यूचुअल फंड में निवेश करना है। हालांकि भारत में अभी कोई कॉपर ईटीएफ नहीं है। हालांकि, निफ्टी मेटल ईटीएफ मौजूद हैं जो धातु और खनन क्षेत्र की कंपनियों के एक ग्रुप में निवेश करते हैं। इनमें Mirae Asset Nifty Metal ETF, HDFC Nifty Metal ETF आदि प्रमुख हैं। इनमें भी निवेश से पहले एक्सपर्ट से राय लें।
एमसीएक्स पर आज सुबह कॉपर में कुछ गिरावट आई, लेकिन बाद में स्थिति संभल गई। बुधवार दोपहर 1 बजे सितंबर डिलीवरी वाले कॉपर की कीमत 0.13% की तेजी के साथ प्रति किलो करीब 1415 रुपये थी। वहीं लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क कॉपर की कीमत 14,700 डॉलर प्रति टन को पार कर चुकी है जो इसका ऑल टाइम हाई है। जानकारों के मुताबिक कॉपर आगे भी बेहतर रिटर्न दे सकती है।
6 महीने में कितना रिटर्न?
- 6 महीने पहले यानी मार्च में कॉपर की औसत कीमत करीब 1200 रुपये थी। अभी यह 1415 रुपये है। ऐसे में कॉपर ने 6 महीने में करीब 18 फीसदी रिटर्न दिया है।
- एमसीएक्स पर 6 महीने पहले 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम करीब 1.60 लाख रुपये था। अभी यह करीब 1.53 है। ऐसे में इसमें 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।
- चांदी ने भी 6 महीने के रिटर्न में निराश किया है। 6 महीने पहले एमसीएक्स पर चांदी की कीमत प्रति किलो करीब 2.65 लाख रुपये थी। अभी यह करीब 2.41 है। ऐसे में इसमें 9 फीसदी की गिरावट आई है।
कॉपर में तेजी के बड़े कारण1. AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग
- अगर कॉपर की कीमत में तेजी की बात करें तो इसका सबसे बड़ा कारण डेटा सेंटर हैं। दरअसल, इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग में काफी वृद्धि हो रही है।
- इसके लिए डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग हार्डवेयर वायरिंग और कंपोनेंट्स का काफी इस्तेमाल हो रहा है। इन्हें बनाने में कच्चे माल के तौर पर कॉपर का इस्तेमाल किया जाता है।
- कॉपर को खदान से निकालने और इसकी रिफाइनिंग के लिए सल्फ्यूरिक एसिड काफी जरूरी होता है।
- दुनिया में ज्यादातर सल्फ्यूरिक एसिड की सप्लाई समुद्र मार्ग के जरिए मध्य पूर्व से होती है।
- ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के चलते सल्फ्यूरिक एसिड की सप्लाई बहुत ज्यादा नहीं हो रही है, जिससे इसकी कीमत में तेजी आई है। जिसका असर कॉपर की कीमत पर भी पड़ा है।
- दुनिया में कॉपर का प्रोडक्शन उस मात्रा में नहीं हो रहा है, जिस प्रकार से इसकी मांग बढ़ रही है। ऐसे में बढ़ती मांग और कम आपूर्ति के कारण इसकी कीमत में तेजी आ रही है।
- चिली दुनिया में सबसे ज्यादा कॉपर पैदा करने वाला देश है। वहां इस समय कॉपर का 19 साल में सबसे कम उत्पादन हुआ है।
- चिली में कॉपर उत्पादन में 2.6% की गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में इसकी कीमत में और तेजी आ सकती है।
दूसरा तरीका म्यूचुअल फंड में निवेश करना है। हालांकि भारत में अभी कोई कॉपर ईटीएफ नहीं है। हालांकि, निफ्टी मेटल ईटीएफ मौजूद हैं जो धातु और खनन क्षेत्र की कंपनियों के एक ग्रुप में निवेश करते हैं। इनमें Mirae Asset Nifty Metal ETF, HDFC Nifty Metal ETF आदि प्रमुख हैं। इनमें भी निवेश से पहले एक्सपर्ट से राय लें।
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